MP News: कुम्हार और रजक जातियों में असमानता, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और एससी-पिछड़ा आयोग को जारी किया नोटिस
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में कुम्हार और रजक जाति के कुछ व्यक्तियों ने एक जनहित याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने इन जातियों को भी अनुसूचित जाति (SC) में शामिल करने की मांग की है। यह याचिका जबलपुर के राकेश कुमार चक्रवर्ती और लक्ष्मण रजक की ओर से दायर की गई है, और इसे लेकर गुरुवार को कोर्ट में सुनवाई हुई।
मामले पर सुनवाई करते हुए, हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की डिवीजन बेंच ने राज्य शासन, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, मध्यप्रदेश अनुसूचित जाति आयोग और पिछड़ा वर्ग आयोग को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा है।

कुम्हार और रजक जाति की स्थिति
याचिकाकर्ता के वकील एसके कश्यप ने कोर्ट में दलील दी कि राज्य के कुछ हिस्सों में रजक समाज को अनुसूचित जाति के तहत वर्गीकृत किया गया है। विशेष रूप से भोपाल, रायसेन और सीहोर जिलों में रजक समाज के लोगों को अनुसूचित जाति की श्रेणी में रखा गया है। इसी तरह, कुम्हार जाति के लोगों को भी राज्य के कुछ जिलों में अनुसूचित जाति के तहत दर्ज किया गया है। ये जिले हैं- सतना, रीवा, टीकमगढ़, पन्ना, शहडोल, सीधी, दतिया और अन्य।
प्रस्तावित लाभ और सामाजिक न्याय
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि अगर कुम्हार और रजक जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल किया जाता है, तो उन्हें सरकारी योजनाओं का अधिक लाभ मिलेगा। विशेष रूप से शिक्षा, रोजगार, और सामाजिक कल्याण योजनाओं के तहत उन्हें आरक्षण का लाभ मिलेगा, जो उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में मदद करेगा। इससे इन जातियों के लोगों को सामाजिक न्याय मिलेगा और उनके उत्थान के लिए विशेष पहल की जाएगी।
राज्य सरकार और संबंधित आयोगों को जवाब देने का आदेश
हाईकोर्ट ने मामले में राज्य सरकार और अन्य संबंधित आयोगों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने इन आयोगों से यह पूछा है कि क्यों न कुम्हार और रजक जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल किया जाए, जैसा कि प्रदेश के कुछ जिलों में पहले से ही किया गया है। इससे पहले, इन जातियों को इस श्रेणी में शामिल किए जाने से जुड़ी कोई ठोस पहल या निर्णय नहीं हुआ था, लेकिन अब हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर विचार करने का आदेश दिया है।
अनुसूचित जाति का महत्व
भारत में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए विशेष संवैधानिक प्रावधान हैं, जिनका उद्देश्य समाज के सबसे वंचित वर्गों को आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक रूप से सशक्त बनाना है। इन वर्गों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई है, जिससे उन्हें रोजगार, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में समान अवसर मिल सकें। यदि कुम्हार और रजक जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल किया जाता है, तो ये समुदाय भी सरकारी योजनाओं के तहत आरक्षण का लाभ उठा सकेंगे, जिससे उनका समग्र विकास हो सकेगा।
राज्य सरकार की भूमिका
राज्य सरकार को इस मामले में त्वरित और सटीक निर्णय लेने की आवश्यकता है, क्योंकि यदि इन जातियों को अनुसूचित जाति की श्रेणी में शामिल किया जाता है, तो इससे राज्य में सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। यह न केवल इन जातियों के लोगों के लिए फायदेमंद होगा, बल्कि राज्य की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में भी सुधार लाएगा।












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