रहस्मयी और दिव्य 'झलारिया महादेव', साल में एक बार होते हैं दर्शन, आसपास घूमते हैं दर्जनों बाघ
पन्ना टाइगर रिजर्व के हिनौता रेंज में एक रहस्मयी और अद्भुत जगह झिलारिया महादेव मंदिर मौजूद है। बुजुर्ग बताते हैं ज्वालामुखी के लावा से निर्मित हजारों साल पुराने पर्वत के नीचे गुफा में प्राकृतिक शिवलिंग मौजूद है।


बाघों के घर में महादेव का दिव्य स्थान, आस्था का केंद्र है
पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में हिनौता बीट में जहां पर बाघों का मूवमेंट लगभग रोज ही होता है, ऐसे घने जंगलों के बीच पहाड़ की चढ़ाई फिर गहराई में जाकर सदियों पूर्व से झलारिया महादेव मंदिर मौजूद है। बुजुर्ग बताते हैं कि उनके पूर्वज यहां मंदिर में पूजा करने आते-जाते रहते थे। यह स्थान हजारों सालों से सिद्ध व आस्था का केंद्र रहा है। करीब 3 दशक पहले तक यहां पर बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना रहता था।

साल में सिर्फ एक दिन ही दर्शन की अनुमति मिलती है
झलारिया महादेव में पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में मौजूद है। मंदिर में बसंत पंचमी के दिन श्रीमद् भागवत कथा आयोजित की जाती है, जिसमें मंदिर समिति से जुड़े और टाइगर रिजर्व प्रबंधन से जुड़े लोग ही शामिल होते हैं। कथा के समापन अर्थात बसंत पंचमी से सातवें दिन यहां आम श्रद्धालुओं को दर्शन करने के लिए अंदर जाने की अनुमति दी जाती है।

छोटी कार और मोटर साइकल को अनुमति नहीं देते
चूंकी हिनौता बीट में दर्जनों टाइगर का मूवमेंट होता रहता है, इस कारण टाइगर रिजर्व प्रबंधन छोटी कार और दुपहिया वाहनों से झलारिया महादेव मंदिर जाने की अनुमति नहीं देता है। हालांकि निजी बड़े चार पहिया वाहन से लोग अंदर जा सकते हैं। सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक ही लोगों के वाहनों को प्रवेश की अनुमति दी जाती है। रास्ते में जगह-जगह दिशा सूचक बोर्ड और सुरक्षाकर्मियों के वाहन तैनात रहते हैं। मंदिर परिसर में भी सुरक्षाकर्मी मौजूद रहते हैं।

पूर्व में मंदिर के आसपास के इलाके में वनवासी गांव थे
झलारिया महादेव का स्थल सदियों पुराना है और उस समय का है, जब नेशनल पार्क की स्थापना नहीं हुई थी। इसके आसपास चारों और आदिवासी वनवासियों के गांव हुआ करते थे। तभी से यह मंदिर वहां पर स्थापित है। बुजुर्गों के एक अनुमान के अनुमानित घने जंगल और पहाड़ियों के बीचो बीच यह दुर्लभ स्थल हजारों वर्ष पुराना है और यहां पर सैकड़ों वर्षो से पूजा अर्चना विधि विधान से की जा की जाती रही है। टाइगर रिजर्व के पूर्व इस स्थान पर प्रतिदिन लोग पूजा-अर्चना करने जाते थे। ऐसा बताया जाता है। इसी प्राचीन भोलेनाथ की गुफा में लोगों की पूर्ण श्रद्धा भावना थी, लेकिन वर्तमान समय में वर्ष में सिर्फ एक बार ही यहां दर्शन मिल पाते हैं। यहां पन्ना के अलावा दमोह, सतना, छतरपुर, बांदा उत्तर प्रदेश से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।

आते-जाते बाघ, तेंदुआ, जंगली जानवर मिल जाते हैं
टाइगर रिजर्व के अंदर जब पगडंड़ियों से होकर लोग झिलारिया महादेव मंदिर जाते हैं तो कई दफा उन्हें बाघ, तेंदुआ और अन्य वन्य प्राणी मिल जाते हैं। बीते साल लौटते समय एक टाइगर बीच सड़क पर आकर बैठ गया था, करीब आधे घंटे तक श्रद्धालुओं के वाहन एक ही स्थान पर रुके रहे थे। इस कारण वन विभाग और टाइगर रिजर्व प्रबंधन यहां केवल एक दिन और सूरज की रोशनी के उजाले में ही बड़े वाहनों से आने-जाने की अनुमति देता है, ताकि लोगों की पूरी सुरक्षा रहे।
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पार्क प्रबंधन द्वारा जगह-जगह वनकर्मियों को तैनात किया गया
3 फरवरी शुक्रवार को बड़ी संख्या में दर्शनार्थियों के आने के कारण पार्क प्रबंधन द्वारा जगह-जगह वनकर्मियों को तैनात किया गया था। जिससे आने वाले श्रद्धालुओं को जंगली जानवरों से किसी प्रकार का खतरा ना हो सके। पिछले वर्ष जब महादेव के दर्शन के लिए यह स्थल खुला था तब अचानक एक बाघ रास्ते में आ गया था जिसको लेकर घंटों रास्ता रोका रहा और श्रद्धालुओं को परेशान होना पड़ा था।












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