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MP News: तबादलों की मारामारी, 1.5 लाख आवेदन आए, शिक्षा-राजस्व-स्वास्थ्य विभाग में इस तारीख से निकलेगी सूची

मध्य प्रदेश में 31 मई 2025 तक तबादला प्रतिबंध हटाए जाने के बाद शिक्षा, राजस्व, और स्वास्थ्य विभागों में तबादलों की प्रक्रिया जोरों पर है। सूत्रों के अनुसार, 1 मई से 24 मई 2025 के बीच 1.5 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, लेकिन केवल 50 हजार तबादले ही संभव होंगे।

सूत्रों की माने तो तबादला सूचियों को अंतिम रूप दिया जा चुका है, और इन्हें 1 जून 2025 से लागू करना शुरू किया जाएगा, जो 15 जून 2025 तक या उससे आगे भी जारी रह सकता है। इस बीच, सरकार तबादला अवधि को 31 मई के बाद एक सप्ताह तक बढ़ाने पर भी विचार कर रही है, क्योंकि पिछले तीन वर्षों से तबादलों पर प्रतिबंध था। यह स्थिति स्कूल शिक्षा विभाग में सबसे ज्यादा तनावपूर्ण है, जहां 35 हजार आवेदन आए हैं।

MP News transfer Waiting for transfer list in education revenue health department list will start from June 1

मध्य प्रदेश में विभिन्न विभागों में तबादलों के लिए आए आवेदनों की स्थिति इस प्रकार है:

  • स्कूल शिक्षा विभाग: 35,000 आवेदन। यह विभाग तबादला मांगों में सबसे आगे है, क्योंकि शिक्षकों की संख्या अधिक है और पिछले तीन वर्षों से तबादले रुके हुए थे।
  • राजस्व विभाग: 8,000 आवेदन। इस विभाग में जिला और तहसील स्तर के कर्मचारियों की मांग ज्यादा है।
  • स्वास्थ्य विभाग: 4,000 से अधिक आवेदन। डॉक्टरों, नर्सों, और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के लिए तबादले की मांग बढ़ी है।

अन्य विभाग:

  • खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग: सेंक्शन पोस्ट 250, वर्तमान में 147 कर्मचारी, केवल 14-15 तबादले संभव। स्वैच्छिक तबादला आवेदन भी जोड़े जा रहे हैं।
  • सहकारिता विभाग: सीमित पदों के बावजूद 50% से अधिक आवेदन।
  • जनजातीय कार्य विभाग: तबादले मंत्री के अनुमोदन पर निर्भर, विवादों के कारण देरी।
  • भोपाल में पोस्टिंग के लिए प्रतिस्पर्धा सबसे ज्यादा है, जहां एक पद के लिए 40-40 आवेदन आए हैं। उच्च शिक्षा विभाग में भी भोपाल में पोस्टिंग के लिए लंबी कतार है।

तबादला सूची की समयसीमा

  • सूची जारी होने की तारीख: तबादला सूचियों को 1 जून 2025 से लागू करने की तैयारी है। कुछ विभागों में यह प्रक्रिया 15 जून 2025 तक या उससे आगे भी चल सकती है।
  • विस्तार की संभावना: सरकार तबादला अवधि को 31 मई 2025 के बाद एक सप्ताह तक बढ़ाने पर विचार कर रही है, क्योंकि आवेदनों की संख्या अपेक्षा से अधिक है।
  • प्रक्रिया: तबादला सूचियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। विभागीय मंत्री, जिला प्रभारी मंत्री, और विधायकों की सहमति के आधार पर नाम फाइनल किए जा रहे हैं।

MP News: तबादला नीति की मुख्य विशेषताएं

  1. क्लास-1 और क्लास-2 के तबादले: ये तबादले मुख्यमंत्री के समन्वय से होंगे। इनमें मारामारी कम है, क्योंकि अफसरों की एक ही स्थान पर तीन वर्ष से अधिक की पदस्थापना नहीं हो सकती।
  2. पति-पत्नी के तबादले: स्वैच्छिक आधार पर पति-पत्नी को एक ही स्थान पर पदस्थ किया जाएगा।

संविदा कर्मियों के लिए नियम:

  • तबादला चाहने वाले संविदा कर्मियों को वर्तमान स्थान पर एग्रीमेंट समाप्त करना होगा।
  • नए स्थान पर 5 वर्ष का नया एग्रीमेंट करना अनिवार्य होगा।
  • पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने संविदा कर्मियों के लिए तबादला नीति जारी की है, और अन्य 20 विभागों में भी यह नीति जल्द लागू होगी।
  • विधायकों की सहमति: क्षेत्रीय तबादलों में भाजपा और कांग्रेस दोनों के विधायकों की सहमति को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि उनकी नाराजगी न हो।
  • सीमित तबादले: कुछ विभागों में, जैसे खाद्य नागरिक आपूर्ति, केवल 10% कर्मचारियों का तबादला संभव है।
  • तबादलों में चुनौतियां

तबादला प्रक्रिया में कई चुनौतियां सामने आ रही हैं:

  • आवेदनों की अधिकता: 1.5 लाख आवेदनों में से केवल 50 हजार तबादले संभव होने के कारण कई कर्मचारी निराश हो सकते हैं।
  • मंत्रियों का असमंजस: विभागीय और जिला प्रभारी मंत्रियों को इतनी बड़ी संख्या में आवेदनों को मंजूरी देने में कठिनाई हो रही है।
  • सांसदों का दबाव: कुछ सांसद, जैसे उज्जैन सांसद अनिल फिरोजिया, ने तबादला अनुरोधों से बचने के लिए अपने बंगलों पर "तबादलों के लिए संपर्क न करें" की तख्ती लगा दी है।
  • जनजातीय कार्य विभाग में देरी: विभागीय मंत्री के विवादों के कारण तबादले अधर में हैं।
  • पारदर्शिता की कमी: कुछ विभागों में तबादला प्रक्रिया में विधायकों और मंत्रियों की सहमति को ज्यादा महत्व देने से पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

शिक्षा विभाग में तबादलों की स्थिति

स्कूल शिक्षा विभाग में तबादलों की सबसे ज्यादा मारामारी है। 35,000 आवेदनों के साथ यह विभाग सबसे अधिक प्रभावित है।

प्रक्रिया: तबादले जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) द्वारा चरणबद्ध तरीके से किए जाएंगे। शिक्षकों को 15 जून 2025 तक स्कूल आवंटित किए जाएंगे, और 23 जून से 30 जून 2025 तक नई जगह पर योगदान देना होगा।

चुनौतियां: कुछ आवेदनों के अस्वीकार होने पर सवाल उठ रहे हैं। उदाहरण के लिए, बिहार में 1.9 लाख आवेदनों में से 60 हजार अस्वीकार होने पर शिक्षकों ने पारदर्शिता की मांग की थी, और मध्य प्रदेश में भी ऐसी स्थिति बन सकती है।

पिछले रिकॉर्ड: शिक्षा विभाग में पहले भी बड़े पैमाने पर तबादले हुए हैं। उदाहरण के लिए, 1 जुलाई 2020 को तीन जिला शिक्षा अधिकारियों की तबादला सूची जारी की गई थी।

राजस्व और स्वास्थ्य विभाग

  • राजस्व विभाग: 8,000 आवेदन प्राप्त हुए हैं। जिला और तहसील स्तर के कर्मचारियों, जैसे पटवारी और तहसीलदार, की मांग ज्यादा है। तबादले विभागीय मंत्री और जिला प्रभारी मंत्री की सहमति से होंगे।
  • स्वास्थ्य विभाग: 4,000 से अधिक आवेदन आए हैं। हाल ही में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में 11 चिकित्सा विशेषज्ञों का तबादला श्योपुर और सिंगरौली मेडिकल कॉलेजों के लिए किया गया था। तबादला सूची 1 जून 2025 से लागू होने की संभावना है।

मध्य प्रदेश में 2.5 लाख संविदा कर्मी हैं, और उनके तबादलों के लिए नई नीति लागू की गई है:

एग्रीमेंट समाप्ति: तबादला चाहने वाले कर्मियों को वर्तमान स्थान पर एग्रीमेंट समाप्त करना होगा।
नया एग्रीमेंट: नए स्थान पर 5 वर्ष का अनुबंध करना अनिवार्य होगा।
पहला कदम: पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने नीति जारी की है, और अन्य 20 विभाग जल्द ही इसका पालन करेंगे।

MP News transfer: तबादला प्रक्रिया में पारदर्शिता

  • ऑनलाइन प्रणाली: खाद्य नागरिक आपूर्ति और सहकारिता जैसे विभागों में तबादले मानव संपदा पोर्टल के माध्यम से होंगे।
  • QR कोड ट्रैकिंग: उत्तर प्रदेश की तरह मध्य प्रदेश में भी तबादला आवेदनों की स्थिति को ट्रैक करने के लिए QR कोड आधारित सिस्टम शुरू करने की योजना है।
  • आवेदन स्थिति: कर्मचारी ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी आवेदन स्थिति देख सकेंगे।
  • हालांकि, विधायकों और मंत्रियों की सहमति को प्राथमिकता देने से कुछ कर्मचारियों में असंतोष है, क्योंकि इससे प्रक्रिया में पक्षपात की आशंका बढ़ रही है।

भविष्य की संभावनाएं

  • तारीख बढ़ने की संभावना: 1.5 लाख आवेदनों की भारी संख्या को देखते हुए तबादला अवधि को 7 जून 2025 तक बढ़ाया जा सकता है।
  • प्रक्रिया में देरी: जनजातीय कार्य विभाग जैसे कुछ विभागों में मंत्रियों के विवादों के कारण तबादले देर से हो सकते हैं।
  • पारदर्शिता की मांग: कर्मचारी संगठनों और विपक्षी दलों, जैसे कांग्रेस, ने तबादला प्रक्रिया में पारदर्शिता और मेरिट-आधारित चयन की मांग की है।

मध्य प्रदेश में शिक्षा, राजस्व, और स्वास्थ्य विभागों में तबादला सूचियां 1 जून 2025 से लागू होने की संभावना है, जो 15 जून 2025 तक या उससे आगे चल सकती हैं। 1.5 लाख आवेदनों में से केवल 50 हजार तबादले संभव होंगे, जिससे कई कर्मचारी निराश हो सकते हैं। स्कूल शिक्षा विभाग में 35,000 आवेदन, राजस्व में 8,000, और स्वास्थ्य में 4,000 से अधिक आवेदन इस प्रक्रिया की जटिलता को दर्शाते हैं।

मुख्यमंत्री समन्वय, विधायकों की सहमति, और संविदा कर्मियों की नई नीति इस तबादला सत्र की मुख्य विशेषताएं हैं। सरकार द्वारा तबादला अवधि को एक सप्ताह बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है, लेकिन पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती है। यह प्रक्रिया न केवल कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि मध्य प्रदेश की प्रशासनिक कार्यक्षमता और राजनीतिक गतिशीलता को भी प्रभावित करेगी।

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