MP News: जिस हेलीकाप्टर में अनुराधा पौडवाल का हुआ था एक्सीडेंट, कबाड़ के भाव तक नहीं बिक पा रहा

मप्र में एक आउटडेटेड हैलीकाप्टर कबाड़ में तब्दील होता जा रहा है। बेल-430 हैलीकाप्टर जिस कंपनी का है, उसने निर्माण बंद कर दिया है। यह वही हैलीकाप्टर है जिसमें सवार बॉलीवुड सिंगर अनुराधा पौडवाल फरवरी 2003 में दुर्घटनाग्रस्त हुई थी। सरकार ने इसकी मरम्मत भी कराई थी, लेकिन इसे उड़ान भरने लायक नहीं रहा। इसके बिकने के लिए 7 बार टेंडर निकाले गए, बोलीदार खरीदने तैयार नहीं है। कांग्रेस अब इस मामले में चुटकियां ले रही है।

सरकार को इसलिए बेंचना पड़ रहा हेलीकाप्टर

सरकार को इसलिए बेंचना पड़ रहा हेलीकाप्टर

बेल-वीटी-एमपीएस 430 हैलीकाप्टर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के शासनकाल में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। जिसमें मशहूर गायिका अनुराधा पौडवाल और अन्य लोग भी सवार थे। उस वक्त हादसे में हेलीकाप्टर ख़राब होने के इसे क्लेम किया गया, लेकिन नतीजा सिफ़र रहा है। बाद में इसे रिपयेर कराया गया, 2013 के बाद से इसकी उड़ान बंद कर दी गई। कई साल यह पड़ा रहा फिर, सरकार ने इसे बेंचने का फैसला लिया।

हादसे में अधिकारी हुए थे घायल

हादसे में अधिकारी हुए थे घायल

बताया जाता है कि हादसे का शिकार हुए इस हेलीकाप्टर में सिंगर अनुराधा पौडवाल के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के निज सहायक राजेन्द्र रघुवंशी और कांग्रेस नेता राधा कृष्ण मालवीय भी सवार थे। पौडवाल को तो बाल-बाल बची थी, लेकिन रघुवंशी बुरी तरह घायल हो गए थे। इस हेलीकाप्टर को राज्य सरकार ने 2008 में 33 करोड़ में खरीदा था। लेकिन हादसे का शिकार होने के बाद ये आज तक नीलामी के तरस रहा है।

कबाड़ के भाव भी कोई नहीं खरीद रहा

कबाड़ के भाव भी कोई नहीं खरीद रहा

सरकार 2016 से इसे बेचने का जतन कर रही है। उस वक्त इसकी कीमत लगभग दस करोड़ रुपए रखी गई थी। काफी वक्त तक जब नीलामी में कोई नहीं आया और सरकार को यह अहसास हुआ कि विक्रय मूल्य ज्यादा है तो इसकी कीमत रिवाइज हुई। ऑफसेट प्राइज 2 करोड़ 24 लाख कर देने के बाबजूद खरीददारों ने टेंडर तो भरे लेकिन बोलीदार ने निर्धारित 25 फीसदी राशि जमा ही नहीं की।

7वें टेंडर में इन्हें मिली थी खरीदने की स्वीकृति

7वें टेंडर में इन्हें मिली थी खरीदने की स्वीकृति

सातवीं बार टेंडर जारी होने के बाद कुछ लोगों ने रिवाइज ऑफसेट प्राइज पर टेंडर भरा। जिसमें भोपाल की एफए इंटरप्राइजेस और मुंबई की एयर चार्टर कंपनी भी शामिल हुई। कैबिनेट ने भोपाल की कंपनी के पक्ष में स्वीकृति दी थी। नियम मुताबिक 30 दिनों में 25 फीसदी राशि जमा करना था। लेकिन जमा नहीं की गई। सरकारी सूत्रों का कहना है कि मुंबई की कंपनी को खरीददारी का अवसर दिया जाएगा। यदि वह भी खरीददारी में रूचि नहीं दिखाएगा तो फिर अन्य दूसरे फैसले लिए जा सकते है।

कांग्रेस बोली कचरा

कांग्रेस बोली कचरा

सरकार की लगातार कोशिशों के बावजूद हेलीकाप्टर की इस दशा पर कांग्रेस चुटकियां ले रही है। जबलपुर से कांग्रेस विधायक संजय यादव बोले कि हेलीकाप्टर के जब बिकने के दिन थे तो सरकार सोती रही है, अब चाहती है कि उनका कचरा करोड़ों में बिक जाए। चुटकी लेते हुए एमएलए यादव ने कहा कि उस हेलीकाप्टर को जबलपुर के गुरंदी बाजार में लाकर खड़ा कर दें। उसके पुर्जे-पुर्जे बिक जाएंगे।

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