MP CM: ‘स्वर्ग का सिंघासन भी बेकार है'! शपथ के पहले छिंदवाड़ा में सीएम शिवराज ने ऐसा क्यों दिया संदेश
MP CM: मध्य प्रदेश में अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? इसके बारे में न तो चुनाव के वक्त और न ही जीत के बाद अभी तक किसी को नहीं पता। जितने लोग उतनी बातों के समुद्र में संभावनाएं गोते लगा रही हैं। जिस चेहरे को यह प्रदेश बीस साल से देखते आया, करोड़ों लोगों के दिल पहला नाम वहीं निकलता हैं।
सियासत है, लिहाजा इसका मिजाज ही अलग होता हैं। सियासी शतरंज के किस खाने में कब कौन राजा-वजीर फिट हो जा, कहना मुश्किल हैं। प्यादों का तो एक ही घर हैं। एमपी ने भी 2003 में जब करवट बदली तो उमा भारती के तौर पर लोगों को सरप्राइज ही मिला था।
दो दशक बाद प्रचंड जीत और पहले के मुकाबले कई ताकतवर निर्वाचित सदस्यों के साथ खड़ी बीजेपी अपनी सरकार के मुखिया को तय करने जा रही हैं। जितने लोग दिल्ली दरबार पहुंच रहे है, उतने ही नाम हैं। 2024 सिर पर है लिहाजा 'मिस्टर भरोसेमंद' को ही पसंद किया जाएगा। जो आगे भी जनता के भरोसे की लाइन को बड़ा करने का माद्दा रखता हो।

एमपी में चुनाव जीतकर दिल्ली पहुंचे पांच सांसद जब एक साथ इस्तीफ़ा दे रहे थे तो सीएम शिवराज सिंह चौहान कांग्रेस के अभेद किले कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा में जनता का आभार जता रहे था। मंच से लाड़ली बहनों और भांजे-भांजियों के बहाने बहुत कुछ संदेश देने की कोशिश की। जिसके कई ढंग से मायने निकाले जा रहे हैं।
जनता ही मेरी भगवान
यह सब उस घड़ी में हुआ, जब नई सरकार में सीएम के नाम पर मंथन चल रहा है और शपथग्रहण प्रोग्राम की अंदर ही अंदर तैयारियां चल रही है। शिवराज सिंह ने पब्लिक के बीच फिर दोहराया कि 'मैं बहनों का भाई और भांजे-भांजियों का मामा हूं'। इस रिश्ते और पद के सामने दुनिया के सारे पद बेकार हैं। आगे एक लाइन और जोड़ते हुए कहा कि 'स्वर्ग का सिंघासन भी बेकार है। जनता ही मेरी भगवान हैं'।
छिंदवाड़ा की ही क्यों जिम्मेदारी?
मंच से यह बयान देने के साथ पूरे छिंदवाड़ा की अपने कंधो पर जिम्मेदारी लेने के पीछे भी बड़ा मैसेज छिपा हैं। शिवराज भी यह भली-भांति जानते है कि केंद्र की राजनीति से अचानक प्रदेश में लाया गया और फिर उनकी सीएम के तौर पर ताजपोशी हुई थी। अब साल 2023 की विदाई के वक्त नए कलेवर के साथ नई सरकार राजकाज संभालने जा रही हैं। सीएम, डिप्टी सीएम, विधानसभा अध्यक्ष या फिर मंत्रिमंडल में ताकतवर विभाग। इन सभी के लिए उन चेहरों के नाम लिए जा रहे है, जिन्होंने अब सांसदी छोड़ दी। अब इंतजार 24 से 48 घंटों का हैं।












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