OPINION: 2024 की सीढ़ी चढ़ने वाला BJP का कलेवर, MP में सीएम मोहन यादव के बाद किस शक्ल में मंत्रिमंडल
OPINION: मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार बन चुकी है। मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाकर केंद्र ने सबको चौंका दिया है। लोग क़यास लगा रहे थे कि बड़े चेहरों में से किसी को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा, लेकिन एक नये चेहरे को सीएम बनाकर बीजेपी ने कई बड़े संकेत दिये हैं।
तीनों राज्यों में जिस तरह से केंद्र ने मुख्यमंत्री को लेकर फ़ैसले लिए हैं वो कहीं दूर तलक जाने का रास्ता दिखाई देता है। इस बात में को संदेह नहीं है कि बीजेपी में हमेशा से संगठन और संघ सबसे बड़ा रहा है। लेकिन पिछले कुछ समय से बीजेपी के बढ़ते क़द के साथ उसके कुछ नेता भी अपना लैड बहुत ज़्यादा बढ़ा चुके थे। ऐसे में शायद पार्टी ने ये सोचा हो कि संगठन और संघ से बढ़कर व्यक्ति कभी नहीं हो सकता। और इसीलिए नये चेहरों को आगे लाते हुए उसने ये संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी से बढ़कर कुछ भी नहीं।

अब बात करते हैं नये मंत्रिमंडल के गठन की। संभवतः 48 घंटे के भीतर प्रदेश के नये मंत्रियों के नाम की घोषणा और शपथ हो जाएगी। फिर भी अभी तक, कोई भी कुछ कहने की स्थिति में नहीं है कि किसे मंत्री बनाया जा सकता है?
जिस अंदाज में सीएम फेस बदला उससे बीजेपी के इरादे साफ़ है कि इस बार मंत्रिमंडल का गठन पूरी तरह से केंद्र के निर्णय पर होना है। प्रदेश सिर्फ़ संभावित सूची ही बना सकता है लेकिन नाम सिर्फ़ केंद्र से ही जारी होंगे। आने वाले साल की शुरुआत में ही लोकसभा चुनाव होना है। ऐसे में केंद्र क्षेत्र और जाति संतुलन को बनाए रखने की पूरी कोशिश करेगा।
पहले बड़े नामों से शुरुआत करते हैं। चूंकि सीएम मोहन यादव, पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल से जूनियर हैं और प्रह्लाद पटेल देश के न सिर्फ़ एक क़द्दावर नेता हैं अपितु लोधी समाज के एक बड़े लीडर भी हैं। ऐसे में इसकी उम्मीद कम है कि सीएम के अधीन कोई पद लेंगे। तो फिर ये संभावना अधिक है कि प्रह्लाद पटेल फिर से लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे और केंद्र में जाएंगे?
दूसरा बड़ा नाम कैलाश विजयवर्गीय का है। विजयवर्गीय इस समय बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव हैं। बीजेपी संगठन में ये पद बहुत बड़ा है, शायद मुख्यमंत्री से भी बड़ा। साथ ही विजयवर्गीय प्रदेश में, केंद्र का गुपचुप नेतृत्व कर रहे थे, उनके आँख और कान बने हुए थे। ऐसे में विजयवर्गीय भी फिर से केंद्र में वापस जा सकते हैं।
जबलपुर से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुँचे राकेश सिंह बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष रह चुके हैं। ऐसे में उनके लिए भी जूनियर के नीचे काम करना शायद नागवार गुजरे। तो वे भी वापस लोकसभा जा सकते हैं।
गाडरवारा से चुनाव लड़े उदय प्रताप सिंह अपने नाम बहुत बड़ी बड़ी जीत का रिकॉर्ड दर्ज करा चुके हैं। उन्होंने लोकसभा में मध्य प्रदेश में सबसे बड़ी जीत के बाद, विधानसभा में भी एक बहुत बड़ी जीत से विधायक बनकर साबित किया है कि उनके पास जनाधार भी है और चुनाव लड़ने की क्षमता भी। ऐसे में उनको कैबिनेट में लिया जा सकता है। यदि उनको कैबिनेट में, वो भी अच्छे पोर्टफ़ोलियो में, न लिया गया तो वे भी वापस लोकसभा में जा सकते हैं।
इधर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह एक अलग ही अन्दाज़ में नज़र आ रहे हैं। पहले संसदीय बोर्ड से विदाई और फिर उसके बाद मुख्यमंत्री पद से विदाई। ये साफ़ दर्शा रहा है कि बीजेपी को पार्टी से बढ़कर कुछ भी नहीं है। किंतु क्या शिवराज को रोकना संभव है? शायद नहीं। हो सकता है कि उनके दिमाग़ में कुछ और ही चल रहा हो और जो लोकसभा चुनाव के बाद सामने आए। इधर संघ भी संगठन से बढ़कर कुछ भी नहीं मानता तो शायद लोकसभा के बाद कुछ और चौंकाने वाले समीकरण हो सकते हैं।
बहरहाल, जैसा पहले कहा गया कि नये मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय और जातिगत समीकरण को देखते हुए ही नये मंत्रिमंडल का गठन होगा, तो वैसा ही होना है। यहाँ व्यक्ति की संतुष्टि और हित को नहीं अपितु पार्टी के हित को सर्वोपरि रखा जाएगा। बीजेपी अब एक ऐसी पार्टी बन चुकी है जिसे किसी के भुकड़ने से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता है। सो मंत्रिमंडल भी कुछ ऐसा ही होगा।












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