भोपाल की श्रुतिका जैन ने CBSE 12वीं बोर्ड में कैसे रचा इतिहास, 99.4% अंकों के साथ बनी राजधानी की टॉपर, जानिए
Bhopal News: जब लक्ष्य ऊंचा हो और सोच स्पष्ट, तो सफलता सिर झुकाकर आती है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है सागर पब्लिक स्कूल, गांधी नगर की छात्रा श्रुतिका जैन ने, जिन्होंने CBSE 12वीं बोर्ड परीक्षा में 99.4% अंक हासिल कर राजधानी की टॉपर बनने का गौरव प्राप्त किया है।
ह्यूमैनिटीज स्ट्रीम से पढ़ाई करने वाली श्रुतिका न सिर्फ अकादमिक रूप से उत्कृष्ट हैं, बल्कि उनके विचार और दृष्टिकोण भी आज के युवा वर्ग के लिए प्रेरणादायक हैं।

नियमित पढ़ाई और खुद के नोट्स बने सफलता की चाबी
श्रुतिका का कहना है कि उन्होंने कोई जादू नहीं किया, बस हर दिन की पढ़ाई को गंभीरता से लिया। "हर विषय की क्लास में ध्यान दिया, कॉन्सेप्ट वहीं क्लियर कर लेती थी। घर आकर सिर्फ जरूरी टॉपिक्स की दोहराई करती थी," श्रुतिका बताती हैं।
उन्होंने कोचिंग पर निर्भर नहीं रहकर सेल्फ स्टडी को अपनी ताकत बनाया। उनके मुताबिक, खुद से बनाए गए नोट्स ने परीक्षा के समय तेज़ रिवीजन में मदद की।
कोचिंग नहीं, आत्मनिर्भर पढ़ाई में विश्वास
"अगर स्कूल में पढ़ाई के वक्त ध्यान रखा जाए और घर पर खुद मेहनत की जाए, तो किसी को कोचिंग की जरूरत नहीं पड़ती," श्रुतिका कहती हैं। उनकी रणनीति साफ थी-NCERT से शुरुआत, फिर सैंपल पेपर और पुराने प्रश्नपत्र हल करना।
ह्यूमैनिटीज को बताया 'भविष्य की स्ट्रीम'
श्रुतिका का ह्यूमैनिटीज चुनना कोई संयोग नहीं था। उनका उद्देश्य स्पष्ट है-UPSC और ज्यूडिशियरी जैसी सेवाओं में जाना। "मुझे बचपन से इतिहास और सामाजिक विज्ञान में रुचि रही है। यह स्ट्रीम अब करियर की मजबूत नींव बन चुकी है," वे कहती हैं।
"रामायण और महाभारत को बनाना चाहिए स्कूल सिलेबस का हिस्सा"
श्रुतिका के विचार शिक्षा को लेकर भी गंभीर हैं। उनका मानना है कि भारतीय ग्रंथों जैसे रामायण और महाभारत को स्कूलों में पढ़ाया जाना चाहिए। "जब हम यूरोपीय इतिहास पढ़ सकते हैं, तो हमारे देश की सांस्कृतिक धरोहर क्यों नहीं?" श्रुतिका का कहना है कि इन ग्रंथों से बच्चों की सोच को दिशा मिलेगी, आत्मगौरव बढ़ेगा और भारत के मूल्यों की बेहतर समझ विकसित होगी।
पेंटिंग बनी मानसिक संतुलन की कुंजी
पढ़ाई के बीच मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए श्रुतिका ने अपनी हॉबी-आर्ट एंड क्राफ्ट को कभी नहीं छोड़ा। "मैं हर स्कूल आर्ट कॉम्पटीशन में भाग लेती थी, और प्रदेश स्तरीय कला उत्सव का हिस्सा भी रही हूं। यह मेरे लिए थेरेपी जैसा है," वह मुस्कराते हुए कहती हैं।
CBSE topper Bhopal: परिवार और शिक्षकों का संबल बना ताकत
श्रुतिका अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को देती हैं। "मेरे हर कदम पर मेरे पैरेंट्स और स्कूल के टीचर्स ने साथ दिया। उन्होंने न सिर्फ मेरी पढ़ाई में, बल्कि हर छोटे-बड़े फैसले में मेरा मनोबल बढ़ाया।"
अब सपना, सिविल सेवा और न्यायिक क्षेत्र में जाना
आगे की योजना के बारे में पूछने पर श्रुतिका कहती हैं-"मैं UPSC और लॉ की पढ़ाई कर देश की सेवा करना चाहती हूं। मेरा सपना है कि हमारे स्कूल पाठ्यक्रम में भारत की गहराई और गौरव को शामिल किया जाए, ताकि नई पीढ़ी भी इस पर गर्व कर सके।"
CBSE topper Bhopal: श्रुतिका जैन, एक नाम, एक प्रेरणा
श्रुतिका सिर्फ एक टॉपर नहीं, बल्कि एक विचारशील, उद्देश्यपूर्ण और आत्मनिर्भर छात्रा हैं, जो आने वाले युवाओं के लिए मिसाल बन चुकी हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि अगर लगन हो, तो संसाधन मायने नहीं रखते-सिर्फ समर्पण और सोच मायने रखती है।
- "पढ़ाई में नियमितता, सोच में स्पष्टता और इतिहास में आत्मगौरव हो-तो मंज़िल दूर नहीं होती।" - श्रुतिका जैन
- अब सभी की निगाहें उस दिन पर हैं जब यह नाम IAS ऑफिसर की नेमप्लेट पर दर्ज होगा।












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