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सीधी के खड्‌डी खुर्द में गर्भवती महिलाओं का सड़क के लिए हंगामा, लीला साहू की अगुआई, सांसद के बयान पर बवाल

मध्य प्रदेश के सीधी जिले के खड्‌डी खुर्द गांव में 8 गर्भवती महिलाओं ने खराब सड़क के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस आंदोलन की अगुआई कर रही हैं बघेली सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर लीला साहू, जो खुद भी 9 महीने की गर्भवती हैं। बारिश में दलदल बन चुकी 10 किलोमीटर लंबी कच्ची सड़क की वजह से गर्भवती महिलाओं और मरीजों को अस्पताल पहुंचने में भारी मुश्किल हो रही है। लीला ने पिछले एक साल से इस सड़क को पक्का करने की मांग उठाई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा।

इस मुद्दे पर बीजेपी सांसद डॉ राजेश मिश्रा का बयान, "डिलीवरी की डेट बताओ, एक हफ्ते पहले उठवा लेंगे", ने पूरे मामले को तूल दे दिया। कांग्रेस और सोशल मीडिया पर इस बयान को असंवेदनशील बताकर सांसद की खिंचाई हो रही है।

Pregnant women ruckus for road in Khaddi Khurd of Sidhi uproar over MP statement on Leela Sahu

क्या है खड्‌डी खुर्द का सड़क विवाद?

सीधी जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर खड्‌डी खुर्द गांव की सड़क पिछले कई सालों से कच्ची है। बरसात में यह सड़क कीचड़ और गड्ढों से भर जाती है, जिससे एंबुलेंस या कोई गाड़ी गांव तक नहीं पहुंच पाती। लीला साहू, जो एक यूट्यूबर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं, ने पिछले साल 2024 में इस सड़क की बदहाली को उजागर करने के लिए एक वीडियो बनाया था। इस वीडियो में उन्होंने सांसद डॉ. राजेश मिश्रा से खड्‌डी खुर्द से गजरी तक 10 किलोमीटर पक्की सड़क बनाने की मांग की थी। सांसद ने तब वादा किया था कि मानसून के बाद सड़क बन जाएगी, लेकिन जुलाई 2025 तक कोई काम शुरू नहीं हुआ।

7 जुलाई 2025 को लीला ने एक और वीडियो बनाया, जिसमें उनके साथ गांव की 8 गर्भवती महिलाएं थीं। वीडियो में उन्होंने बताया कि सड़क न होने की वजह से गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचने में जान का जोखिम उठाना पड़ता है। स्कूल जाने वाले बच्चे और बुजुर्ग भी इस सड़क की वजह से परेशान हैं। लीला ने सांसद और प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा, "जब सड़क बनाने की हिम्मत नहीं थी, तो झूठा वादा क्यों किया? मैं केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी या पीएम मोदी से मिलकर सड़क बनवाऊंगी।" यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ और पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया।

सांसद का बयान: "डिलीवरी डेट बताओ, उठवा लेंगे"

लीला के वायरल वीडियो पर जब पत्रकारों ने बीजेपी सांसद डॉ. राजेश मिश्रा से सवाल किया, तो उनका जवाब चौंकाने वाला था। उन्होंने कहा, "चिंता मत करो, डिलीवरी की डेट बताओ, एक हफ्ते पहले उठवा लेंगे। हमारे पास एंबुलेंस, आशा कार्यकर्ता, और अस्पताल की सारी सुविधाएं हैं।" इस बयान में "उठवा लेंगे" शब्द ने विवाद खड़ा कर दिया। कांग्रेस और सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे असंवेदनशील और महिलाओं की गरिमा के खिलाफ बताया।

कांग्रेस के आधिकारिक हैंडल ने ट्वीट किया, "सीधी की लीला साहू ने सड़क की मांग की, लेकिन सांसद राजेश मिश्रा का जवाब शर्मनाक है: 'डिलीवरी डेट बताओ, हफ्ते पहले उठा लेंगे!' सड़क तो नहीं बनी, संवेदना भी मर गई!"

सांसद ने बाद में भोपाल में दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में अपने बयान की सफाई दी। उन्होंने कहा, "मेरे बयान को गलत तरीके से पेश किया गया। मैंने 'हम' कहा, यानी हमारा सिस्टम। हमारी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, और डॉक्टर पूरी तरह से गर्भवती महिलाओं की देखभाल करते हैं। गांव-गांव में स्वास्थ्य सुविधाएं हैं, और जरूरत पड़ने पर हम सम्मान के साथ उन्हें अस्पताल पहुंचाते हैं।"

सड़क की स्थिति: स्वीकृत, लेकिन काम शुरू नहीं

सांसद डॉ. राजेश मिश्रा ने खड्‌डी खुर्द से गजरी की 10 किलोमीटर सड़क के बारे में बताया कि यह प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY-4) में स्वीकृत हो चुकी है। उन्होंने कहा, "मैं जून 2024 में सांसद बना। अगस्त में मुझे इस सड़क की जानकारी मिली। मैंने अक्टूबर 2024 में ही मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इसे अति महत्वपूर्ण सड़कों की सूची में शामिल करने को कहा था। DPR (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) बन रही है, और जल्द ही काम शुरू होगा।"

हालांकि, लीला साहू और गांव वालों का कहना है कि एक साल से ज्यादा समय बीत गया, लेकिन सड़क पर एक ईंट भी नहीं रखी गई। बरसात में सड़क दलदल में बदल जाती है, और एंबुलेंस या कोई गाड़ी गांव तक नहीं पहुंच पाती। लीला ने कहा, "हम हेलीकॉप्टर नहीं, सिर्फ सड़क मांग रहे हैं। गांव में 6-8 गर्भवती महिलाएं हैं। क्या सांसद जी हर किसी को हेलीकॉप्टर से उठवाएंगे?"

विपक्ष का हमला और सोशल मीडिया पर हंगामा

सांसद के बयान के बाद कांग्रेस ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, "सीधी की जनता ने बीजेपी को 29 की 29 सीटें दीं, फिर भी खड्‌डी खुर्द में सड़क नहीं बनी। सांसद का बयान महिलाओं का अपमान है।" कमलेश्वर पटेल, पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता, ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाने का वादा किया। उन्होंने ट्वीट किया, "लीला साहू की हिम्मत सराहनीय है। मैं मुख्यमंत्री से मांग करता हूं कि खड्‌डी खुर्द की सड़क जल्द बनवाएं।"

सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया

PWD मंत्री राकेश सिंह ने भी इस मामले पर बयान दिया, जो विवादों में घिर गया। उन्होंने कहा, "कोई सोशल मीडिया पर वीडियो डाल दे, तो क्या हम डंपर लेकर सड़क बनाने पहुंच जाएं? हर सड़क के लिए बजट और नियम तय हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि सड़कों की उम्र होती है, और पुरानी सड़कों पर गड्ढे होना स्वाभाविक है।

पंचायत मंत्री प्रह्लाद पटेल ने कहा, "मुझे इस मामले की जानकारी नहीं थी, क्योंकि मैं सोशल मीडिया नहीं देखता। अब मेरे संज्ञान में आया है, तो सड़क जरूर बनेगी।"

लीला साहू ने जवाब में कहा, "हम सिर्फ सड़क मांग रहे हैं, जिससे गांव का विकास हो। बच्चे स्कूल जा सकें, मरीज अस्पताल पहुंच सकें। अगर सड़क बनाना सांसद के बस में नहीं, तो मैं बच्चे के जन्म के बाद दिल्ली जाऊंगी और नितिन गडकरी जी से मिलूंगी।"

खड्‌डी खुर्द की हकीकत: सड़क क्यों जरूरी?

खड्‌डी खुर्द की 10 किलोमीटर कच्ची सड़क 30 से ज्यादा गांवों को जोड़ती है। बरसात में यह सड़क दलदल बन जाती है, जिससे:

  • गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचने में मुश्किल होती है।
  • स्कूल जाने वाले बच्चे कीचड़ में गिर जाते हैं।
  • मरीजों और बुजुर्गों को प्राइवेट गाड़ी भी नहीं मिलती।
  • हाल ही में एक महिला की मौत की खबर ने गांव वालों को और चिंता में डाल दिया है।
  • स्थानीय निवासी रमेश परमार ने कहा, "हमने सांसद और विधायक को वोट दिया, लेकिन सड़क के लिए सिर्फ वादे मिले। लीला साहू ने हिम्मत दिखाई, लेकिन सांसद का जवाब सुनकर गुस्सा आता है।"

क्या हो सकते हैं अगले कदम?

  • सड़क निर्माण की शुरुआत: PMGSY-4 के तहत सड़क स्वीकृत हो चुकी है, तो सरकार को जल्द काम शुरू करना चाहिए।
  • जांच कमेटी: सड़क निर्माण में देरी की वजह की जांच के लिए एक कमेटी बनाई जाए।
  • स्वास्थ्य सुविधाएं: गांव में मोबाइल हेल्थ यूनिट या अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र शुरू किए जाएं।
  • जागरूकता अभियान: ग्रामीणों को हेल्पलाइन नंबर और आशा कार्यकर्ताओं की जानकारी दी जाए।
  • कानून विशेषज्ञ डॉ अनिल शर्मा ने कहा, "सांसद का बयान असंवेदनशील है। सड़क जैसी बुनियादी सुविधा देना सरकार की जिम्मेदारी है। अगर PMGSY में सड़क स्वीकृत है, तो देरी क्यों हो रही है, इसकी जांच होनी चाहिए।"
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