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Jain monks: नीमच में जैन मुनियों पर जानलेवा हमला: छह हमलावर गिरफ्तार, जैन समाज का उबाल—सिंगोली बंद

Jain monks: नीमच जिले के सिंगोली थाना क्षेत्र से रविवार देर रात एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जिसने पूरे जैन समाज को झकझोर दिया है। सिंगोली से नीमच की ओर विहार कर रहे तीन जैन मुनियों पर छह बदमाशों ने लूट के इरादे से हमला कर दिया।

घटना कछाला गांव के पास हनुमान मंदिर में हुई, जहां संत विश्राम कर रहे थे। इस कायराना हमले में तीनों मुनि गंभीर रूप से घायल हो गए।

Deadly attack on Jain monks in Neemuch Six attackers arrested society shuts down Singoli

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है। वहीं, जैन समाज ने सोमवार को सिंगोली बंद कर मौन जुलूस निकाला और प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर दोषियों को फांसी देने की मांग की।

रात के अंधेरे में संतों पर हमला, मंदिर में विश्राम कर रहे थे मुनि

रविवार, 13 अप्रैल की रात लगभग 12 बजे, जैन मुनि शैलेष मुनि जी, बलभद्र मुनि जी, और मुनींद्र मुनि जी कछाला गांव स्थित एक पुराने हनुमान मंदिर में ठहरे हुए थे। तभी तीन बाइकों पर सवार छह बदमाश मंदिर पहुंचे। सिंगोली थाना प्रभारी भूरालाल भाभर के अनुसार, आरोपियों ने पहले मंदिर परिसर में बैठकर शराब पी और फिर मुनियों से पैसों की मांग की।

जब संतों ने इनकार किया, तो आरोपियों ने लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से हमला कर दिया। हमले में मुनियों के वस्त्र फाड़ दिए गए और उन्हें बुरी तरह पीटा गया। एक मुनि गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनके सिर पर गहरी चोट आई। जान बचाने के लिए एक मुनि सड़क की ओर भागे और वहां से गुजर रहे एक बाइक सवार को रोककर मदद मांगी।

स्थानीय ग्रामीणों की तत्परता, दो आरोपी मौके पर पकड़े गए

घटना की खबर फैलते ही कछाला गांव के ग्रामीण बड़ी संख्या में मंदिर पहुंचे। चार हमलावर अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले, जबकि दो आरोपियों को मौके पर ही ग्रामीणों ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। सूचना मिलते ही नीमच एसपी अंकित जायसवाल, जावद एसडीओपी निकिता सिंह, और कलेक्टर हिमांशु चंद्र मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने उसी रात अभियान चलाकर बाकी चार आरोपियों को भी धरदबोचा।

गिरफ्तार आरोपी: राजस्थान के निवासी, गंभीर धाराओं में केस दर्ज

  1. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान निम्नानुसार हुई है:
  2. गणपत पिता राजू नायक - निवासी चित्तौड़गढ़
  3. गोपाल पिता भगवान - निवासी चित्तौड़गढ़
  4. कन्हैयालाल पिता बंशीलाल - निवासी चित्तौड़गढ़
  5. राजू पिता भगवान भाई - निवासी चित्तौड़गढ़
  6. बाबू शर्मा पिता मोहन शर्मा - निवासी चित्तौड़गढ़
  7. एक नाबालिग आरोपी

इन सभी के खिलाफ लूट, हत्या के प्रयास, धार्मिक भावना आहत करने, और बलवे जैसी गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।

जैन मुनियों का इलाज: परंपरा के अनुसार रात में दवा लेने से इनकार

घायल मुनियों को तुरंत सिंगोली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, लेकिन उन्होंने रात में इलाज और दवा लेने से इनकार कर दिया, जो कि जैन परंपरा के अनुसार है। सोमवार सुबह उन्हें सिंगोली के जैन स्थानक भवन ले जाया गया, जहां उनका इलाज शुरू हुआ। डॉक्टरों के अनुसार, एक मुनि की स्थिति चिंताजनक थी, लेकिन अब स्थिर है।

जैन समाज में आक्रोश: सिंगोली बंद, मौन जुलूस, फांसी की मांग

इस घटना के विरोध में सोमवार को सिंगोली पूरी तरह बंद रहा। व्यापारियों ने स्वत: अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। दोपहर बाद जैन समाज के सैकड़ों लोगों ने मौन जुलूस निकाला, जो जैन स्थानक से शुरू होकर तहसील कार्यालय पहुंचा। समाज के प्रतिनिधियों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए आरोपियों को फांसी देने, और संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।

एक प्रतिनिधि ने कहा, "यह केवल एक हमले की बात नहीं है, यह हमारी आस्था पर, संयम और अहिंसा के प्रतीक संतों पर हमला है। हम इसे सहन नहीं करेंगे।"

प्रशासन की सख्त प्रतिक्रिया, नेताओं ने भी जताई चिंता

घटना के बाद प्रशासन ने इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है और गांव में लगातार निगरानी की जा रही है। नीमच एसपी अंकित जायसवाल ने कहा, "हमने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। उन पर सख्त धाराएं लगाई गई हैं। यदि जरूरी हुआ, तो केस को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाएंगे।"

पूर्व मंत्री और विधायक ओमप्रकाश सकलेचा ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर समाज से मुलाकात की और कहा, "यह कृत्य न केवल निंदनीय है, बल्कि इंसानियत के खिलाफ है। सरकार को ऐसे अपराधियों के खिलाफ उदाहरण स्थापित करना चाहिए।"

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने भी घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "जैन संतों पर हमला घोर निंदनीय है। हमने तत्काल कार्रवाई कर अपराधियों को गिरफ्तार कराया है और आगे की कार्रवाई में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी।"

कानूनी और सामाजिक असर: धार्मिक सौहार्द पर सवाल

इस हमले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या देश में धार्मिक संत और तपस्वी भी सुरक्षित नहीं हैं? सामाजिक सौहार्द और धार्मिक सहिष्णुता पर हमला करने वाले इन तत्वों को यदि समय रहते रोका नहीं गया, तो यह आगे और गंभीर रूप ले सकता है।

स्थानीय ग्रामीणों ने भी घटना की निंदा की और प्रशासन से सख्त रुख अपनाने की अपील की। कई संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि अपराधियों को सजा नहीं मिली, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

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