सचिन तेंदुलकर ने एमपी के देवास पहुंचकर पूरा किया पिता का सपना, पिता को याद हुए भावुक
सीहोर, 16 नवंबर। 'क्रिकेट के भगवान' सचिन तेंदुलकर को संन्यास लिए आठ साल हो गए। इस मौके पर सचिन तेंदुलकर ने अपने पिता की इच्छा पूरी करते हुए आदिवासी समाज के 560 बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने की जिम्मेदारी ली है।

बता दें कि सचिन तेंदुलकर ने मध्य प्रदेश के करीब 42 गांवों में सेवा कुटीर बनाए हैं। जिनमें से सेवनिया और देवास जिले के बच्चों से मिलने वे मंगलवार को पहुंचे हैं। इन सेवा कुटीर में मुख्य रूप से बरेला भील और गोंड जनजाति के बच्चों को तेंदुलकर फाउंडेशन की मदद से पोषण भोजन और शिक्षा मिल रही है।
क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर इंदौर से सड़क मार्ग के जरिए देवास के गांव खोतगांव व संदलपुर पहुंचे और यहां पर एनजीओ के कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए अपने पिता को याद किया और कहा कि 'उनके पिता चाहते थे बच्चों के लिए कुछ करें। वो आज हमारे बीच होते बहुत खुशी होती'
इससे पहले जैसे ही सुबह देवास की सड़कों से सचिन तेंदुलकर का काफिला गुजरा तो लोगों ने उनको पहचान लिया। काफिल चापड़ा से बागली, पुंजापुरा होकर खातेगांव के संदलपुर पहुंचा। इस दौरान जहां से भी सचिन गुजरे। लोगों ने हाथों में तिरंगा लेकर उनका स्वागत किया। कई लोगों ने रास्तें में उनकी कार पर फूल बरसाए।
सचिन तेंदुलकर ने बच्चों से मिल कर उनका हाल-चाल जाना और कहा कि बच्चों को बेहतर सुविधा मुहैया कराने के लिए भी प्रयास करेंगे। सीहोर जिले के गांव सेवनिया, बीलपाटी, खापा, नयापुरा और जामुन झील के बच्चों को भी तेंदुलकर फाउंडेशन की मदद से पोषण भोजन और शिक्षा मिल रही है। अकेले सेवनिया में करीब 30 बच्चे हैं।












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