Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Diabetes Alert: 5 से 10 साल की उम्र में शुगर सबसे खतरनाक, सारा जीवन इंसुलिन के सहारे

World Diabetes Day दुनियां भर में डॉयबिटीज एक ऐसी बीमारी बन कर उभरी है, जो बहुत तेज़ी से बच्चों से लेकर युवाओं को अपना निशाना बना रही है। मोटापा एवं डॉयबिटीज का आपस में गहरा रिश्ता है। मोटे लोगों को डॉयबिटीज ज़्यादा होती है। मोटापा एवं डॉयबिटीज के मरीज़ पिछले कुछ सालों में समानान्तर रूप से बढ़े हैं।

diabetes alert

वरिष्ठ हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र चउदा बताते हैं कि पेनक्रियॉज ग्रंथि से इंसुलिन हार्मोन निकलता है, जो खून में शक्कर की मात्रा को नियंत्रित करता है । जब शरीर में इंसुलिन की कमी अथवा इंसुलिन की कार्यक्षमता में कमी हो जाती है तब खून में शुगर की मात्रा सामान्य से ज़्यादा हो जाती है, इसी अवस्था को डॉयबिटीज (मधुमेह) कहते हैं। डॉ. चउदा के अनुसार जब हम भोजन करते हैं, भोजन का कार्बोहाईड्रेट शरीर में ग्लूकोज़ में परिवर्तित हो जाता है। इंसुलिन इस ग्लूकोज़ को जलाकर शरीर की लाखों कोशिकाओं को ऊर्जा प्रदान करता है। इंसुलिन के बिना ग्लूकोज़ हमारे शरीर की कोशिकाओं में प्रवेश नहीं कर सकता।

Dr. Rajendra Chauda

बच्चे और वयस्कों में शुगर की बीमारी तेजी से बढ़ रही है
डॉ. राजेंद्र चउदा के अनुसार उनके पास आने वाले अधिकांश मरीजों में बीपी और शुगर सबसे कामन फैक्टर है। तमाम अस्पतालों में अधिकांश मरीज इन्हीं से संबंधित होते हैं। डॉयबिटीज के मामले में जो रिसर्च सामने आई हैं उनमें 5 से 15 वर्ष तक के बच्चों और किशोरों को डॉयबिटीज के कारण पेनक्रियाज में इंसुलिन कम बनती है, या बनती ही नहीं है। इसे गोलियों से कंट्रोल नहीं किया जा सकता। इनको जिंदगी भर इंसुलिन चिकित्सा लेनी पड़ती है। वयस्कों में 30 से 35 साल के बीच शुगर की बीमारी के मामले निकल रहे हैं। इनमें इंसुलिन रेजिस्टेंट से इसका सही उपयोग नहीं हो पाता है। तीसरे मामले में गर्भास्था की डायबिटीज के मामले में एकदम से बढ़ रहे हैं।

सेकंडरी डॉयबिटीजः दवाओं से भी बढ़ सकती है खून में शुगर
पेनक्रियॉज की बीमारी, वायरस संक्रमण, थायरॉइड एवं कुछ हार्मोंस, कुछ दवाइयां जैसे कार्टिसोन, बीटा ब्लॉकर्स, कोलेस्ट्रोल कम करने वाली स्टेटिन, थॉयज़ायड पेशाब की गोलियां तथा गर्भनिरोधक दवाएं खून में शक्कर की मात्रा बढ़ाते हैं। वंशानुगत शुगर के मामलों में शुगर के मरीज को यह बीमारी अपने परिवार के बुजुर्गों से वंशानुगत अर्थात पीढ़ी दर पीढ़ी मिलती जाती है।

डॉयबिटीज से होने वाले ख़तरों को ऐसे पहचाने
अगर डॉयबिटीज कंन्ट्रोल में नहीं है तो उससे निम्न ख़तरे हो सकते हैं,
डॉयबिटीज से शरीर की धमनियां प्रभावित होती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर, हार्ट अटेक, लकवा, गुर्दे की ख़राबी, गेंग्रीन एवं आंखों में अंधापन आदि की सम्भावना बढ़ जाती है। डॉयबिटीज कोमा, लम्बे समय तक डॉयबिटीज बहुत ज़्यादा होने पर मरीज़ को अत्यधिक थकान, पेट में दर्द एवं उल्टी होने लगती है। मरीज़ की सांस से एसीटोन, पके फलों जैसी बदबू आने लगती है एवं मरीज़ के बेहोश होने की स्थिति बन जाती है। इस अवस्था में मरीज़ को भर्ती कर इंसुलिन चिकित्सा आवश्यक होती है।

किन मरीज़ों को डॉयबिटीज की जाँच करवाना चाहिए
1. जिनके परिवार में किसी सदस्य को डॉयबिटीज की बीमारी है।
2. जो व्यक्ति मोटे हैं, व्यायाम नहीं करते, मानसिक तनाव में रहते हैं। अनियमित खानपान है एवं अत्यधिक शराब का सेवन करते हैं।
3. जिन्हें डॉयबिटीज की बीमारी के लक्षण मौजूद हैं।
4.जिन मरीज़ों को ब्लड प्रेशर, हार्ट अटेक, लकवा, आंख या गुर्दे में ख़राबी है।
5. जिन्हें गेंग्रीन हुआ है।
6. जो लम्बे समय से दमं श्वांस की एवं जोड़ों के दर्द की प्रचलित आयुर्वेदिक पुड़िया, जिसमें कार्टिसोंन रहता है, ले रहे हों।

डॉयबिटीज से बचाव और इसे कैसे कंट्रोल में रखा जा सकता है

1. संतुलित पौष्टिक आहार एवं नियमित जीवन शैली इस बीमारी का मुख्य इलाज है। जब संतुलित आहार एवं नियमित व्यायाम से डॉयबिटीज कंट्रोल ना हो तभी दवाएँ शुरु करना चाहिए।
2. वज़न को संतुलित रखें। वज़न का घटना या बढ़ना दोनों नुक़सानदायक हैं।
3. व्यायाम, प्रतिदिन 30 से 40 मिनिट तेज़ चलना, सायकिल चलाना। बेडमिंटन खेलना एवं जॉगिंग करना आवश्यक है।
4. तनाव मुक्त जीवन शैली, योग व प्राणायाम तनाव कम करने में सहायक हैं।
5.नींद, ७ घण्टे की पर्याप्त नींद ज़रूरी है ।
6. पैरों की देखभाल, पैरों की देखभाल चेहरे से ज़्यादा ज़रूरी है। पैरों को साफ़ एवं सूखे रखें नंगे पैर ना चलें। नाखून सावधानी से काटें। पैरों में अगर कोई छाला या घाव है तो उसका तुरंत इलाज करवाएं। पैरों में खून का संचार बनाए रखने के लिए पैरों के व्यायाम नियमित करें।
7. तंग कपड़े ना पहिनें, इससे खून का संचार बाधित होता है ।
8. शारीरिक स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि डॉयबिटीज के मरीज़ों को संक्रमण रोग अधिक होते हैं।

भोजन शैली कैसी रखें
1. एक बार में इकट्ठा भोजन 2 बार करने के स्थान पर थोड़ा हल्का भोजन दिन में 4.5 बार में लें ।
2. हाई प्रोटीन युक्त भोजन लें । आप साबुत अनाज़] गेहूँ] ज्वार, दालें, माढ़ निकला चाँवल, हरी सब्ज़ियाँ, सलाद, सप्रेटा दूध, दही, मठा निर्धारित मात्रा में ले सकते हैं। अदरक एवं दालचीनी लाभकारी है ।
3. शुद्ध घी, बटर एवं तेल का इस्तेमाल सीमित मात्रा में करें। हमेशा एक ही तरह का तेल के इस्तेमाल की जगह, तेल बदल बदल कर उपयोग करें ।
4. गुड़, शक्कर एवं मिठाई ना लें ।
5. ड्रॉय फ़्रूट्स में काजू, बादाम, पिस्ता एवं अखरोट लाभदायक हैं ।
6. डब्बा बंद ज़ूस, कोल्ड ड्रिंक्स ना लें, इसकी जगह ताज़े फल का सेवन करें ।
7. ग्रीन टी, इसमें मौजूद एन्टीओक्सिडेंन्ट खून में शुगर को नियंत्रित करता है ।
8. शराब का परहेज़ आवश्यक है। शराब से डॉयबिटीज की दवाओं का असर प्रभावित होता है।
जिससे खून में शुगर कम-बढ़ हो सकती है ।
9 . बीड़ी, सिगरेट पूर्णतः वर्जित है। इससे ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक, लकवा एवं गेंग्रीन की संभावना बढ़ जाती है ।
10 . उपवास ना रखें
11. अगर बीपी भी बढ़ता है तो उसे नियंत्रित रखें ।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+