Sagar: जिले में 2023 का पहला कोरोना पॉजिटिव मरीज मिला, H3N2 वायरस का भी खतरा बढ़ा
सागर में इस साल का कोरोना का पहला मामला सामने आया है। जेल भेजे गए एक कैदी की एहतियात के तौर पर कराई गई कोविड जांच में रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इधर इंफ्लूएंजा संदिग्ध 3 मरीजों के सैंपल H3N2 पुष्टि के लिए भेजे गए हैं।

बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज की वायरोलॉजी लैब से एक कोरोना पॉजिटिव मरीज की पुष्टि की गई है। बताया जाता है कि 22 वर्षीय कोरोना पॉजिटिव मरीज केंद्रीय जेल का बंदी है, जिसकी जेल ले जाने से पहले कोविड सैंपलिंग हुई थी। जांच के दौरान मरीज की रिपोर्ट पॉजिटिव निकली। जिसके बाद जेल प्रशासन को इसकी सूचना दी गई है। डॉक्टरों का कहना है कि मरीज में कोरोना के कोई लक्षण नहीं है, लेकिन वायरस का संक्रमण न फैले इसके लिए जेल प्रशासन को उसे क्वारेंटाइन करना होगा। जिले में वर्ष 2023 में यह पहला कोरोना पॉजिटिव मरीज सामने आया है। वहीं दूसरी तरफ देशभर में H3N2 का खतरा मंडरा रहा है। सागर में भी इंफ्लूएंजा संदिग्ध मिले हैं, जिनके सैंपल जांच के लिए वायरोलॉजी लैब भेजे गए हैं।

देश में अब H3N2 नाम का नया वायरस तेजी से फैल रहा है। अभी तक H3N2 के देशभर में 90 केस सामने आए हैं। दो लोगों की मौत भी हुई है। सागर में भी इसका खतरा मंडरा रहा है। एक तरफ जहां प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों में सर्दी, खांसी और फ्लू से ग्रस्त दर्जनों मरीज भर्ती हैं। वहीं, हर दिन करीब 130 से ज्यादा मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं। बीएमसी में इंफ्लूएंजा संदिग्ध तीन मरीजों की सैंपलिंग भी कराई गई है। जिनमें एक 60 वर्षीय महिला और 10 व 8 वर्षीय दो बच्चे भी शामिल हैं। तीनों मरीज फिलहाल बीएमसी में ही भर्ती हैं। डॉक्टर्स ने बताया कि ओपीडी में आने वाला हर तीसरा या चौथा मरीज H3N2 या इससे मिलते-जुलते लक्षण यानी सर्दी, खांसी और फ्लू से पीड़ित है। हालांकि नए वायरस की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
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इंफ्लूएंजा ए पॉजिटिव निकला तो H3N2 की जांच के लिए बाहर भेजेंगे सैंपल
बीएमसी की वायरोलॉजी लैब के नोडल अधिकारी डॉ. सुमित रावत ने बताया कि वायरोलॉजी लैब में इंफ्लूएंजा जांच की सुविधा उपलब्ध है। यह जांच दो किट द्वारा होती है। जिसमें इंफ्लूएंजा ए और बी की पहचान होती है। यदि ए पॉजिटिव निकला तो मरीज के सैंपल में H3N2 कंफर्म करने के लिए भोपाल एम्स या नेशनल वायरोलॉजी लैब पूना भेजा जाएगा। फिलहाल अब तक हुई संदिग्धों की जांच में किसी को भी इंफ्लूएंजा ए पॉजिटिव नहीं मिला है।
क्या है H3N2 वायरस
H3N2 इंफ्लूएंजा-ए वायरस के खतरों को लेकर देश में सभी मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सा संस्थाओं को आगाह किया गया है। विशेषज्ञों द्वारा साझा की गई जानकारी अनुसार H3N2 इंफ्लूएंजा-ए वायरस का सबटाइप है। डब्ल्यूएचओ और अमेरिका के सीडीसी के मुताबिक यह मनुष्यों में इन्फ्लुएंजा का अहम कारण है। यह वायरस पक्षियों और जानवरों को भी संक्रमित कर सकता है। पक्षियों और दूसरे जानवरों में इसके कई स्ट्रेन्स पैदा हो चुके हैं। जो श्वसन में संक्रमण पैदा करता है। इन्फ्लूएंजा ए वायरस का सबटाइप है जिसकी खोज 1968 में हुई थी। H3N2 इंफ्लुएंजा संक्रामक है, जो एक से दूसरे व्यक्ति में मुंह या नाक से निकलने वाली बूंदों के माध्यम से फैलता है। छींकने, खांसने और यहां तक कि बोलने पर जो बूंदें निकलती हैं, वह आसपास मौजूद लोगों को संक्रमित कर सकती हैं। बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती, जो पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, ऐसे लोगों के संक्रमित होने का खतरा ज्यादा है।
H3N2 वायरस का इलाज क्या है?
- खुद को हाइड्रेट रखें, लिक्विड पीते रहें।
- बुखार, खांसी या सिरदर्द हने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें।
- इन्फ्लूएंजा वायरस से बचने के लिए फ्लू शॉट्स लें।
- बुखार, सर्दी-खांसी हाेने पर अपने मन से एंटीबायोटिक्स न लें।
- घर के बाहर मास्क लगाकर रखें, भीड़ वाली जगह से बचें।
डॉक्टर की सलाह- बचाव जरूरी है
बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मनीष जैन के अनुसार वायरस से बचने के लिए सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है। ऐसी जगहों पर जाने से बचें, जहां अधिक भीड़ हो। अगर जाना पड़े, तो मास्क का इस्तेमाल करें। डॉक्टर की सलाह से इन्फ्लूएंजा वैक्सीन भी ले सकते हैं। गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों में वैक्सीन कारगर है। अधिक एंटीबायोटिक लेने से बचें। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के दवा ना लें।












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