Opinion: सत्ता की राह में बाधा बनने वाला 'एमपी का विंध्य', बनेगा सीएम शिवराज सिंह का भविष्य
Opinion: मध्य प्रदेश में सत्ता के संग्राम के लिए 2023 के हिसाब से सियासी घोड़े अपनी-अपनी रफ्तार पकड़ते जा रहे हैं। राजनीति की मौजूदा तासीर में कहीं किसी के लिए पलड़ा भारी हैं तो किसी के लिए हल्का। सत्ता की चाबी हासिल करने की रेस में कांग्रेस के कमलनाथ के मुकाबले सीएम शिवराज सिंह आगे हैं।
जीतने की तमाम चुनौतियों के बीच विंध्य क्षेत्र भी मुंह बांये कई नज़रों से देख रहा हैं। विधानसभा-लोकसभा चुनाव के मौसम में एमपी के इस क्षेत्र का इतिहास रहा है कि महाकौशल के साथ विंध्य ने ही किसी भी दल को सत्ता तक पहुंचाने की राह आसान की।
शायद इसी नब्ज को बीजेपी भी अच्छे तरीके से टटोल चुकी हैं। चुनावी साल में इसका असर पीएम मोदी के दो मेगा इवेंट के रूप में भी देखने को मिला। रीवा और शहडोल में उनकी बड़ी सभा हुई, जिससे मोदी ने यहां के लाखों आदिवासी और अनुसूचित जाति जन जाति वर्ग को भरोसा दिलाया कि विंध्य की तकदीर लिखने वाली पार्टी सिर्फ और सिर्फ बीजेपी ही हैं।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी अपने बलबूते पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी हैं। सतना में उन्होंने आदिवासी कोल समाज के शबरी सम्मेलन में शिरकत करने बड़े चेहरे के तौर पर गृह मंत्री अमित शाह को भी बुलाया था। अब फिर मुख्यमंत्री 26 जुलाई को सिंगरौली के देवसर में 15.24 लाख तेंदू पत्ता संग्राहक परिवारों को खुशहाली बांटने का अपने हाथों से एक और योजना का श्रीगणेश करेंगे।
तेंदूपत्ता संग्राहकों को जूते-सैंडिल, साड़ी, पानी की बोतल और छाता बांटने की शुरुआत होगी। कई वर्गों में विभाजित क्षेत्र के वोटर्स पहले से ही इतनी योजनाओं का लाभ ले रहे है, जो लोगों के लिए कल तक सपना थी। पानी, बिजली, सड़क समेत औद्योगिक इकाइयों को स्थापित कर मेहनतकश लाखों मजदूरों को रोजगार के साधन मुहैया कराए हैं।
इसके पीछे की वजह पिछले चुनाव के नफा-नुकसान भी रहे। पुरानी पुरानी गलतियां कहे या फिर सीख, उसी का नतीजा है कि बीजेपी का फोकस विंध्य पर भी बना हुआ हैं। हालांकि 2018 के नतीजे बीजेपी को खुश करने वाले रहे रहे। इस क्षेत्र में 30 में से 24 सीट पर कमल खिला था। लेकिन उससे पहले का रिकॉर्ड बताता है कि क्षेत्र की जनता किसी एक दल के आसरे कभी नहीं रही। चुनाव के आखिरी वक्त तक पब्लिक का मन पलटता नजर आया। इसलिए सीएम शिवराज सिंह विंध्य को अपने साथ बांधे आगे बढ़ते जा रहे हैं।












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