MP News: जबलपुर हाईकोर्ट ने तेज आवाज वाले डीजे पर मध्य प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया
MP News: मध्य प्रदेश के जबलपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से तेज आवाज में बजने वाले डीजे पर अब तक की गई कार्रवाई और नियमों पर जवाब तलब किया है।
कोर्ट ने पूछा है कि डीजे की आवाज पर नियंत्रण के लिए अब तक सरकार ने क्या कदम उठाए हैं और क्या इस पर कोई दिशा-निर्देश निर्धारित किए गए हैं? साथ ही, हाईकोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि डीजे की आवाज को लेकर राज्य सरकार की क्या मानक तय किए गए हैं।

यह मामला एक जनहित याचिका के आधार पर सामने आया है, जिसे जबलपुर के अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता ने दायर किया था। याचिका में कहा गया कि वर्तमान समय में लगभग हर प्रकार के सार्वजनिक कार्यक्रमों में डीजे का प्रयोग किया जाता है, जो अत्यधिक तेज आवाज में बजते हैं। यह केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक नहीं है, बल्कि सामाजिक समरसता के लिए भी खतरनाक साबित हो रहा है।
सामाजिक समरसता और स्वास्थ्य पर प्रभाव
अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता ने अपनी याचिका में कहा कि तेज आवाज में बजने वाले डीजे ध्वनि प्रदूषण का कारण बन रहे हैं। इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान हो रहा है, बल्कि यह लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। अत्यधिक शोर से मानसिक और शारीरिक समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। गुप्ता ने यह भी कहा कि डीजे की तेज आवाज से समाज में तनाव उत्पन्न हो रहा है और इसके कारण दंगे-फसाद जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो रही है।
कोर्ट का आदेश
इस मामले पर मंगलवार (4 मार्च) को चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने सुनवाई की। अदालत ने राज्य सरकार को दो सप्ताह का समय दिया है, ताकि वह इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर सके और डीजे की आवाज से संबंधित नियमों और नियंत्रण की जानकारी दे सके। कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई 21 मार्च को होगी।
तेज आवाज से होने वाली बीमारियों पर गंभीर चिंता जताई गई, इलाज नहीं है
जबलपुर हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका में यह भी बताया गया कि तेज आवाज में बजने वाले डीजे और कानफोड़ू साउंड अब लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि अब ये तेज आवाजों से होने वाली बीमारियों का इलाज भी संभव नहीं है, और कई बार तो यह बीमारियां जानलेवा साबित हो रही हैं।
अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता ने याचिका में तर्क दिया कि लंबे समय तक तेज आवाज में संगीत सुनने से कानों की आंतरिक कोशिकाओं पर गहरा असर पड़ता है, जिससे सुनने की शक्ति कमजोर हो जाती है। इसके अलावा, अत्यधिक शोर का असर शरीर के अन्य अंगों पर भी पड़ता है, जो विभिन्न प्रकार की शारीरिक और मानसिक समस्याओं का कारण बन सकता है।
तेज आवाज के स्वास्थ्य पर असर
सुनने की शक्ति पर असर
तेज आवाज के संपर्क में लंबे समय तक रहने से कानों की आंतरिक कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है, जिससे सुनने की शक्ति कमजोर हो जाती है। इस प्रकार के शोर से स्थायी सुनने की क्षति हो सकती है।
ब्लडप्रेशर और दिल पर असर
तेज आवाज में संगीत सुनने से ब्लडप्रेशर बढ़ सकता है। समय के साथ यह दिल की धड़कन पर असर डाल सकता है, जिससे दिल से संबंधित बीमारियां हो सकती हैं।
मानसिक तनाव और चिंता
अत्यधिक शोर शरीर में तनाव पैदा करता है, जिससे कोर्टिसोल और एड्रेनालाइन जैसे हार्मोन का स्तर बढ़ सकता है। यह चिंता, चिड़चिड़ापन और मानसिक असंतुलन का कारण बनता है।
नींद में परेशानी
तेज संगीत से नींद पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। लगातार तेज आवाजों के संपर्क में आने से नींद में खलल पड़ता है, और अगर समय पर सोने की आदत नहीं बनती, तो यह शरीर में अन्य बीमारियों का कारण बन सकती है।
शारीरिक दर्द और सिरदर्द
तेज आवाज से शारीरिक दर्द, सिरदर्द या चक्कर आ सकते हैं। इसके साथ ही, हार्मोनल असंतुलन भी हो सकता है, जो शरीर में असामान्य प्रतिक्रियाएं उत्पन्न करता है।
मांसपेशियों में तनाव
तेज संगीत से मांसपेशियां तनावग्रस्त हो जाती हैं, जिससे थकान और शारीरिक कमजोरी बढ़ सकती है।
कोर्ट का ध्यान और आने वाली सुनवाई
कोर्ट ने याचिकाकर्ता की बातों पर गंभीर चिंता जताई है, खासकर जब यह बताया गया कि तेज आवाज से होने वाली बीमारियों का इलाज भी नहीं है। यह स्थिति न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए, बल्कि मानसिक स्थिति और सामाजिक समरसता के लिए भी गंभीर खतरे की ओर इशारा करती है।
राज्य सरकार को यह निर्देश दिए गए हैं कि वह इस मामले में दो सप्ताह के अंदर जवाब प्रस्तुत करे, और इस पर नियंत्रण के लिए क्या कदम उठाए गए हैं, यह स्पष्ट करे। अगली सुनवाई 21 मार्च को होगी, जब इस मामले में और अधिक विचार किया जाएगा।












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