RSS के 'स्वर शतकम' कर्यक्रम में मोहन भागवत का संबोधन, कहा- संगीत एक साथ चलना और समन्वय सिखाता है

Madhya Pradesh News: RSS प्रमुख मोहन भागवत मध्य प्रदेश के इंदौर में आरएसएस के 'घोष वादन' कार्यक्रम में शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने संबोधन देते हुए कहा "एक साथ इतने स्वयंसेवक संगीत का प्रस्तुतिकरण कर रहे हैं अपने आप में यह एक आश्चर्यजनक घटना है। हमारी रण संगीत परंपरा जो विलुप्त हो गई थी,अब फिर से लौट आई है।

संघ प्रमुख ने कहा भारत पीछे रहने वाला देश नहीं है। हम दुनिया की पहली पंक्ति में बैठकर बता सकते हैं कि हमारे पास क्या है। उन्होंने कहा भारतीय संगीत और पारंपरिक वादन का एक साथ मिलकर चलना, अनुशासन, संस्कार और सद्भाव सिखाता है। इस मौके पर उन्होंने लोगों से अपील की कि वो संघ के स्वयंसेवकों के साथ भारत के नवनिर्माण के अभियान में शामिल हों।

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मोहन भागवत ने कहा "संघ जब शुरू हुआ,तब शारीरिक कार्यक्रमों के साथ-साथ संगीत की भी आवश्यकता थी। उस समय मिलिट्री और पुलिस से ही संघ ने संगीत सीखा। यह सब देशभक्ति के लिए किया गया। उन्होंने कहा कि जो कार्यकम आपने देखा इतनी सारी रचनाएं बजाने वाले सभी संगीत साधक नहीं हैं। इन्होंने परिश्रम करके इतना अच्छा वादन सीखा है। भारतीय संगीत का आधार है सुर और ताल का मिलन। संगीत एक साथ चलना सिखाता है।

भागवत ने कहा हमारा देश दरिद्र नहीं है। अब हम विश्व पटल पर खड़े हैं। उन्होंने कहा संघ के कार्यक्रमों से मनुष्य के सद्गुणों में वृद्धि होती है। डंडा चलाने का उद्देश्य झगड़ा करना नहीं है, बल्कि यह उस स्थिति के लिए है जब कोई हमारे सामने आकर कोई गिर जाए, तो हम उसकी मदद कर सकें। हम दंड सीखते हैं,वो प्रदर्शन के लिए नहीं सीखते है। लाठी चलाने वाले व्यक्ति को वीरगति प्राप्त होती है, क्योंकि वो कभी डरता नहीं है। इस दौरान संघ प्रमुख ने स्वयंसेवकों को देशभक्ति और अपने कर्तव्यों को निभाने का भी संदेश दिया।

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