Shivpuri News: मगरमच्छ को रस्सियों से बांधकर स्कूटी पर घुमाया, फिर तालाब में फेंका; वन विभाग ने कहा– ‘यह अपराध
Shivpuri News: मध्य प्रदेश के शिवपुरी शहर से एक हैरान करने वाली और चिंताजनक घटना सामने आई है, जहां एक मगरमच्छ के रिहायशी इलाके में घुस आने के बाद कुछ स्थानीय युवकों ने न केवल उसे रस्सियों से बांध दिया, बल्कि स्कूटी पर लादकर कॉलोनी में घुमाया भी।
बाद में मगरमच्छ को वापस तालाब में छोड़ दिया गया, लेकिन यह पूरी प्रक्रिया वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 का उल्लंघन है। वन विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की पहचान के प्रयास जारी हैं।

घटना कैसे घटी, तालाब से निकलकर कॉलोनी में पहुंचा मगरमच्छ
यह घटना रविवार रात करीब 8:30 बजे शिवपुरी के मनियर क्षेत्र की है। यहां काली माता मंदिर के पास स्थित एक तालाब से एक वयस्क मगरमच्छ निकलकर रिहायशी इलाके की गलियों में घूमने लगा। अचानक मगरमच्छ को देखकर स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई। इसके बाद कुछ युवकों ने बिना किसी अधिकारिक अनुमति के मगरमच्छ को रस्सियों और लकड़ियों की मदद से बांध दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवकों ने मगरमच्छ को स्कूटी के पीछे बांधकर पूरे मोहल्ले में घुमाया, जिससे वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। अंत में मगरमच्छ को उसी तालाब में छोड़ दिया गया, जहां से वह आया था।
Shivpuri News: शहर में नालों से पहुंच रहे हैं वन्य जीव
स्थानीय लोगों का मानना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। मनियर क्षेत्र का तालाब शहर के उन नालों से जुड़ा है जो करबला क्षेत्र होते हुए सांख्य सागर झील तक जाते हैं। यह झील माधव नेशनल पार्क के अंतर्गत आती है और अंतरराष्ट्रीय रामसर साइट के रूप में जानी जाती है। इसमें सैकड़ों मगरमच्छ रहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश या नालों में तेज बहाव के कारण मगरमच्छ शहर की ओर बहकर आ जाते हैं।
वन विभाग की प्रतिक्रिया, यह गंभीर अपराध है
वन विभाग ने इस घटना को गंभीरता से लिया है। रेंजर गोपाल जाटव ने बताया कि विभाग को घटना की कोई जानकारी पहले से नहीं दी गई थी। "मगरमच्छ एक संरक्षित वन्य जीव है और उसे इस तरह पकड़ना, घुमाना या डराना न केवल खतरनाक है, बल्कि यह कानूनी रूप से भी गलत है," उन्होंने कहा।
वन विभाग ने स्पष्ट किया कि इस हरकत को वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 9 और शेड्यूल I के तहत अपराध माना जाएगा। इस अधिनियम के तहत संरक्षित प्रजातियों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़, शिकार, या परेशान करने पर सात साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है।
Shivpuri वन विभाग की रेस्क्यू टीम 24x7 तैयार
रेंजर गोपाल जाटव ने यह भी बताया कि वन विभाग की प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम हर समय सक्रिय रहती है और इस तरह की स्थिति में आम लोगों को विभाग को तुरंत सूचना देनी चाहिए। उन्होंने कहा, "मगरमच्छ को पकड़ना एक जोखिम भरा काम है, इसमें आम लोगों की जान को भी खतरा हो सकता है। हम अपील करते हैं कि ऐसी घटनाओं में आम जनता खुद कार्रवाई न करे।"
मामले की जांच शुरू, फुटेज के आधार पर पहचान होगी
वन विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है और वायरल वीडियो व सीसीटीवी फुटेज के जरिए आरोपियों की पहचान की जा रही है। यदि युवकों की पहचान होती है, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पर्यावरणविदों की चिंता, यह चेतावनी है
स्थानीय पर्यावरणविद् डॉ. अनिल शर्मा ने इस घटना को एक "सामाजिक चेतावनी" बताया। उन्होंने कहा, "जंगलों के सिकुड़ते क्षेत्र और शहरों के फैलते विस्तार के कारण वन्य जीवों और इंसानों के बीच टकराव बढ़ते जा रहे हैं। जब तक हम जल स्रोतों, नालों और तालाबों की योजना के साथ सफाई और सीमांकन नहीं करेंगे, इस तरह की घटनाएं दोहराती रहेंगी।"
जागरूकता और व्यवस्था की जरूरत
शिवपुरी में हुई यह घटना न केवल कानून के उल्लंघन का मामला है, बल्कि यह वन्य जीवों के प्रति समाज की जागरूकता की कमी को भी उजागर करती है। जहां एक ओर युवकों की साहसिकता को कुछ लोग सराह रहे हैं, वहीं यह भी सच है कि यह एक गंभीर पर्यावरणीय और कानूनी मुद्दा है। प्रशासन और नागरिकों दोनों को मिलकर वन्य जीवों की सुरक्षा और मानव जीवन की रक्षा के लिए संतुलित और जिम्मेदार कदम उठाने होंगे।












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