हत्यारे हाथी रामबहादुर को मिली सजा, अब बेड़ियों के बंधन में कटेगी जिंदगी
सागर, 14 जुलाई। पन्ना टाइगर रिजर्व में महावत के हत्यारे हाथी रामबहादुर को संभवत: अब बेड़ियों में ही जीना पडेगा। उसे यह सजा अपने महावत सहित दो हत्याओं के कारण मिली है। यह मदमस्त हाथी अब विश्वसनीय नहीं रहा, इस कारण इसकी पीठ पर बैठाकर अब न पर्यटकों को सैर कराई जाएगी न ही नियमित गश्त में उसे लगाया जाएगा। वन प्राणी मुख्यालय ने उसे जंजीरों में जकड़कर रखने का फैसला लिया है। पीटीआर में पहली दफा किसी हाथी को इस तरह की सजा मिल रही है।

रामबहादुर ने अपनेमहावत बुधराम रोतिया को कुचलकर मार दिया था
पन्ना टाइगर रिजर्व में बीते 4 जुलाई को 55 साल के हाथी रामबहादुर ने अपने 56 वर्षीय महावत बुधराम रोतिया को कुचलकर मार दिया था, उस समय वह टाइगर ट्रैकिंग की रूटीन गश्त पर था। महावत की हत्या के बाद रामबहादुर जंगल में ही फरार हो गया था। पीटीआर प्रबंधन उसका लगातार पीछा कर रहा था। 5 जुलाई को रात के समय रामबहादुर अपने आप ही हिनौता हाथी कैंप की तरफ आ गया था।

सुबह पांच बजे आया हिनौता कैंप, चार घंटे में काबू आ सका
पन्नाा टाइगर रिजर्व के प्रबंधन अनुसार सुबह करीब 5 बजे यह बिगडैल हाथी अपने आप हिनौता कैंप आ गया था। उसे काबू में करने के प्रयास किए गए, लेकिन वे नाकाफी रहे, इस कारण उसे बेहोश कर काबू में करने का निर्णय लिया गया था। विशेषज्ञों की टीम ने उसे ट्रेंकुलाइज कर बेहोश किया, उसके बाद उसे बेडियों में जकडा जा सका है। वन्य प्राणी मुख्यालय ने रामबहादुर को किसी भी तरह की गश्त या पर्यटक एक्टीविटीज से दूर रखकर जंजीरों से बांधकर रखने निर्देश दिए हैं। उसकी हर हरकत पर बारीकि से नजर रखी जा रही है तथा रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जा रही है।

दो हत्याएं कर चुका रामबहादुर, अब भरोसेमंद नहीं रहा
पीटीआर का नर हाथी रामबहादुर ने दो हत्याएं की हैं। सबसे पहले उसने 2020 सन में हिनौता वन क्षेत्र के रेंजर बीआर भगत को टाइगर ट्रेकिंग के दौरान सूंड से उठाकर नीचे पटक कर पैरों से कुचल दिया था, उसके बाद बीते 4 जुलाई को उसने अपने महावत बुधराम रोतिया को जंगल में ट्रेकिंग के दौरान मार डाला था। सूत्रों के मुताबिक अब यह हाथी भरोसेमंद नहीं रहा है तथा कोई भी महावत इसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।

हथिनी वत्सला पर भी दो बार हमला कर घायल कर चुका है
पीटीआर में हिनौता कैंप में उम्रदराज हथिनि वत्सला उसकी साथी रही है, लेकिन पूर्व में रामबहादुर उस पर भी हमला कर गंभीर रुप से घायल कर चुका है। लंबे इलाज के बाद वत्सला की जान बच सकी थी। मदमस्त हाथी की वापसी की खबर से प्रबंधन के हाथ-पैर फूल गए। रात में करीब तीन बजे हथिनी वत्सला को कैंप से हटाकर दूर ले जाया गया था। चूंकी रामबहादुर हाथी मदमस्त है, इस कारण वह बहुत आक्रामक व खतरनाक हो गया था, जिस कारण वह वत्सला को फिर नुकसान पहुंचा सकता था। मदमस्त हाथी कि दहशत इस कदर है कि बेहोश होने के बाद भी दूसरे महावत उसके पास जाने से डर रहे थे।

जंजीरों से आजाद होने लगा रहा जोर
पीटीआर प्रबंधन के अनुसार हाथी रामबहादुर फिलहाल तक सामान्य नहीं हो पाया है। चूंकी वह मदमस्त हो चुका है, ऐसे में मोटी-मोटी लोहे की जंजीरों से आजाद होने के लिए प्रयास करता रहता है। हाथी के एकदम पास कोई नहीं जा पा रहा है। उसे दूर से खाने-पीने की व्यवस्था की जा रही है। गर्मी के कारण उसके शरीर पर पानी की फुहार भी डाली जा रही है।












Click it and Unblock the Notifications