कूनो पार्क में अब आजाद घूम रहे चीते, पीएम मोदी बोले- अभी इनको थोड़ा वक्त देने की जरूरत
नई दिल्ली, 17 सितंबर: करीब 70 साल बाद भारत में चीतों की वापसी हो गई है। नामीबिया से आए चीतों को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कूनो नेशनल पार्क के क्वारंटाइन बाड़े में छोड़ दिया। इस दौरान मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और राज्यपाल भी मौजूद रहे। चीतों को छोड़ने के बाद पीएम ने देश की जनता के नाम एक संदेश जारी किया। पीएम मोदी के मुताबिक मानवता के सामने ऐसे अवसर बहुत कम आते हैं जब समय का चक्र हमें अतीत को सुधारकर नए भविष्य के निर्माण का मौका देता है। आज सौभाग्य से हमारे सामने एक ऐसा ही क्षण है। दशकों पहले जैव-विविधता की सदियों पुरानी जो कड़ी टूट गई थी, विलुप्त हो गई थी, आज हमें उसे फिर से जोड़ने का मौका मिला है। आज भारत की धरती पर चीते लौट आए हैं। मैं ये भी कहूंगा कि इन चीतों के साथ ही भारत की प्रकृतिप्रेमी चेतना भी पूरी शक्ति से जागृत हो उठी है।
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पीएम ने कहा कि मैं हमारे मित्र देश नामीबिया और वहां की सरकार का भी धन्यवाद करता हूं, जिनके सहयोग से दशकों बाद चीते भारत की धरती पर वापस लौटे हैं। मुझे विश्वास है कि ये चीतें ना केवल प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारियों का बोध कराएंगे बल्कि हमारे मानवीय मूल्यों और परंपराओं से भी अवगत कराएंगे। उन्होंने कहा कि ये दुर्भाग्य रहा कि हमने 1952 में चीतों को देश से विलुप्त तो घोषित कर दिया, लेकिन उनके पुनर्वास के लिए दशकों तक कोई सार्थक प्रयास नहीं किया। आज आजादी के अमृतकाल में अब देश नई ऊर्जा के साथ चीतों के पुनर्वास के लिए जुट गया है।
प्रधानमंत्री के मुताबिक कूनो नेशनल पार्क में जब चीते दौड़ेंगे, तो यहां का ग्रासलैंड इकोसिस्टम फिर से बहाल होगा, इससे जैव विविधता और बढ़ेगी। आने वाले दिनों में यहां पर्यावरण पर्यटन भी बढ़ेगा। यहां विकास की नई संभावनाएं जन्म लेंगी। पीएम मोदी ने सभी से चीतों को वक्त देने की अपील की। उन्होंने कहा कि कूनो नेशनल पार्क में इन चीतों को देखने के लिए लोगों को धैर्य दिखाना होगा और कुछ महीनों तक इंतजार करना होगा। आज ये चीते मेहमान बनकर आए हैं। कूनो को अपना घर बनाने में सक्षम होने के लिए हमें इन चीतों को कुछ महीने का समय देना होगा।
इंटरनेशनल गाइडलाइन का हो रहा पालन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि अंतरराष्ट्रीय दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए भारत इन चीतों को बसाने की पूरी कोशिश कर रहा है। हमें अपने प्रयासों को विफल नहीं होने देना चाहिए। भारत के लिए प्रकृति और पर्यावरण, पशु और पक्षी, केवल स्थिरता और सुरक्षा के बारे में नहीं हैं। हमारे लिए ये हमारी संवेदनशीलता और आध्यात्मिकता का आधार भी हैं। आज 21वीं सदी का भारत दुनिया को संदेश दे रहा है कि अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी परस्पर विरोधी क्षेत्र नहीं हैं।












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