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क्या गिरफ्तार होंगे रावतपुरा सरकार? रिश्वतखोरी घोटाले में नामजद, आध्यात्मिकता की आड़ में भ्रष्टाचार का आरोप

MP News: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के पास स्थित श्री रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ एंड रिसर्च (SRIMSR) पर लगे गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप ने न केवल शिक्षा जगत को हिलाकर रख दिया है, बल्कि आध्यात्मिक क्षेत्र की साख पर भी गहरा सवाल खड़ा कर दिया है।

55 लाख की रिश्वत और मेडिकल कॉलेज की फर्जी मान्यता को लेकर सीबीआई (CBI) ने देशभर में 40 से अधिक ठिकानों पर छापे मारे हैं और 35 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, जिसमें रावतपुरा सरकार रविशंकर जी

Sword of arrest on Rawatpura government CBI takes major action in medical college recognition scam

अब सबसे बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है: क्या रावतपुरा सरकार को गिरफ्तार किया जाएगा?

CBI की शुरुआती जांच रिपोर्ट के मुताबिक, रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज को NMC (राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग) से मान्यता दिलवाने के लिए 55 लाख रुपये की रिश्वत दी गई। यह रकम हवाला चैनल के ज़रिए दिल्ली में बैठे अधिकारियों को ट्रांसफर की गई, जिनका काम था कॉलेज की अनुकूल निरीक्षण रिपोर्ट सुनिश्चित करना।

इस मामले में तीन निरीक्षण डॉक्टरों, कॉलेज के प्रशासनिक निदेशक अतुल तिवारी और मेडिकल डायरेक्टर डॉ. अतीन कुंडु सहित छह लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।

रावतपुरा सरकार पर गिरफ्तारी का साया: एफआईआर में नाम दर्ज, क्या सीबीआई दबाव में है?

रविशंकर जी महाराज को SRIMSR का चेयरमैन और रावतपुरा सरकार लोक कल्याण ट्रस्ट का मुख्य संरक्षक माना जाता है। उनका नाम सीधा एफआईआर में दर्ज किया गया है, लेकिन अब तक गिरफ्तारी नहीं हुई है। यह चुप्पी और देरी कई सवाल खड़े करती है:

  • क्या सीबीआई साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया में है?
  • या किसी राजनीतिक दबाव के चलते गिरफ्तारी टाल दी जा रही है?
  • क्या आध्यात्मिक प्रभाव और रसूख जांच की दिशा मोड़ रहे हैं?

कई कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि नामजद एफआईआर और सह-साजिशकर्ता के रूप में पेश किए गए व्यक्ति की गिरफ्तारी देर-सवेर होनी तय है, यदि साक्ष्य पर्याप्त हों।

Sword of arrest on Rawatpura government CBI takes major action in medical college recognition scam

घोटाले का नेटवर्क: सिर्फ SRIMSR नहीं, कई नामचीन मेडिकल कॉलेज जांच के घेरे में

CBI की जांच में यह बात सामने आई है कि यह रिश्वत प्रकरण सिर्फ रावतपुरा सरकार के कॉलेज तक सीमित नहीं है। कई अन्य मेडिकल कॉलेज, जैसे:

  • गीतांजलि यूनिवर्सिटी
  • इंडेक्स मेडिकल कॉलेज
  • टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज़

इनके भी शीर्ष अधिकारी इस घोटाले में शामिल पाए गए हैं। एनएमसी के 5 डॉक्टर और स्वास्थ्य मंत्रालय के 8 अधिकारी भी इस फर्जीवाड़े में सह-षड्यंत्रकारी बताए जा रहे हैं।

NMC की कार्रवाई: ब्लैकलिस्टिंग, 'ज़ीरो ईयर' और संस्थागत बहिष्कार की तलवार

NMC ने गिरफ्तार डॉक्टरों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। SRIMSR के लिए "ज़ीरो ईयर" घोषित किए जाने की संभावना जताई गई है, जिसका मतलब है कि कॉलेज में इस साल कोई नया एडमिशन नहीं होगा। यह न सिर्फ कॉलेज की साख पर धब्बा है, बल्कि छात्रों के भविष्य पर भी बड़ा संकट है।

CBI की आगे की रणनीति: क्या अगले नंबर पर होंगे रावतपुरा सरकार?

सूत्रों की मानें तो CBI अब: रविशंकर जी महाराज के खातों और संचार माध्यमों की जांच कर रही है। हवाला चैनलों के ट्रांज़ेक्शन डेटा से उनका सीधा संबंध तलाशा जा रहा है। कॉलेज प्रशासनिक बैठकों और फैसलों में उनकी भूमिका की पड़ताल हो रही है। यदि इन बिंदुओं पर पुख्ता साक्ष्य मिले तो गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

ट्रस्ट की चुप्पी और बचाव: जानबूझकर की गई दूरी?

रावतपुरा सरकार लोक कल्याण ट्रस्ट के मैनेजर विशाल गर्ग ने मीडिया से बात करते हुए सिर्फ इतना कहा कि"कॉलेज का संचालन अलग निकाय करता है, और हमें घटना की पूरी जानकारी नहीं है।"यह कथन सीधे तौर पर दूरी बनाने की कोशिश माना जा रहा है। लेकिन कानूनी रूप से, यदि चेयरमैन की अनुमति या संज्ञान में फर्जीवाड़ा हुआ हो, तो वह भी अभियुक्त की श्रेणी में आते हैं।

गिरफ्तारी की संभावना कम नहीं, पर मामला रसूख और कानून के बीच उलझा हुआ

इस पूरे घोटाले में रावतपुरा सरकार की गिरफ्तारी महज समय का सवाल हो सकता है, यदि CBI राजनीतिक या आध्यात्मिक दबाव से बच पाई।

  • एफआईआर में नाम,
  • कॉलेज का शीर्ष पद,
  • साक्ष्य जुटाने की गति,
  • और पब्लिक प्रेशर,
  • इन सभी का दबाव CBI पर है।
  • यदि जल्द ही कोई निर्णायक साक्ष्य सामने आता है तो रावतपुरा सरकार की गिरफ्तारी लगभग तय मानी जा सकती है।
  • आस्था की आड़ में अगर शिक्षा बेची गई, तो यह सिर्फ कानून नहीं, समाज और धर्म की भी पराजय होगी।

रिपोर्टर: लक्ष्मी नारायण मालवीय, वन इंडिया हिंदी

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