Panna Tiger Reserve: बाघिन को लकवा लगा, घिसटने लगी, इंसान उठा रहे शावकों की देखभाल का जिम्मा
Panna: करीब साढ़े तीन महीने पहले मां बनी पन्ना टाइगर रिजर्व की बाघिन पी-234 के पीछे के पैर में लकवा मार गया। बाघिन चलने-फिरने शिकार से लाचार हो गई। इलाज से आराम नहीं लगा तो उसे इलाज के लिए भोपाल भेजा गया है।

पन्ना टाइगर रिजर्व के अकोला इलाके पर राज करने वाली बाघिन पी-234 ने कुछ महीनों पहले दो शावकों को जन्म दिया था। बीते दिनों एक पानी के स्रोत के पास बाघिन को लड़खड़ाते हुए व घिसटकर चलते देखा गया था। टाइगर रिजर्व के डॉक्टरों ने उसे बेहोश कर चेक किया तो उसके पीछे के एक पैर में लगवा मार गया है। करीब 10 दिन तक उसका पन्ना में ही स्थानीय स्तर पर इलाज किया गया, लेकिन जब आराम नहीं लगा तो उसे बीते दिनों ट्रेंकुलाइज कर बेहतर इलाज के लिए भोपाल भेजा गया है।
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दो शावकों पर संकट, कैसे होगी देखरेख
बाघिन पी 234 ने करीब साढ़ें तीन महीने पहले अकोला बफर जोन में दो शावकों को जन्म दिया था। मई में वह शावकों को बाहर लेकर निकलने लगी थी। बीते दिनों जंगल के अलग-अलग इलाकों में शावकों की उछलकूद पर्यटकों का मनमोह रही थीं। अचानक से बाघिन के बीमार होने के कारण उसके दो शावकों पर पालन-पोषण और देखरेख का संकट आ गया। वैसे पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने शावकों पर नजर रखने के लिए 24 घंटे टीम को तैनात कर दिया है। उन्हें कोई परेशानी होती है तो जंगल में ही बने बाड़े में दोनों शावकों को शिफ्ट कर दिया जाएगा।












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