MP: सीएमएचओ को शहर से दूर खींच ले गई मौत, हाइवे पर काॅर्डियक अरेस्ट, नहीं मिल सका इलाज

सागर, 18 सितंबर। मप्र के सागर जिले के सीएमएचओ व मप्र मेडिकल आफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. डीके गोस्वामी को मौत उन्हें शहर और स्वास्थ्य सुविधाओं ने दूर खींचकर ले गई थी। उन्हें पिता के श्राद्ध में शामिल होने पेतृक घर ग्वालियर जाना था। उनके साथी डॉक्टर्स ने उन्हें रात में जाने से मना किया था, सुबह जाने के लिए बोला था। डॉक्टर गोस्वामी राजी भी हो गए थे। सभी से कहकर आए थे कि सुबह जल्दी निकलूंगा, लेकिन वे रात में ही पत्नी व बच्ची को लेकर निजी कार को ड्राइव करते हुए निकल गए। सागर शहर व अस्पतालों से दूर जब उन्हें सीने में असहनीय दर्द उठा, वे हाइवे पर बियावान, निर्जन इलाके में थे, जहां तत्काल हेल्प मिलना नामुमकिन था।

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लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के डिप्टी डायरेक्टर व दिवंगत सीएमएचओ डॉ. डीके गोस्वामी के मित्र डॉ. जितेंद्र सिंह बताते हैं कि बीते रोज शाम को वे लोग साथ में थे। करीब एक घंटे तक दोनों साथ में रहे। दिन में भी रक्तदान शिविर व अन्य कार्यक्रम में साथ ही रहे थे। जब डॉ. गोस्वामी ने बताया कि पिताजी का श्राद्ध है और रात में ग्वालियर के लिए निकलना है तो उनको रात में जाने से मना किया था। बोला था, सुबह-सुबह चले जाना और कार चलाने के लिए ड्राइवर को ले जाना। कुछ न नुकुर के बाद डॉ. गोस्वामी मान गए थे कि सुबह के समय ही निकलेंगे। इसके बाद दोनों विभागीय व अन्य बाते करते हुए घर के लिए रवाना हो गए थे।

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मौत का समय और जगह तय थी, इसलिए रात में निकल गए
सीएमएचओ डॉ. गोस्वामी घर गए और पत्नी डॉ. रीमा गोस्वामी व बच्ची बिट्टू को अपनी निजी और नई कार से लेकर ग्वालियर के लिए निकल गए। उन्होंने कार चलाने के लिए न निजी ड्राइवर को बुलाया न सरकारी ड्राइवर को बुलाया। वे खुद ही अपनी कार लेकर ग्वालियर के लिए रात में रवाना हो गए। मालथौन से करीब 10 किलोमीटर आगे हाईवे पर उनको सीने में दर्द और बेचेनी हुई तो उन्होंने कार को हाईवे पर साइड में लगाया और चंद सेकंड में बेहोश हो गए। पत्नी डॉ. रीमा गोस्वामी चूंकी खुद ईएनटी की प्रोफेसर व एचओडी हैं, वे तुरंत समझ गईं। उन्होंने तत्काल 108 एंबुलेंस को फोन लगाया और लोकेशन बताई तथा स्वास्थ्य विभाग व उनके साथी डॉक्टरों को फोन लगाया। जब तक एंबूलेंस आई तब तक पत्नी डॉ. गोस्वामी ने बीएमसी में साथी डॉक्टरों को सूचना देकर मालथौन आने के लिए बोल दिया। 108 एंबुलेंस मौके पर आई और उन्हें मालथौन अस्पताल लेकर पहुंची थी, यहां डॉक्टरों ने उनका उपचार प्रारंभ किया, लेकिन उनकी हालत रीकवर नहीं हुई। इधर सागर से साथी डॉक्टर निजी अस्पताल की एंबुलेंस लेकर मालथौन पहुंचे थे। इस दौरान तक डॉ. गोस्वामी की मृत्यु हो चुकी थी। कुल मिलाकर मौत उन्हें शहर से दूर निर्जन इलाके में ले गई। जबकि वे खुद बीएमसी में मिले सरकारी आवास में निवास करते हैं। यदि वे रात में नहीं जाते और घर में कुछ दिक्कत होती तो चंद मिनट में हर तरह का उपचार मिल सकता था।

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कोरोना काल में आगे आकर कोविड अस्पताल चालू कराया था
कोरोना काल में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जिला अस्पताल में न तो कोरोना के मरीजों को भर्ती करा रहे थे, न कोविड आईसीयू प्रारंभ करा रहे थे। टीबी चेस्ट एक्सपर्ट डॉ. डीके गोस्वामी ने जिला प्रशासन और संभाग कमिश्नर से चर्चा कर सागर के बीड़ी अस्पताल में जिला अस्पताल की इकाई के रुप में कोविड केयर सेंटर प्रारंभ कराया था। जिला अस्पताल में भी उन्होंने कोविड आईसीयू की स्थापना से लेकर उसे प्रारंभ कराने और संचालित करने में योगदान दिया था। बतौर एमपीएमओए के प्रदेशाध्यक्ष उन्होंने चिकित्सकों के हित में लंबी लड़ाई लड़ी, एंटीबायोटिक नीति लागू कराने के लिए वे वर्षा तक प्रयास करते रहे थे। प्रदेश में एंटीबायोटिक नीति लागू कराकर ही दम लिया। स्वास्थ्य विभाग में सुधार, अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाएं जुटाने, जिला अस्पताल, सामुदायिक अस्पतालों को बेहतर बनाने के लिए वे लगातार प्रयास कर रहे थे। Sagar: खुरई अब 'कांग्रेस मुक्त', अरुणोदय चौबे नवरात्र में करेंगे भाजपा ज्वाइन, पार्टी करेगी उपकृत

पिता के चहेते थे, उनके श्राद्ध के दिन ही दम तोड़ा
सीएमएचओ डॉ. देवेंद्र गोस्वामी के मित्र व संयुक्त संचालक कार्यालय अधीक्षक राकेश भारद्वाज बताते हैं कि डॉ. गोस्वामी के पिता रजिस्ट्रार थे, भाई हेमंत मिश्रा हाईकोर्ट में मजिस्ट्रेट हैं। वे अपने पिता के काफी नजदीक थे और पिता का उनभर स्नेह था, घर में भाइयों में पिता के चहेते थे। संयोग कहा जाएगा कि एक साल पहले आज ही के दिन पिता ने दुनिया को अलविदा कहा था। उनके श्राद्ध के तिथि के दिन ही उन्होंने भी अंतिम सांस ली और पिता के श्राद्ध के दिन उनका अंतिम संस्कार किया गया है।

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