MP News: पराली-नरवाई से किसानों को होगा लाखों का फायदा, कैसे, जानिए

मध्यप्रदेश में कृषि विभाग द्वारा जिले के किसानों को गेंहू तथा अन्य फसलों को काटने के बाद बचे हुए अवशेष (नरवाई) नहीं जलाने की सलाह दी गई है। उप संचालक कृषि एसएस राजपूत ने किसानों को सलाह दी है कि नरवाई जलाने से एक ओर जहां खेतों में अग्नि दुर्घटना की आशंका रहती है, वहीं मिट्टी की उर्वरकता पर भी विपरीत असर पाता है।

इसके साथ ही धुएँ से कार्बन डायआक्साइड की मात्रा वातावरण में जाती है और इससे वायु प्रदूषण होता है। मिट्टी की उर्वरा शक्ति लगभग 6 इंच की ऊपरी सतह पर ही होती है। इसमें खेती के लिए लाभदायक मित्र जीवाणु उपस्थित रहते हैं।

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नरवाई जलाने से यह जीवाणु नष्ट हो जाते हैं, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति को नुकसान होता है। नरवाई जलाने की बजाए यदि फसल अवशेषों को एकत्रित करके जैविक खाद बनाने में उपयोग किये तो यह बहुत लाभ दायक होगा। नाडेप तथा वर्मी विधि से नरवाई से जैविक खाद आसानी से बनाई जा सकती है। इस खाद में फसलों के लिए पर्याप्त पोषक तत्व रहते हैं। इसके आलावा खेत में रोटावेटर अथवा डिस्क हैरो चलाकर भी फसल के बचे हुए भाग को मिट्टी में मिला देने से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है।

किसानों से नरवाई नहीं जलाने की अपील

जिले के विकासखंड चौरई के ग्राम बिंझावाड़ा निवासी कृषक गिरजानंद सनोडिया ने ग्राम हरनभटा में अपने खेत में हुई आगजनी की घटना को लेकर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है। जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता की मां के नाम पर स्थित तीन एकड़ खेत में कृषि उपकरण, पाइप और बोरिंग की व्यवस्था रखी गई थी। 5 अप्रैल 2025 को दोपहर लगभग 2 बजे डालचंद सनोडिया नामक व्यक्ति द्वारा अपने खेत की नरवाई में लापरवाही पूर्वक आग लगा दी गई। गर्मी के चलते आग तेजी से फैल गई और आसपास के खेतों को भी अपनी चपेट में ले लिया। इस घटना में शिकायतकर्ता के खेत में लगी 40 नग 2 इंची पाइप एवं लगभग 1200 फीट बोरिंग पाइप जलकर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। साथ ही, पड़ोसियों के खेतों में भी आग से पाइपलाइन एवं अन्य कृषि सामग्री जलकर नष्ट हो गई।

कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह द्वारा नरवाई जलाने पर पूर्व में ही प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया जा चुका है। इसके बावजूद नियमों की अनदेखी करते हुए खेत में आगजनी की गई, जिससे आसपास के किसानों को नुकसान हुआ। क्षेत्र में लगातार कृषि एवं राजस्व विभाग के माध्यम से किसानों को जागरूक किया जा रहा है कि वे नरवाई में आग न लगाएं। इसके बावजूद कुछ किसानों द्वारा की जा रही ऐसी लापरवाही पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

उप संचालक कृषि ने बताया कि, जिला प्रशासन व विकासखंड स्तर पर कृषि विभाग द्वारा सुपर सीडर मशीन अनुदान पर उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे बिना नरवाई जलाए अगली फसल की बोनी की जा सके। चांद और चौरई क्षेत्र के लगभग 800 कृषकों ने इस वर्ष ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल नरवाई जलाए बिना बोई है, जिससे उन्हें न केवल बेहतर उत्पादन मिला है बल्कि पर्यावरण भी सुरक्षित बना हुआ है। प्रशासन ने पुनः अपील की है कि किसान नरवाई न जलाएं और वैज्ञानिक कृषि विधियों को अपनाकर पर्यावरण और समाज हित में सहयोग करें।

किसानों से अपील की जा रही है

मध्यप्रदेश के इंदौर जिले में गेहूं फसल की कटाई का कार्य लगभग पूर्णता की ओर है। गेहूं फसल की कटाई के पश्चात सामान्य तौर पर किसान नरवाई में आग लगा देते हैं, जिससे पर्यावरण में प्रदूषण के साथ-साथ मिट्टी की संरचना भी प्रभावित होती है। जिले में गेहूं की कटाई के बाद बचे हुए फसल अवशेष (नरवाई) जलाना खेती के लिये नुकसान दायक कदम है। नरवाई प्रबंधन हेतु किसानों को कृषि विभाग द्वारा लगातार जागरूक किया जा रहा है उनसे अपील की जा रही है कि वह नरवाई को जलाए नहीं।

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