Gujarat Factory Blast: पटाखा फैक्ट्री में मारे गए 18 मृतकों का किया गया अंतिम संस्कार, नेमावर घाट पर पसरा मातम

Gujarat firecracker factory blast: गुजरात के बनासकांठा जिले के डीसा में मंगलवार, 2 अप्रैल की सुबह एक पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण ब्लास्ट में 20 मजदूरों की मौत हो गई। मरने वालों में 5 से 8 साल के बच्चे भी शामिल थे। ये सभी मध्यप्रदेश के हरदा और देवास जिले के निवासी थे।

हादसे के बाद 18 शवों का अंतिम संस्कार देवास जिले के नेमावर घाट पर किया गया, जबकि दो शवों की पहचान नहीं हो सकी है उसके लिए डीएनए टेस्ट कराया जा रहा है।

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Gujarat Crackers Blast: नेमावर घाट पर मातम का माहौल

यह दर्दनाक हादसा मंगलवार, को सुबह 8 बजे हुआ, जब फैक्टरी में बॉयलर फट गया। धमाका इतना जबरदस्त था कि मजदूरों के शरीर के अंग 50 मीटर दूर तक बिखर गए। नेमावर घाट पर 18 शवों का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। देवास के 9 मजदूरों के शव पहले उनके पैतृक गांव संदलपुर लाए गए, जबकि ठेकेदार का शव खातेगांव पहुंचा। हरदा के हंडिया के मजदूरों के लाश सीधे नेमावर घाट लाए गए।

इस दौरान स्थानीय प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौजूद रहे। पूरे इलाके में शोक का माहौल है हर तरफ मातम पसरा हुआ है। फैक्ट्री के पीछे खेतों में भी शरीर के कई अंग मिले हैं। हादसे में हरदा के हंडिया क्षेत्र के 8 और देवास के संदलपुर के 9 मजदूरों की जान चली गई, जबकि खातेगांव के एक ठेकेदार की भी मौत हो गई। आठ मजदूर घायल हैं, जिनमें तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है।

Gujarat Crackers Factory Blast: पटाखा फैक्टरी में हुआ था भीषण विस्फोट

मंत्री नागर सिंह मृतकों के शवों को लेने के लिए पुलिस और प्रशासन की टीम के साथ गुजरात पहुंचे थे। बुधवार सुबह देवास के 10 मजदूरों के शव उनके गांव भेजे गए, जबकि बाकी शव पोस्टमॉर्टम के बाद भेजे गए। शवों को मध्य प्रदेश लाने के दौरान दाहोद के पास एक एम्बुलेंस में तकनीकी खराबी आ गई, जिसे बदलकर फिर शवों को रवाना किया गया।

देवास जिले में एक साथ इतने शवों को रखने की सुविधा नहीं थी जिसके कारण सभी को इंदौर के एमवाय अस्पताल की मॉर्चुरी में रखा गया। गुरुवार सुबह शवों को संदलपुर और हंडिया के गांव भेजा गया, जहां परिजनों ने अंतिम दर्शन किए। इसके बाद इनको नेमावर घाट लाया गया और सामूहिक रूप से अंतिम संस्कार किया गया।

Gujarat Factory Blast: दो दिन पहले ही आए थे

पटाखा फैक्टरी में जब ब्लास्ट हुआ तब धमाका इतना जोरदार था कि मजदूरों को अपनी जान बचाने तक का समय नहीं मिला। लोग मलबे में दब गए जिससे उनकी मौत हो गई। स्थानिय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इस धमाके से आस-पास की जमीन दहल उठी मानों भूकंप आ गया हो। विस्फोट के कारण मजदूरों के शवो के टूकड़े कई किमी तक फैले मिले थे।

बनासकांठा के कलेक्टर मिहिर पटेल ने बताया कि ये सभी मजदूर दो दिन पहले ही मध्य प्रदेश से गोदाम में काम करने आए थे। एसपी अक्षयराज मकवाना के अनुसार इस गोदाम को खूबचंद ठक्कर और उनका बेटा दीपक चला रहे थे। दोनों डीसा के ही रहने वाले हैं। SP ने कहा, हमने दीपक और उसके गोदाम में काम करने वाले दो अन्य लोगों को हिरासत में ले लिया है। हम उन पर लोगों की जान खतरे में डालने के आरोप में सख्त कार्रवाई करेंगे।

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