MP News: भाजपा विधायकों को 15 करोड़, कांग्रेस को शून्य! विकास निधि पर सियासी संग्राम, जीतू का CM को पत्र
MP News: मध्य प्रदेश में विकास निधि के वितरण में कथित भेदभाव को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को सीधा पत्र लिखकर निशाना साधा है।
पटवारी ने पत्र में सरकार पर आरोप लगाया है कि वह कांग्रेस विधायकों के क्षेत्रों के साथ पक्षपात कर रही है और विकास निधि के वितरण में भेदभावपूर्ण रवैया अपना रही है।

पटवारी ने पत्र में लिखा, "आपने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते समय निष्पक्ष और समान भाव से सभी नागरिकों की सेवा का वचन दिया था, लेकिन वर्तमान में आपकी सरकार 'पक्षपाती राजनीति' कर रही है।" उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस विधायकों के क्षेत्रों में भी वे ही नागरिक निवास करते हैं जो करदाता हैं और जिन्हें सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों का लाभ समान रूप से मिलना चाहिए।
जनता का विश्वास डगमगा रहा
पटवारी ने चेतावनी दी कि यदि लोकतांत्रिक सरकारें इस तरह भेदभाव करेंगी तो इससे न केवल जनता का विश्वास शासन प्रणाली से उठ जाएगा, बल्कि इससे लोकतंत्र भी कमजोर होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि नौकरशाही और ठेकेदारी में भ्रष्टाचार चरम पर है। "एक लाख रुपए में से करीब 65 से 70 हजार रुपए कमीशन और भ्रष्टाचार में चला जाता है, केवल 30-35% राशि ही विकास कार्यों में लगती है," पटवारी ने पत्र में लिखा।
कांग्रेस अध्यक्ष की तीन प्रमुख मांगें, जीतू पटवारी ने पत्र में तीन बड़ी मांगें भी उठाई हैं:
- सभी विधायकों, चाहे वे किसी भी पार्टी से हों, को समान रूप से 15 करोड़ रुपए की विकास निधि दी जाए।
- निधि आवंटन और व्यय की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए, ताकि भ्रष्टाचार पर लगाम लगे।
- जिन अधिकारियों और ठेकेदारों पर कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के आरोप हैं, उनकी निष्पक्ष जांच कर कठोर कार्रवाई की जाए।
"सबका साथ, सबका विकास" पर उठाए सवाल
पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकार केवल सत्ता पक्ष के विधायकों को तवज्जो दे रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि क्या "सबका साथ, सबका विकास" का नारा सिर्फ दिखावा है? उन्होंने कहा, "प्रदेश की जनता ने अपने विधायकों को विकास कार्यों के लिए चुना है, न कि भेदभाव और भ्रष्टाचार झेलने के लिए।"
मुख्यमंत्री पर मानसिकता बदलने का दबाव
पटवारी ने सीएम मोहन यादव से अपील करते हुए लिखा कि वे प्रदेश की गिरती साख को लेकर गंभीरता से विचार करें और संकीर्ण मानसिकता से ऊपर उठकर मुख्यमंत्री के दायित्व का निर्वहन करें। उन्होंने कहा कि यदि सरकार जनहित में काम करने का दावा करती है, तो उसे सभी विधायकों को समान अवसर और अधिकार देने चाहिए।
भाजपा की प्रतिक्रिया का इंतजार
पटवारी के इस पत्र के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि मुख्यमंत्री और भाजपा इस आरोपों और मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।












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