एसपी और विधायक मधु गहलोत के बीच तीखी बहस का VIDEO वायरल, आगर-मालवा के कांस्टेबल पर ₹3 लाख रिश्वत का आरोप
Agar-Malwa policeN News: मध्य प्रदेश के पुलिस थानों में फरियादी की शिकायत कितने अच्छे तरीके से लिखी जाती है, यह तो इस खबर के सामने आने से पता चल गया है। दरअसल, अगर कोतवाली थाने में पदस्थ हेड कांस्टेबल पर शिकायत दर्ज करने की आवाज में ₹3 लाख लेने का आरोप लगा है।
इतना ही नहीं भाजपा विधायक मधु गहलोत को जब इस मामले की जानकारी लगी तो वह अपने समर्थकों के साथ एसपी कार्यालय का घेराव करने पहुंच गए। जहां पर उनकी पुलिस अधिकारियों से जमकर बहस हुई। मामले को शांत करने के लिए एसपी विनोद कुमार सिंह ने हेड कांस्टेबल राधेश्याम विश्वकर्मा और कांस्टेबल नरेंद्र सिंह भाटी को निलंबित कर मामले की जांच CSP को सौंप दी।

दरअसल, एक जमीन के सौदे में विक्रय पत्र संपादित होने के बाद पैसों के लेनदेन को लेकर हुए विवाद में एक पक्ष ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद दूसरे पक्ष ने भी शिकायती आवेदन दे दिया। केस दर्ज करने के आधार पर 28 अप्रैल को दोनों हेड कॉन्स्टेबल को 3 लाख रुपए की रिश्वत दी गई। 1 मई को धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया। इस पूरे मामले की जानकारी विधायक मधु गेहलोत को 16 मई को मिली।
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विधायक गेहलोत ने कहा कि जिले की पुलिस भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है। इस तरह की रिश्वतखोरी से सरकार का नाम खराब होता है। जो रिश्वतखोरों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, उससे सबको हिला कर रख दूंगा। चाहे 100 गाड़ी ले कर जाना पड़े, सीएम हाउस पर धरने पर बैठूंगा। विधानसभा में ऐसे भ्रष्ट लोग नहीं चाहिए। मैं भ्रष्ट हुआ तो काट दो मेरा टिकट, मैं इस्तीफा दे दूंगा।
1 करोड़ 75 लाख रुपए में जमीन का सौदा
आवेदनकर्ता डॉ. नरेंद्र सिंह ठाकुर और गिरीराज बंसिया ने बताया कि झलारा में एजाज एहमद से 1 करोड़ 75 लाख रुपए में जमीन का सौदा किया था। उसे 52 लाख रुपए नकद दिए गए थे। बाकी की राशि चेक से दी गई, लेकिन उसने बाहर जाने की बात कही और चेक वापस कर दिया। इसके बाद हमने बची हुई राशि उसके खाते में आरटीजीएस और दलाल के माध्यम से जमा कराई।
सौदे की पूरी राशि देने के बाद भी उसने झूठी शिकायत कर वकील के जरिए नोटिस भेजा और 75 लाख रुपए की मांग की। जिस पर हमने कोतवाली थाना में आवेदन दिया। यहां केस दर्ज करने के आधार पर दोनों हेड कॉन्स्टेबल ने तीन लाख की मांग की। हमने राशि भी दे दी। इसके बाद भी केस दर्ज नहीं किया गया। दबाव बनाने पर तीन दिन बाद एजाज खान के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया।
मामले में प्रधान आरक्षक राधेश्याम विश्वकर्मा ने सभी आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की कोई रिश्वत नहीं ली गई है। वहीं, प्रधान आरक्षक नरेंद्र सिंह भाटी से संपर्क नहीं हो पाया है।
एजाज खान ने बताया कि डॉ नरेंद्र सिंह ठाकुर और गिरीराज बंसिया के साथ जमीन बेची गई थी, जिसकी राशि अभी भी बकाया थी। 27 फरवरी को उन्होंने एसपी कार्यालय में इस मामले में कार्रवाई की मांग की थी। मार्च में हेड कॉन्स्टेबल राधेश्याम और नरेंद्र सिंह भाटी ने मुझे थाने पर बुलाया। डॉ. नरेंद्र सिंह ठाकुर और गिरीराज बंसिया भी वहाँ मौजूद थे और दोनों पक्ष की बात सुनी गई। उसके बाद मैं वहाँ से चला गया।
राधेश्याम ने मुझे वॉट्सऐप पर कई बार कॉल किए। हमने 20 मिनट और 25 मिनट तक बात की। उन्होंने कहा कि हमारी मांग पूरी हो जाती है तो टीआई और हम आपके साथ काम करेंगे। मैंने उनसे कहा कि मैं इलीगल नहीं हूं। मैंने जमीन बेची है, पीडीसी का पैसा अभी तक नहीं मिला है। आप कह रहे हैं कि केसीसी का पैसा बाकी है। रजिस्ट्री में उल्लेख है कि मुझे बकाया कर जमा करना है।
मुझे 41 लाख 42 हजार रुपए की पीडीसी चेक अभी तक नहीं मिली। इसलिए मैंने केसीसी जमा नहीं की। नहीं तो ये लोग नामांतरण करवा लेते, लेकिन 3 मई को केसीसी के 18 लाख रुपए जमा कर बंद करवा चुका था। फिर भी केसीसी को लेकर मुझ पर केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने विपक्षी पार्टी से पैसा लेकर मुझ पर झूठी कार्रवाई की है।












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