राहुल गांधी बोले- मध्य प्रदेश में 150 सीटें आने वाली हैं, कांग्रेस ने MP के लिए बनाई ये खास रणनीति
इसी साल के अंत तक मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसको लेकर ही राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, महासचिव केसी वेणुगोपाल, राहुल गांधी ने पार्टी नेताओं के साथ चर्चा की।

कर्नाटक में प्रचंड जीत के बाद कांग्रेस पूरे उत्साह में है। कांग्रेस पार्टी ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। पार्टी ने आज मध्य प्रदेश के चुनावों को लेकर अहम बैठक की है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, महासचिव केसी वेणुगोपाल और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश के पार्टी नेताओं के साथ दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में बैठक की।
बैठक के बाद राहुल गांधी ने कहा कि हमारी लंबी चर्चा चली, हमारा आंतरिक आंकलन है कि हमें कर्नाटक में 136 सीटें मिली, हमें मध्य प्रदेश में 150 सीटें मिलने वाली है। जो कर्नाटक में किया उसे दोहराएंगे। भैय्या 150 सीटें आने वाली हैं।

कांग्रेस की एमपी को लेकर क्या है रणनीति
कांग्रेस ने बीजेपी को फंसाने के लिए व्यूह रचना शुरू कर दी है। कांग्रेस की नजर भाजपा के असंतुष्ट नेताओं पर है तो वहीं पार्टी के नेताओं को सक्रिय करने की हर संभव कोशिश हो रही है। दिग्विजय सिंह मिशन 66 पर लगे हुए हैं।
दिग्विजय सिंह की विधानसभा के उन 66 सीटों पर सक्रियता बढ़ी हुई है, जहां कांग्रेस को लंबे अरसे से हार का सामना करना पड़ रहा है। इसके लिए 16 नेताओं की एक टीम को काम पर लगाया है। वहीं प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ लगातार सभाएं कर रहे हैं। वे खुद अलग-अलग स्थानों पर पहुंचकर कार्यकर्ताओं से संवाद कर रहे हैं।
कमलनाथ ने कार्यक्रमों में अभी से अपने वादे और घोषणाएं का ऐलान करना शुरू कर दिया है। वह सस्ती बिजली, 500 रुपये में सिलेंडर, पुरानी पेंशन लागू करने का कांग्रेस का वादा हो या कर्जमाफी और ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) को 27 प्रतिशत आरक्षण जैसे मुद्दों को उठा रहे हैं। कांग्रेस लगातार भाजपा सरकार को घेर रही है।

कमलनाथ और दिग्विजय एकजुट
मध्य प्रदेश कांग्रेस 2018 की तुलना में इस बार एकजुट नजर आ रही है। पिछले चुनाव में जहां सिंधिया और कमलनाथ के बीच कई बार मतभेद देखने को मिला था। जिसका परिणाम ये हुआ कि राज्य में कांग्रेस की सरकार गिर गई। इस बार एमपी में कांग्रेस के दोनों दिग्गज नेता कमलनाथ और दिग्विजय साथ नजर आ रहे हैं।
पार्टी भी चाह रहे है कि जनता के बीच उनके एकजुट होने के संदेश जाए। वहीं कांग्रेस एक विशेष अभियान चला रही है। जिसमें वह जिला और ब्लॉक स्तरों तक घर-घर जाकर लोगों को अपनी योजनाओं के बारे में जानकारी दे रहे हैं।
दो महीने पहले टिकटों का बंटबारा
वहीं कांग्रेस पार्टी इस बार दो महीने पहले ही अधिकांश उम्मीदवार घोषित कर देगी। जिससे प्रत्याशियों को जमीनी स्तर पर काम करने और प्रचार-प्रसार का भरपूर समय मिलेगा। यही नहीं टिकट न मिलने पर कुछ नेता बगावत कर सकते हैं। उन्हें बिठाने या दावेदारी वापस लेने के लिए मनाने के लिए भी पार्टी को वक्त मिलेगा।
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस आलाकमान ने एमपी कांग्रेस से मध्यप्रदेश के स्थानीय बड़े मुद्दों की जानकारी मांगी है। कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों से ज्यादा लोकल इश्यू को प्राथमिकता से उठाया था। उसी की तर्ज पर एमपी में मंत्रियों के भ्रष्टाचार, विधायकों द्वारा की गई गड़बडियों की जानकारी आलाकामान को सौंपी गई है।
इस बैठक में मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के वचन पत्र को भी आलाकमान के सामने रखा गया। इसमें मुख्य रूप से नारी सम्मान योजना, 500 रुपए में एलपीजी सिलेंडर, ओल्ड पेंशन स्कीम की बहाली, ओबीसी आरक्षण जैसे बड़े मुद्दे शामिल हैं।

चुनावी रणनीतिकार सुनील कानुगोलू को मिली एमपी की जिम्मेदारी
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कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले चुनावी रणनीतिकार सुनील कानुगोलू को एमपी में लगाया गया है। सुनील को कांग्रेस का 'प्रशांत किशोर' भी कहा जाता है। सुनील की राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में भी अहम भूमिका रही थी। बताया जाता है कि 2024 लोकसभा की पूरी जिम्मेदारी सुनील की टीम पर है।
40 साल के सुनील कर्नाटक के बेल्लारी जिले के रहने वाले हैं। पहले पीके साथ काम चुके है।सुनील माइंडशेयर एनालिटिक्स नाम की एक फर्म चलाते हैं। कर्नाटक में 40 पर्सेंट वाली सरकार, पेसीएम, क्यूआर कोड कैंपेन सुनील की रणनीति का हिस्सा थी। अब सुनील एमपी में कांग्रेस के लिए काम कर रहे हैं। इसकी झलक भी मध्य प्रदेश में दिखने लगी है।












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