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MP News: खंडवा में जलसंकट बना जनसंकट, सड़कों पर उतरीं महिलाएं, SDM से तीखी बहस, वीडियो वायरल

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में पिछले दो हफ्तों से गहराता जलसंकट अब जनाक्रोश में बदल गया है। 13 अप्रैल को शहर की सैकड़ों महिलाएं जब खाली मटकों और बाल्टियों के साथ इंदिरा चौक पहुंचीं और चक्काजाम कर दिया, तो यह साफ हो गया कि लोगों का धैर्य जवाब दे चुका है।

जहां प्रदर्शनकारी महिलाएं केवल पानी की गुहार लगाने आई थीं, वहीं मौके पर पहुंचे एसडीएम बजरंग बहादुर सिंह और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस ने हालात और बिगाड़ दिए। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में SDM और महिलाओं के बीच हुई बहस को साफ देखा और सुना जा सकता है। महिलाओं का आरोप है कि SDM ने उन्हें जेल भेजने और एफआईआर दर्ज कराने की धमकी दी, और अभद्र भाषा का प्रयोग किया।

Water crisis in Khandwa Women took to the streets heated argument with SDM video goes viral

जलसंकट की जड़ें, नर्मदा जल योजना की विफलता

खंडवा शहर में पेयजल आपूर्ति का प्रमुख आधार नर्मदा जल योजना है। लेकिन बीते दो हफ्तों में यह योजना लगातार विफल हो रही है। जानकारी के अनुसार, नर्मदा जल योजना की मुख्य पाइपलाइन पिछले 9 दिनों में चार बार फट चुकी है। इसकी वजह से शहर के कई हिस्सों में पानी की आपूर्ति ठप है। जिन क्षेत्रों में पानी पहुंच भी रहा है, वहां टैंकरों से भेजे जा रहे पानी की गुणवत्ता बेहद खराब है। लोग गंदे, बदबूदार पानी से न केवल परेशान हैं, बल्कि बीमार पड़ने का खतरा भी मंडरा रहा है।

स्थानीय निवासी संगीता बाई बताती हैं, "पिछले 15 दिन से एक बूंद पानी नल से नहीं आया। बच्चे बिना नहाए स्कूल जा रहे हैं। इतना गंदा पानी आ रहा है कि चाय भी नहीं बन सकती उससे।"

जब टूटा धैर्य, इंदिरा चौक पर मटका फोड़ प्रदर्शन

13 अप्रैल की सुबह करीब 9 बजे, इंदिरा चौक पर सैकड़ों महिलाएं खाली मटकों और बाल्टियों के साथ जमा हो गईं। वे नारे लगा रही थीं -

Water crisis in Khandwa Women took to the streets heated argument with SDM video goes viral

"पानी दो, पानी दो, नहीं तो कुर्सी छोड़ दो!"

महिलाओं ने सड़क पर बैठकर चक्काजाम कर दिया। कई मटके तो प्रदर्शन के दौरान तोड़ भी दिए गए। यातायात पूरी तरह बाधित हो गया और हाईवे पर गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं।

महिलाओं की मांग थी कि जल विभाग और नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर आकर स्थिति स्पष्ट करें और नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित करें।

SDM से टकराव

महिलाओं ने कहा कि "हमें जेल भेज दो, कम से कम पानी तो मिलेगा" मौके पर नगर निगम उपायुक्त सचिन सितोले और एसडीएम बजरंग बहादुर सिंह पहुंचे। यहां हालात शांत होने के बजाय और तनावपूर्ण हो गए।

महिलाओं का आरोप है कि SDM ने उन्हें धमकी देते हुए कहा - "तुरंत सड़क खाली करो, वरना एफआईआर होगी और जेल भेज दूंगा!" इस पर प्रदर्शनकारी भड़क उठीं। एक महिला कविता राठौर ने तीखा जवाब देते हुए कहा, "हम अपराधी नहीं हैं। पानी मांगने आए हैं। आप अधिकारी हैं, ये भाषा शोभा नहीं देती।" एक अन्य महिला ने कहा, "हमें जेल भेज दो, कम से कम वहां तो पानी मिलेगा!" यह पूरी बातचीत कैमरे में कैद हो गई और कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।

प्रशासन का रुख, आश्वासन और सफाई

करीब एक घंटे के गतिरोध के बाद नगर निगम उपायुक्त ने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया कि 48 घंटे के भीतर जल आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी। इसके बाद महिलाओं ने जाम हटाया।

SDM बजरंग बहादुर सिंह ने बाद में मीडिया से कहा, "कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्ती जरूरी थी। कोई गलत इरादा नहीं था। लोग उग्र हो रहे थे, इसलिए ऐसा कहना पड़ा।" हालांकि, उन्होंने महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार पर कोई माफ़ी या सफाई नहीं दी।

खंडवा कलेक्टर तन्मय वशिष्ठ ने भी एक बयान जारी कर कहा,

"जल संकट को गंभीरता से लिया जा रहा है। पाइपलाइन की मरम्मत युद्ध स्तर पर जारी है। जनता से अपील है कि धैर्य बनाए रखें।" SDM के बर्ताव का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, सियासी बयानबाजी शुरू हो गई।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा,"यह सरकार की विफलता है। महिलाएं पानी के लिए सड़क पर हैं और अधिकारी उन्हें धमका रहे हैं।" कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, "SDM की गुंडागर्दी शर्मनाक है। सरकार बताए कि जनता को पानी कब मिलेगा?"

बीजेपी प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने पलटवार करते हुए कहा, "जलसंकट एक तकनीकी समस्या है। कांग्रेस हर मुद्दे को राजनीतिक रंग देती है। प्रशासन स्थिति को नियंत्रण में लाने की पूरी कोशिश कर रहा है।"

तकनीकी सच्चाई, पाइपलाइन की हालत और सरकार की तैयारी

जल संसाधन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि नर्मदा जल योजना की पाइपलाइनें काफी पुरानी हैं। दबाव बढ़ने पर वे बार-बार फट रही हैं। "पाइपलाइन को बदलने के लिए करोड़ों रुपये की जरूरत है, जिसकी मंजूरी अब तक नहीं मिली है। फिलहाल अस्थायी मरम्मत ही समाधान है।"

स्थानीय नागरिक रमेश सोलंकी कहते हैं, "हर साल गर्मियों में यही होता है। अधिकारी आते हैं, बयान देते हैं, और फिर गायब हो जाते हैं। स्थायी समाधान कोई नहीं करता।"

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