कौन हैं सुरेश पचौरी? जिन्होंने तोड़ दिया कांग्रेस से 56 साल पुराना रिश्ता, 32 साल की उम्र में बने सांसद
MP Politics: पूर्व केंद्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुरेश पचौरी कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कांग्रेस से अपना 56 साल पुराना रिश्ता खत्म कर दिया है औ आज भाजपा में शामिल हो गए।
सुरेश पचौरी कांग्रेस की सरकार में वो कई मंत्रालयों के केंद्रीय राज्य मंत्री की जिम्मेदारियां संभाल चुके थे। वह लगातार 4 बार राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। राजधानी भोपाल के बीजेपी ऑफिस में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सुरेश पचौरी का स्वागत किया।

कई लोगों ने बीजेपी का दामन थामा
सुरेश पचौरी के साथ भाजपा में जाने वाले अन्य लोगों में धार से पूर्व सांसद गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी, पिपरिया से पूर्व विधायक विशाल पटेल, अर्जुन पालिया, इंदौर से पूर्व विधायक संजय शुक्ला और एनएसयूआई के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अतुल शर्मा शामिल हैं।
अध्यक्ष वी.डी शर्मा ने कहा
मध्य प्रदेश प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने कहा कि सुरेश पचौरी मध्य प्रदेश में कांग्रेस के राजनीति के संत हैं। ऐसे नेता का कांग्रेस में स्थान नहीं है। इसलिए उनको लगा कि उन्हें पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जाकर कुछ काम करने की आवश्यकता है।
56 में साल का कांग्रेस से रिश्ता खत्म
सुरेश पचौरी ने 1972 में एक युवा कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में अपने राजनीतिक कैरियर शुरू किया और 1984 में राज्य युवा कांग्रेस अध्यक्ष बने। 32 साल के उम्र में वह 1984 में राज्यसभा के लिए चुने गए और 1990, 1996 और 2002 में फिर से बने थे। एक केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में उन्होंने रक्षा, कार्मिक, सार्वजनिक शिकायत और पेंशन, और संसदीय मामले और पार्टी के जमीनी स्तर के संगठन कांग्रेस सेवा दल के अध्यक्ष भी रहे हैं। सुरेश पचौरी 56 साल कांग्रेस में रहे। उन्हें राजीव गांधी और सोनिया गांधी का बेहद करीबी माना जाता था।
उमा भारती और सुरेंद्र पटवा से चुनाव हारे
सुरेश पचौरी ने अपने राजनीतिक कैरियर में केवल 2 बार चुनाव लड़ा और दोनों बार हार का सामना करना पड़ा। 1999 में उन्होंने भोपाल सीट से उमा भारती के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन 1.6 लाख से ज्यादा मतों से हार का सामना करना। इसके बाद साल 2013 में भोजपुर से शिवराज सिंह चौहान सरकार में मंत्री और दिवंगत सीएम सुंदरलाल पटवा के भतीजे सुरेंद्र पटवा के खिलाफ चुनाव लड़ा। उस दौरान भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा।












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