Ratlam News: रतलाम के बाजना में तेंदुआ मौत का शिकार: वन विभाग ने की जांच, बीमारी के कारण हुई मौत
MP News: रतलाम जिले के बाजना इलाके के गड़ीगमना जंगल में सोमवार सुबह एक तेंदुए की संदिग्ध मौत से वन विभाग में हलचल मच गई।
तालाब के किनारे लडख़ड़ाता हुआ तेंदुआ ग्रामीणों की नजर में आया, जिसके बाद तत्काल इसकी सूचना वन विभाग को दी गई। टीम ने मौके पर पहुंचकर उसे रेस्क्यू करने की कोशिश की, लेकिन कुछ ही देर में तेंदुआ बेहोश हो गया और बाद में उसकी मौत हो गई।

जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह करीब 9 बजे गड़ीगमना गांव के पास स्थित जंगल में ग्रामीणों ने तेंदुए को लड़खड़ाते हुए देखा। यह तेंदुआ तालाब के किनारे घूम रहा था और उसकी हालत अस्वस्थ प्रतीत हो रही थी। पहले तो ग्रामीणों ने सोचा कि शायद वह घायल है, लेकिन बाद में स्थिति और भी गंभीर हो गई। जैसे ही वन विभाग को सूचना मिली, मौके पर विभाग के रेस्क्यू प्रभारी हरिसिंह डामर, सब रेंज प्रभारी सतीश सिंह, बीड गार्ड जोशी और अन्य स्टाफ पहुंचे।
विभाग की टीम ने तेंदुए को रेस्क्यू करने का प्रयास किया, लेकिन इसी दौरान तेंदुआ अचानक दो बार पलटी खाकर गिर गया और बेहोश हो गया। इसके बाद तेंदुए को पशु चिकित्सक के पास ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।
वन विभाग ने तेंदुए का पोस्टमॉर्टम किया, जिसमें प्राथमिक जांच में यह सामने आया कि तेंदुए की मौत ब्रेन हेमरेज (मस्तिष्क में रक्तस्राव) के कारण हुई है। हालांकि, अंतिम रिपोर्ट अभी आनी बाकी है, जो पोस्टमॉर्टम के विस्तृत निष्कर्षों पर आधारित होगी। तेंदुए की उम्र लगभग 12 साल के आसपास बताई जा रही है।
इस घटना के बाद, रतलाम जिले के डीएफओ नरेश दोहरे के भोपाल में होने के कारण उनके निर्देश का इंतजार किया जा रहा था। विभाग ने डीएफओ को कॉल भी किया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका, क्योंकि उनका नंबर "नॉट रीचेबल" था।
मृत तेंदुए का अंतिम संस्कार सोमवार देर शाम तक नहीं हो सका था, क्योंकि विभाग ने निर्देशों का पालन करने के लिए सभी उचित प्रक्रियाओं को पूरा करने की आवश्यकता मानी। फिलहाल वन विभाग पूरी तरह से इस मामले की जांच में जुटा हुआ है, ताकि तेंदुए की मौत के कारणों को पूरी तरह से स्पष्ट किया जा सके।
यह घटना वन्यजीव संरक्षण और उनके संरक्षण कार्यों पर सवाल उठाती है, खासकर तब जब तेंदुए जैसी बड़ी बिल्लियां जंगलों में बीमार हो जाती हैं या घायल होती हैं। वन विभाग के प्रयासों के बावजूद ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और तत्परता की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है।












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