तमंचे चलाने वाले हाथ अब ‘खादी’ बुनकर ‘बापू’ के 'सपनों को कर रहे साकार
सागर,03 जुलाई। मप्र के सागर में राजनीतिक दलों से जुडे नेता कुर्ते पायजामे और जैकेट खरीदने के लिए अब बाजार कम और जेल ज्यादा जाते हैं। यहां वाजिब दाम पर बाजार रेट से सस्ता कपडा मिल जाता है वह भी क्वालिटी वाला। जेल परिसर अब बाजार की तरह ही खादी और सिल्क पहनने वालों के लिए पहली पसंदीदा जगह बनता जा रहा है।

सभ्य समाज के खोटे सिक्के, अब चरखा चला रहे
समाज के खोटे सिक्के, कभी अपराध की दुनिया में धमक रखने वाले, खुंखार अपराधियों के तमंचे चलाने वाले हाथ अब हथकरघा पर 'खादी' बुनकर, गायों की सेवा कर 'बापू' के सपनों को साकार करने में जुटे हुए हैं। यह सब संभव हो पाया देश के दिगंबर जैन संत आचार्य विद्यासागर महाराज की प्रेरणा और आर्शीवाद से, उन्होंने यहां हथकरघा यूनिट लगाने पहल करते हुए आर्थिक मदद की थी।

आचार्य विद्यासागर महाराज आए थे, 01 करोड दिए थे
देश के दिगंबर जैन संत आचार्य विद्यासागर महाराज तीन साल पहले सेंट्रल जेल पहुंचे थे, यहां पर उन्होंने कैदियों का जीवन बदलने के लिए उन्हें स्वरोजगार से जोडने की पहल की थी। उन्होंने 1 करोड रुपए भी जेल प्रशासन को उपलब्ध कराए थे, जिससे यहां पर हथकरघा यूनिट की स्थापना हो सकी थी। तब से लेकर आज तक यह निरंतर बढती जा रही है।

54 लूम्स में 109 कैदी बुन रहे सपने
मप्र के सागर सेंट्रल जेल में गंभीर अपराधों में बंद कैदी हथकरघा और गांधीजी के चरखों पर खादी और सिल्क कपडा बुनने में लगे हैं। तीन साल पहले जेल में हथकरघा केंद्र की स्थापना हुई थी। इसके अलावा कई अन्य यूनिट भी लगाई गई हैं। हालफिलहाल तक यहां 54 लूम्स अर्थात कपडा बुनने हथकरघा संचालित हो रहे हैं। यहां 109 कैदी सुबह से शाम तक इन पर खादी, कॉटन के कपडे बुनते हैं।

कपडे और सामग्री बिक्री के लिए परिसर में दुकान भी संचालित
सागर सेंट्रल जेल में कैदियों द्वारा तैयार किए जा रहे कपडे, धोती-कुर्ता, साडी सहित अन्य खादी और कॉटन के कपडों को ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए जेल परिसर में ही दुकान खोली गई हैं। यहां पर कैदियों द्वारा तैयार सभी सामग्री का विक्रय भी कराया जाता है।

सभ्य समाज के खोटे सिक्के, अब चरखा चला रहे
समाज के खोटे सिक्के, कभी अपराध की दुनिया में धमक रखने वाले, खुंखार अपराधियों के तमंचे चलाने वाले हाथ अब हथकरघा पर 'खादी' बुनकर, गायों की सेवा कर 'बापू' के सपनों को साकार करने में जुटे हुए हैं। यह सब संभव हो पाया देश के दिगंबर जैन संत आचार्य विद्यासागर महाराज की प्रेरणा और आर्शीवाद से, उन्होंने यहां हथकरघा यूनिट लगाने पहल करते हुए आर्थिक मदद की थी।












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