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नर्मदापुरम में बारिश का कहर: 817 मिमी वर्षा, तवा डैम से 1 लाख क्यूसेक पानी की निकासी, स्कूल बंद, बाढ़ का खतरा

मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में मानसून की मेहरबानी ने इस बार जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। 1 जून से 29 जुलाई 2025 तक जिले में औसतन 817.0 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो पिछले साल की समान अवधि (655.6 मिमी) से 24.6% अधिक है। खासकर 28-29 जुलाई को मूसलाधार बारिश ने जिले को जलमग्न कर दिया, जिसके चलते तवा डैम के 9 गेट खोलकर 1,00,224 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।

नर्मदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, और जिला प्रशासन ने नदी किनारे बसे गांवों में अलर्ट जारी किया है। स्कूलों में 29 और 30 जुलाई को छुट्टी घोषित की गई है। यह खबर नर्मदापुरम में बारिश की स्थिति, जलाशयों के हाल, और प्रशासनिक कदमों को विस्तार से उजागर करती है।

Rain havoc in Narmadapuram 817 mm rainfall water drained from Tawa Dam schools closed

वर्षा की स्थिति: 1 जून से 29 जुलाई 2025

मौसम विभाग के अनुसार, नर्मदापुरम जिले में इस मानसून सीजन (1 जून से 29 जुलाई 2025) में 817.0 मिमी औसत बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से काफी अधिक है। पिछले साल इसी अवधि में 655.6 मिमी बारिश हुई थी, यानी इस साल 161.4 मिमी अधिक बारिश हुई। जिले की सामान्य औसत वर्षा 1340 मिमी है, जिसका 61% हिस्सा अब तक पूरा हो चुका है। बंगाल की खाड़ी में बने लो प्रेशर एरिया और दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन ने बारिश को और तीव्र किया है।

तहसीलवार बारिश (28-29 जुलाई 2025)

28 और 29 जुलाई को जिले में भारी बारिश दर्ज की गई। तहसीलवार आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • पचमढ़ी: 94.2 मिमी
  • बनखेड़ी: 96.4 मिमी
  • सोहागपुर: 63.0 मिमी
  • पिपरिया: 60.4 मिमी
  • नर्मदापुरम: 51.9 मिमी
  • इटारसी: 41.8 मिमी
  • सिवनी मालवा: 23.0 मिमी
  • डोलरिया: 22.1 मिमी
  • माखननगर: 22.0 मिमी

पचमढ़ी और बनखेड़ी में सबसे अधिक बारिश ने इन क्षेत्रों में जलभराव और बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए। मौसम विभाग ने 29 जुलाई को ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए 4 से 8 इंच बारिश की चेतावनी दी थी, जो सटीक साबित हुई।

जलाशयों की स्थिति: तवा डैम में बढ़ा जलस्तर

लगातार बारिश और कैचमेंट एरिया में पानी की आवक ने जिले के प्रमुख जलाशयों को लबालब कर दिया है। 29 जुलाई 2025 की स्थिति इस प्रकार है:

  1. सेठानी घाट (नर्मदा नदी): जलस्तर 949.00 फीट, अधिकतम क्षमता 967.00 फीट। नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच रहा है।
  2. तवा डैम: जलस्तर 1159.80 फीट, अधिकतम क्षमता 1166.00 फीट। डैम के 9 गेट 7-7 फीट की ऊंचाई पर खोलकर 1,00,224 क्यूसेक पानी तवा नदी में छोड़ा जा रहा है।
  3. बरगी डैम: जलस्तर 419.30 मीटर, अधिकतम क्षमता 422.76 मीटर। बरगी डैम से भी 1,52,841 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।
  4. बारना डैम: जलस्तर 347.02 मीटर, अधिकतम क्षमता 348.55 मीटर। 50,000 क्यूसेक पानी की निकासी की जा रही है।

तवा डैम के गेट खोलने का निर्णय 29 जुलाई को सुबह 7:00 बजे लिया गया, क्योंकि डैम का जलस्तर स्थिर रखने के लिए अतिरिक्त पानी की निकासी जरूरी हो गई थी। जिला प्रशासन ने तवा और नर्मदा नदी के किनारे बसे गांवों-जैसे सुखतवा, केसला, और इटारसी के निचले इलाकों-में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और नदी किनारे न जाने की हिदायत दी है।

स्कूलों में छुट्टी: बच्चों की सुरक्षा प्राथमिकता

भारी बारिश और जलभराव के कारण नर्मदापुरम जिला शिक्षा अधिकारी ने 29 जुलाई को सभी स्कूलों (सरकारी, गैर-सरकारी, और CBSE) में छुट्टी घोषित की। आदेश सुबह 8:30 बजे जारी हुआ, जिसके कारण कई बच्चे स्कूल पहुंच चुके थे या निकल चुके थे। शिक्षकों को स्कूल में उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए। 30 जुलाई के लिए भी स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है, क्योंकि मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में 4-8 इंच बारिश की चेतावनी दी है।

जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा, "बच्चों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। बारिश और जलभराव के कारण सड़कों पर खतरा बढ़ गया है। स्थिति की समीक्षा के बाद 31 जुलाई के लिए भी निर्णय लिया जाएगा।" कई अभिभावकों ने देर से आदेश जारी होने पर नाराजगी जताई, क्योंकि बच्चे भारी बारिश में स्कूल के लिए निकल चुके थे।

जनजीवन पर प्रभाव: जलभराव और सड़कें बंद

नर्मदापुरम में लगातार बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। इटारसी, सोहागपुर, और पिपरिया में सड़कों पर 2-3 फीट पानी जमा हो गया, जिससे यातायात ठप हो गया। कई सब-स्टेशनों में पानी घुसने से बिजली आपूर्ति बाधित हुई। पचमढ़ी में भूस्खलन की आशंका के कारण पर्यटकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। नर्मदा नदी के बढ़ते जलस्तर ने सेठानी घाट के आसपास के इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा कर दिया है।

प्रशासनिक कदम और राहत कार्य

  • जिला प्रशासन ने बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं:
  • रेस्क्यू ऑपरेशन: SDRF और NDRF की टीमें निचले इलाकों में तैनात हैं। इटारसी और बनखेड़ी में जलभराव से प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
  • अलर्ट सिस्टम: नर्मदा और तवा नदी के किनारे बसे गांवों में लाउडस्पीकर और मैसेज के जरिए अलर्ट जारी किए गए।
  • राहत शिविर: सुखतवा और केसला में राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, जहां प्रभावित लोगों को भोजन और आश्रय प्रदान किया जा रहा है।

मॉनिटरिंग: तवा डैम और अन्य जलाशयों के जलस्तर पर जल संसाधन विभाग की नजर है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्थिति की समीक्षा के लिए आपात बैठक बुलाई और कलेक्टरों को राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा, "नर्मदापुरम सहित सभी प्रभावित जिलों में प्रशासन अलर्ट मोड में है। लोगों की सुरक्षा और राहत हमारी प्राथमिकता है।"

मौसम विभाग का पूर्वानुमान

मौसम विभाग ने 30 और 31 जुलाई के लिए नर्मदापुरम में भारी से अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। बंगाल की खाड़ी में बना साइक्लोनिक सर्कुलेशन और लो प्रेशर सिस्टम बारिश को और तीव्र कर रहा है। मौसम वैज्ञानिक डॉ. वेद प्रकाश सिंह ने बताया, "1 अगस्त तक नर्मदापुरम, रायसेन, और विदिशा में 200-400 मिमी बारिश हो सकती है। लोगों को जलभराव और बाढ़ के लिए तैयार रहना चाहिए।"

विशेषज्ञों की राय

पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ अनिल शर्मा ने कहा, "नर्मदापुरम में जलभराव की समस्या ड्रेनेज सिस्टम की कमी को दर्शाती है। तवा डैम से पानी की नियंत्रित निकासी जरूरी है, ताकि बाढ़ का खतरा कम हो।" मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने चेतावनी दी, "अगले 48 घंटे नर्मदापुरम के लिए महत्वपूर्ण हैं। बांधों का जलस्तर और बारिश की तीव्रता पर नजर रखना जरूरी है।"

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