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पटवारी की रिश्वतखोरी पर लोकायुक्त का हंटर, झाबुआ में 12,500 रुपये की रिश्वत लेते धराया विशाल गोयल

MP News: मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की ताबड़तोड़ कार्रवाई ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। पेटलावद तहसील के हल्का नंबर 13 के पटवारी विशाल गोयल को 24 मई 2025 को लोकायुक्त इंदौर की विशेष टीम ने 12,500 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा।

यह कार्रवाई महानिदेशक (विशेष पुलिस स्थापना, लोकायुक्त) भोपाल, योगेश देशमुख के निर्देश पर की गई, जिन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को और सख्त करने का आदेश दिया था। यह मामला झाबुआ के ग्राम करणगढ़ के निवासी रमेश राणजी की शिकायत पर सामने आया, जिनसे पटवारी ने उनकी और उनकी पत्नी की कृषि भूमि के सीमांकन के लिए रिश्वत की मांग की थी।

MP Lokayukta strictness in Jhabua Patwari Vishal Goyal caught red handed taking bribe in Petlawad

मामले का विवरण

रमेश, पिता राणजी, उम्र 45 वर्ष, निवासी ग्राम करणगढ़, तहसील पेटलावद, जिला झाबुआ, एक साधारण किसान हैं। उनके और उनकी पत्नी के नाम पर 2-2 बीघा कृषि भूमि है, जिसके सीमांकन के लिए उन्होंने लोक सेवा केंद्र के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया था। इस प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार पटवारी विशाल गोयल, जो हल्का नंबर 13, मोई चारिणी, पेटलावद में तैनात हैं, ने रमेश से सीमांकन के लिए 15,000 रुपये की रिश्वत मांगी। रमेश, जो पहले ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे, ने इस मांग को अन्यायपूर्ण माना और इसकी शिकायत लोकायुक्त कार्यालय, इंदौर में करने का फैसला किया।

22 मई 2025 को रमेश ने पुलिस अधीक्षक, विशेष पुलिस स्थापना (लोकायुक्त), इंदौर को लिखित शिकायत दर्ज की। लोकायुक्त की टीम ने शिकायत का सत्यापन किया, जिसमें रिश्वत की मांग की पुष्टि हुई। सत्यापन के दौरान रमेश ने पटवारी गोयल से बातचीत की और रिश्वत की राशि को 15,000 से घटाकर 12,500 रुपये पर तय किया गया। इसके बाद, लोकायुक्त ने ट्रैप ऑपरेशन की योजना बनाई।

MP Lokayukta strictness: ट्रैप ऑपरेशन, रंगे हाथ पकड़ा गया पटवारी

24 मई 2025 को लोकायुक्त इंदौर की विशेष टीम ने एक सुनियोजित ट्रैप ऑपरेशन शुरू किया। इस ऑपरेशन का नेतृत्व डीएसपी श्री सुनील तालान ने किया, जिसमें निरीक्षक श्री दिनेश भोजक, प्रधान आरक्षक प्रमोद यादव, आरक्षक रामेश्वर निंगवाल, शैलेन्द्र बघेल, आशीष आर्य, कृष्ण अहिरवार, और वाहन चालक शेरसिंह ठाकुर शामिल थे। रमेश को रिश्वत की राशि (12,500 रुपये) देने के लिए तैयार किया गया, और राशि को विशेष रसायन से चिह्नित किया गया ताकि सबूत पुख्ता हो।

पटवारी विशाल गोयल ने रमेश को पेटलावद के विश्राम गृह में रिश्वत की राशि देने के लिए बुलाया। जैसे ही गोयल ने रमेश से 12,500 रुपये की रिश्वत ली, लोकायुक्त की टीम ने तुरंत उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। रसायन-चिह्नित नोट और अन्य सबूतों के साथ गोयल को हिरासत में लिया गया। उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया, और आगे की कार्रवाई पेटलावद विश्राम गृह में शुरू की गई।

MP Lokayukta strictness: लोकायुक्त की जीरो टॉलरेंस नीति

महानिदेशक (विशेष पुलिस स्थापना, लोकायुक्त) श्री योगेश देशमुख ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के निर्देश दिए हैं। उनके नेतृत्व में लोकायुक्त ने मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के मामलों पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई शुरू की है। इस मामले में डीएसपी सुनील तालान ने बताया, "पटवारी विशाल गोयल की रिश्वतखोरी की शिकायत की गहन जांच की गई, और सत्यापन के बाद ट्रैप ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।"

लोकायुक्त इंदौर ने हाल के महीनों में कई बड़े ट्रैप ऑपरेशन किए हैं। उदाहरण के लिए:

  • 15 मार्च 2025: इंदौर में एक नायब तहसीलदार को 20,000 रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा गया।
  • 2 अप्रैल 2025: उज्जैन में एक राजस्व निरीक्षक को नामांतरण के लिए 10,000 रुपये की रिश्वत लेते धराया गया।
  • 10 मई 2025: रतलाम में एक पंचायत सचिव को 8,000 रुपये की रिश्वत के साथ पकड़ा गया।
  • ये कार्रवाइयां दर्शाती हैं कि लोकायुक्त भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई को और तेज कर रही है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां राजस्व अधिकारियों द्वारा रिश्वतखोरी आम लोगों को परेशान करती है।

रमेश की कहानी: एक साधारण किसान की हिम्मत

रमेश राणजी की कहानी मध्य प्रदेश के उन हजारों आम नागरिकों की कहानी है, जो भ्रष्टाचार का शिकार होते हैं। रमेश ने बताया, "मेरे पास ज्यादा पैसे नहीं थे, और मेरी जमीन का सीमांकन मेरे लिए बहुत जरूरी था। पटवारी ने 15,000 रुपये मांगे, जो मेरे लिए बहुत बड़ी रकम थी। मैंने लोकायुक्त से शिकायत करने का फैसला किया, क्योंकि मैं अन्याय बर्दाश्त नहीं कर सकता था।"

रमेश की हिम्मत और लोकायुक्त की त्वरित कार्रवाई ने न केवल पटवारी गोयल को सबक सिखाया, बल्कि यह भी संदेश दिया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने से बदलाव संभव है। रमेश ने कहा, "मुझे खुशी है कि लोकायुक्त ने मेरी मदद की। अब मुझे उम्मीद है कि मेरी जमीन का सीमांकन बिना किसी रिश्वत के होगा।"

सामाजिक और कानूनी प्रभाव

इस कार्रवाई ने झाबुआ और पेटलावद जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत संदेश दिया है। स्थानीय निवासियों ने लोकायुक्त की इस कार्रवाई का स्वागत किया है। करणगढ़ के एक अन्य किसान, गोविंद सिंह ने कहा, "पटवारी और राजस्व अधिकारी अक्सर हम गरीब किसानों से रिश्वत मांगते हैं। इस तरह की कार्रवाई से हमें राहत मिलेगी।"

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत दोषी पाए जाने पर विशाल गोयल को सात साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा, उनकी सरकारी नौकरी भी खतरे में पड़ सकती है।

भविष्य की योजनाएं

लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी कार्रवाइयों को और तेज करने का संकल्प लिया है। महानिदेशक योगेश देशमुख ने हाल ही में एक बयान में कहा, "हमारा लक्ष्य है कि मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार की जड़ों को उखाड़ फेंका जाए। हर स्तर पर, चाहे वह पटवारी हो या वरिष्ठ अधिकारी, रिश्वतखोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।"

लोकायुक्त इंदौर ने निम्नलिखित उपायों की घोषणा की है

  • जागरूकता अभियान: ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत दर्ज करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम।
  • हेल्पलाइन और ऑनलाइन पोर्टल: शिकायतों को आसानी से दर्ज करने के लिए 24x7 हेल्पलाइन और डिजिटल पोर्टल।
  • निगरानी दल: राजस्व और अन्य विभागों में भ्रष्टाचार पर नजर रखने के लिए विशेष निगरानी टीमें।
  • त्वरित कार्रवाई: शिकायतों का त्वरित सत्यापन और ट्रैप ऑपरेशन को प्राथमिकता।
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