MP News: जनजाति सम्मलेन में झाबुआ आ रहे पीएम मोदी, जय आदिवासी युवा संगठन ने रखीं ये मांगे

PM MODI On Jhabua Tour: लोकसभा चुनाव को लेकर तैयारी शुरू कर दी गई है, जहां मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा चुनाव का आगाज करने आ रहे हैं। यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनजाति सम्मेलन में हिस्सा लेंगे, जहां वे आदिवासियों को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे को लेकर तैयारियां पूरी हो चुकी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के झाबुआ दौरे से पहले वन इंडिया हिंदी ने आदिवासी संगठनों से सरकार के 5 सालों के किए कामों पर राय लेने की कोशिश की, तो वहीं आदिवासी संगठन ने सरकार के 5 सालों का लेखा-जोखा बताने के साथ ही भविष्य के लिए अपनी कई मांगे सरकार के सामने रखी है।

Jhabua

जयस के राष्ट्रीय अध्यक्ष लोकेश मुजाल्दा ने वन इंडिया हिंदी के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा की, प्रधानमंत्री आदिवासी अंचल में आकर लोकसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर रहे हैं, लेकिन आज यदि आदिवासी समाज की स्थिति देखे तो आदिवासी समाज में पलायन की समस्या खत्म नहीं हुई। बेरोजगारी दिन प्रतिदिन बढ़ती चली जा रही है। आदिवासियों के साथ-साथ एससी और ओबीसी के युवा भी रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन उनके रोजगार की व्यवस्था नहीं हो पा रही है।

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    हाल ही में बड़वानी में तहसीलदार के द्वारा आदिवासी किसान को थप्पड़ जड़ देने की घटना को लेकर जयस अध्यक्ष लोकेश मुजाल्दा ने कहा की, आदिवासियों पर अत्याचार दिन प्रतिदिन बढ़ता चला जा रहा है। अफसर भी आदिवासियों को प्रताड़ित करने लगे हैं। अफसरशाही इतनी तानाशाह हो गई है कि, आदिवासी किसान को थप्पड़ जड़ देते हैं।

    प्रधानमंत्री जहां झाबुआ में आ रहे हैं, उसी के पास बदनावर में कुछ दिनों पूर्व जयस ने आंदोलन किया था, वहां पीएम मित्र टेक्सटाइल के नाम पर आदिवासियों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है। हम उसका विरोध कर रहे हैं। आदिवासी किसान कर्ज के कारण आत्महत्या कर रहे हैं।

    हमने पहले ही सरकार को कहा है, संविधान में जो पांचवी अनुसूची का प्रावधान है, उसको अमल में लाया जाए। चाहे कांग्रेस पार्टी की सरकार रही हो, और अभी वर्तमान में भाजपा की सरकार है। दोनों ही पांचवी सूची को धरातल पर अमल में लाने का कोई प्रयास नहीं कर रहे, उससे हमारे अनेक मुद्दों का समाधान हो जाता। हम चाह रहे हैं कि, जो बेरोजगार हैं उन्हें नौकरी दी जाए, लेकिन उल्टा यहां पर जो आदिवासियों की बची ku कूची जमीन है, उससे उन्हें बेदखल किया जा रहा है।

    आदिवासियों को लुभाने के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च कर दिए जाते हैं। बड़े-बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में करोड़ों रुपए का खर्च होगा, लेकिन आदिवासियों की स्थिति बदल नहीं रही। आज भी आदिवासी हाशिए पर हैं, चर्चा हो रही है क्या आरक्षण खत्म किया जाएगा, जब संविधान में किसी को बराबरी पर आने का अधिकार दिया जा रहा है, तो भी कोशिश की जा रही है खत्म करने की।

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