Snail Attack: केरल के बाद अब MP के दमोह में घोंघा अटैक, फसल, मिट्टी कर रहे चट
Snail Attack केरल के बाद अब मप्र के दमोह जिले में घोंघा अटैक का मामला सामने आया है। हटा तहसील के बिनती गांव में कई एकड़ खेतों में हजारों, लाखों की तादाद में घोंघे निकल रहे हैं। गांव में खेत से निकलकर यह घरों की दीवालों तक नजर आ रहे हैं। लोग इनसे काफी परेशान हैं। हालात इस कदर बिगड़ गए की किसान इन्हें बैग में भरकर जिला प्रशासन और कृषि विभाग तक पहुंच गए। इनसे बीमारियों के संक्रमण का खतरा भी बन गया है।

दमोह जिले के बिनती गांव बिनती गांव व आसपास के इलाके में हजारों की तादाद में घोंघा नजर आ रहे
मप्र के दमोह जिले के हटा तहसील के गांव में घोंघा का अटैक सामने आया हैं। बिनती गांव व आसपास के इलाके में हजारों-लाखों की तादाद में घोंघा ही घोंघा नजर आ रहे हैं। खेतों में ये फसल चट कर रहे हैं तो मिट्टी को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। सबसे ज्यादा मुसीबत यह घरों के आसपास, दीवारों से लेकर छत तक नजर आने लगे हैं। लोग इनसे खासे परेशान हो गए हैं। बीते रोज ऐसे ही घोंघों को एकत्रित कर किसान पॉलीथिन में भरकर कलेक्टोरेट पहुंचे थे।

दो साल से ज्यादा बढ़ गई समस्या, कहां से आ रहे पता नहीं
किसान टीकाराम, कोमल रजक, निरपत रजक ने स्थानीय मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि हमारे गांव में करीब दो साल से अचानक घोंघों की समस्या बढ़ गई है। इनकी साइज भी सामान्य घोंघों से बड़ी नजर आ रही है। इनके ऊपरी आवरण में शंखनुमा खोल रहता है। शुरुआत में इनकी संख्या सीमित थी, लेकिन अब अचानक से इनकी संख्या बेतहाशा बढ़ती जा रही है। ये फसलें नष्ट कर रहे हैं। पेड़ों पर चढ़कर भी उनकी पत्तियां नष्ट कर रहे हैं। इलाके में आधा सैकड़ा किसानों कि हजारों एकड़ खेत में फैले हैं। यह खेतों की मिट्टी से निकलकर अब घरों तक पहुंच रहे हैं।

घोंघे क्या इंसानों के लिए मुसीबत बन सकते हैं
सामान्यतः रेतीले इलाके, नदी, नजर, नालों या बारिश के सीजन में जब-तब नजर आने वाले घोंघे क्या इंसानों के लिए मुसीबत बन सकते हैं। दमोह जिले के हटा ब्लॉक के बिनती गांव में घोंघों की संख्या इतनी तेजी से बढ़ रही है कि ये किसानों के खेत-खलिहान में फसल को नष्ट करने पर अमादा हो गए हैं। दिन-दूनी रात चौगुनी इनकी तादाद नजर आ रही है। सैकड़ों एकड़ की फसलों को घोंघा नुकसान पहुंचा जा रहे हैं। किसान इतने हैरान और परेशान हो गए कि वे ऐसे सैकड़ों घोंघों को पॉलीथिन व थैले में भरकर जनसुनवाई में कलेक्टोरेट पहुंचे थे। उन्होंने अधिकारियों को ये दिखाते हुए इनकी समस्या बताई और फसलों व खेतों को हुए नुकसान की जानकारी देकर इनसे निजात दिलाने की गुजारिश की है। वहीं नष्ट फसलों का सर्वे कर मुआवजा दिलाने की मांग की है।

केरल में भी अटैक हुआ था, इनकी प्रजाति की जांच होना चाहिए
दमोह जिले के बिनती गांव में घोंघों के अटैक और इनकी बढ़ती आबादी को लेकर दमोह पीजी कॉलेज के प्रोफेसर नंदराम सुमन का कहना है कि बीते साल केरल में घोंघा की नई प्रजाति का अटैक हुआ था। इसमें फाइसेला एक्यूटाा पाई गई थी, यह इनवेटिंव एलियन प्रजाति का घोंघा है। यह दूसरे देशों से यहां पहुंचा था। यह प्रजाति अन्य प्राणियों को नुकसान पहुंचाती है। दमोह के हटा ब्लॉक में सामने आने वाले घोंघा की प्रजाति को लेकर जांच व परीक्षण कराया जाना चाहिए। समय रहते इनके नष्ट करने की व्यवस्था होनी चाहिए।

केरल के कोट्टायम जिले में अफ्रीकी घोंघे के अटैक से लोग परेशान
केरल राज्य के कोट्टायम जिले में बीते साल से अभी तक अफ्रीकी प्रजाति के घोंघे का आतंक नजर आ रहा है। यहां सरकार को बाकायदा इनको नष्ट करने के लिए अभियान चलाना पड़ा है। हाल ही में अगस्त महीने में यह फल, सब्जियों और फलों की फसलों को ये घोंघे नष्ट कर रहे थे। खेत, फॉर्म, खलिहान, गोदाम, मकानों तक इनका अटैक दिख रहा है। लोग रात-रात भर इनको पकड़ने और नष्ट करने में जुटे नजर आ रहे थे।

दिमागी बुखार तक दे सकते हैं यें घोंघो, वजन आधा से एक किलो तक
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक केरल के कोट्टायम जिले में जो घोंघों की प्रजाति का अटैक हुआ था, उसका वजन काफी ज्यादा था। वह आधा से एक किलो वजन तक के घोंघे थे। इनको देखकर बच्चे तो क्या बड़े तक डर जाते हैं। सबसे खरतनाक बात ये घोंघे और इनकी लार जो संक्रमण छोड़ती है, उससे इंसानों में दिमागी बुखार, मस्तिष्क ज्वर या इन्सेफ्लाइटिस रोग तक पैदा हो सकता है। कई बच्चों में मेनिन्जाइटिस का संक्रमण पाया गया हैं
सरकार को घोंघे पकड़ने, मारने पूरा प्लान बनाना पड़ा है
केरल सरकार ने बीते एक साल के अंदर इन घोंघों से निजात पाने के लिए पूरा प्लान तैयार कर इसमें किसान, पंचायतों और विभाग व सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर इनको नष्ट करने पर काम शुरु किया था। इसमें घोंघों को पकड़ने, लुभाने और कैद करने के लिए कई तरीके अपनाए जा रहे हैं। कोट्टायम, अलाप्पुझा और एर्नाकुलम जिलों में घोंघा को पकड़कर उन्हें नमक के खारे पानी में डुबोकर मारा गया, जमीन में गड्ढा कर हजारों, लाखों घोंघों को मारकर दफन किया गया, ताकि संक्रमण न फैले।












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