Sagar: खुरई अब 'कांग्रेस मुक्त', अरुणोदय चौबे नवरात्र में करेंगे भाजपा ज्वाइन, पार्टी करेगी उपकृत
सागर, 17 सितंबर। मप्र के सागर जिले में वर्तमान में खुरई विधानसभा को कांग्रेस मुक्त माना जा रहा है। यहां से नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेंद्र सिंह विधायक हैं। उनके धुर विरोधी व कांग्रेस के धाकड़ नेता पूर्व विधायक अरुणोदय चौबे ने कांग्रेस का दामन छोड़ दिया है। बीते रोज उनके इस्तीफे के बाद अब उनके भाजपा ज्वाइन करने को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। भाजपा के अंदरखाने की खबरों के अनुसार अरुणोदय चौबे पितृपक्ष समाप्त होने के बाद नवरात्र में भाजपा का दामन थामेंगे। इधर खुरई को कांग्रेस मुक्त बनाने में सहयोग करने के एवज में चौबे को भाजपा आगामी लोकसभा चुनाव में सांसद का टिकट देकर उपकृत कर सकती है। हालांकि चौबे का कहना है कि मैंने किसी से कोई सौदेबाजी नहीं की है।

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेंद्र सिंह अपने विरोधियों को एक-एक कर अपने साथ लाने में चाणक्य माने जाते हैं। उनके खिलाफ जिन्होंने कभी चुनाव लड़ा, जिन्होंने उन्हें कांग्रेस में रहते हुए चुनाव हराया, या वे खुद चुनाव हारे... आज लगभग वे सभी लोग उनके खेमे में हैं और उनके सबसे बड़े समर्थक और शुभचिंतक माने जाते हैं। इनमें पूर्व सांसद और पूर्व मंत्री लक्ष्मीनाराया यादव, वर्तमान में परिवहन एवं राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, सुशील तिवारी, राजेंद्र सिंह मोकलपुर, पूर्व विधायक संतोष साहू सहित लंबी लिस्ट है। इनमें एक नाम और जुड़ने जा रहा है, खुरई से पूर्व विधायक रहे अरुणोदय चौबे का। चौबे ने एक चुनाव भूपेंद्र सिंह को हराया, फिर दो चुनाव भूपेंद्र सिंह से वे खुद हारे हैं। हार के बाद खामियाजा भी भुगतना पड़ा। हत्या के मामले में बाप-बेटे व उनके समर्थकों ने लंबा कष्ट झेला है। बहरहाल अब वे कांग्रेस से मुक्त हो चुके हैं, उनके साथ ही खुरई विधानसभा सीट भी फिलहाल तक स्थानीय तौर पर कांग्रेस मुक्त मान ली गई है। यहां से अब भूपेंद्र सिंह को टक्कर देने वाला कोई नेता मौजूद नहीं है। कांग्रेस पार्टी को आगामी विधानसभा चुनाव में दूसरी विधानसभा से प्रत्याशी आयातित करना होगा।
केंद्रीय मंत्री अमित शाह से गोपनीय मुलाकात हो चुकी है
पूर्व विधायक अरुणोदय चौबे की कुछ महीनों पहले केंद्रीय मंत्री अमित शाह से गोपनीय रुप से मीटिंग कराए जाने की चर्चाए खूब सामने आई थीं। हालंाकि सागर के भाजपा नेताओं और खुद पूर्व विधायक चौबे ने कभी इसकी पुष्टि नहीं की है। लेकिन इसको कभी नकारा भी नहीं है। कांग्रेस छोड़ने के लिए वे सही समय का इंतजार कर रहे थे। पितृपक्ष के दौरान उन्होंने अपनी पुरानी और मूल पार्टी से नाता तोड़ लिया है। नई पारी की शुरुआत वे नवरात्र में करेंगे, यह तय माना जा रहा है।
अरुणोदय चौबे भाजपा में आए तो पार्टी को क्या फायदा होगा?
खुरई व बीन विधानसभा इलाके में पूर्व विधायक अरुणोदय चौबे का बड़ा कद माना जाता है। वे भाजपा में आएंगे तो पार्टी को क्या फायदा होगा इसको लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। हालंाकि राजनीति और खुरई बीना की राजनीति को नजदीक से जानने समझने वालों का मानना है कि दोनों सीटों पर भाजपा को वर्तमान की अपेक्ष और अधिक मजबूती हासिल होगी। चौबे पिछले तीन विधानसभा चुनाव के दौरान एकमात्र ऐसे नेता है जिन्हें हर बार बढ़ते क्रम में वोट मिले हैं। यहां उनका व्यक्ति जनाधार काफी है। प्रभाव भी रखते रहे हैं। खुरई-बीना के बाहर जिले भर में उनके कई समर्थक हैं। ब्राहम्ण समाज में भी उनकी खासी पकड़ है। इधर भूपेंद्र सिंह व भाजपा के लिए खुरई में चुनौती फिलहाल तो खत्म ही हो गई है। कांग्रेस आगामी चुनाव में अब बीना से कांग्रेस के नेता व पूर्व मंत्री प्रभुसिंह ठाकुर को खुरई से टिकट दे सकती है।












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