चारपाई पर MP का हेल्थ सिस्टम, एम्बुलेंस न पहुँचने से खाट पर हुई डिलेवरी
देश की आजादी के बाद विश्वगुरु बनने की बाँट जोह रहे ये भारत की बोलती तस्वीर है। मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के उमरेठ तहसील से गर्भवती महिला की यह तस्वीर सामने आई। प्रसव पीड़ा होने पर नजदीकी अस्पताल ले जाने जननी एक्सप्रेस
छिंदवाडा, 20 मई: देश को रास्ता दिखाने वाले गांव भी होते है, लेकिन विकास के दावों के बावजूद जब कई गांव खुद रास्तों को तरस रहे हो तो सब कुछ बेमानी सा लगता है। मध्यप्रदेश में सरकारी सिस्टम को मुहं चिढ़ाती तस्वीर छिंदवाड़ा जिले से सामने आई है। जहाँ पक्की सड़क के अभाव में गांव तक एम्बुलेंस न पहुँचने पर एक गर्भवती को बीच रास्ते में खाट पर ही प्रसव कराना पड़ा। इससे पता चलता है कि मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में स्वास्थ्य सुविधाओं ढांचा किस हद तक बीमार है।

देश की आजादी के बाद विश्वगुरु बनने की बाँट जोह रहे ये भारत की बोलती तस्वीर है। मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के उमरेठ तहसील से गर्भवती महिला की यह तस्वीर सामने आई। प्रसव पीड़ा होने पर नजदीकी अस्पताल ले जाने जननी एक्सप्रेस बुलवाई गई, लेकिन ख़राब सड़क होने के कारण एम्बुलेंस गांव तक पहुँच ही नहीं सकी। किसी तरह ग्रामीण जब घर की खाट पर ही महिला को करीब तीन किलोमीटर दूर एम्बुलेंस तक ले जा रहे थे, तो बीच रास्ते में ही डिलेवरी कराना पड़ी। बाद में महिला और उसके नवजात बच्चे को सुरक्षित एम्बुलेंस तक पहुँचाया. अव्यवस्थाओं की चारपाई पर बीमार स्वास्थ्य सेवाएं सरकार के दावों को भी मुहं चिढ़ाती है।

बताया गया कि एम्बुलेंस चालक ख़राब सड़क की दुहाई देकर उक्त गांव तक जाने तैयार नहीं हुआ। वही जिले के सीएमएचओ जीसी चौरसिया का कहना था कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए एक से बढ़कर एक नई गाड़ियाँ (एम्बुलेंस) आ गई है। शासन की मंशा है कि जरुरतमंदों तक हर हाल में स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुंचे, इसके हर संभव प्रयास किये जा रहे है। इसके उलट हकीकत का अनुमान लगाया जा सकता है।
पूर्व सीएम कमलनाथ का है गृह जिला छिंदवाडा
लम्बे वक्त से छिंदवाडा जिले का प्रतिनिधित्त्व पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ही करते आ रहे है। मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके बेटे नकुलनाथ सांसद भी है। जिले के जिस गांव में यह वाक्या हुआ, वहां करीब आधा सैकड़ा आदिवासी परिवार रहते है। नजदीक बस्ती तक पहुँचने यहाँ सिर्फ सड़क ही नहीं, बल्कि पानी, बिजली, स्कूल, आंगनबाड़ी और शमशान घाट का भी अभाव है। विकास के दावों की पोल खोलती यह सच्चाई बताती है कि सरकार हो या फिर जनप्रतिनिधि उनके लिए ऐसे क्षेत्र चुनाव के वक्त वोट बैंक से ज्यादा और कुछ नहीं होते।
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