MP News: लोकसभा चुनाव 2024 के लिए कांग्रेस को नहीं मिल रहे मजबूत प्रत्याशी, दिग्गजों ने खींचें अपने हाथ
Lok Sabha Election News: मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2023 में कांग्रेस की करारी हार के बाद अब लोकसभा चुनाव में पार्टी को मजबूत प्रत्याशियों की तलाश है। राजधानी भोपाल जैसे क्षेत्र में पार्टी को अच्छे उम्मीदवार नहीं मिल पा रहे हैं। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह चुनाव लड़ने से बचते हुए नजर आ रहे हैं।
दिग्गज नेताओं में दिग्विजय के अलावा सुरेश पचौरी, विवेक तंखा जैसे बड़े नेताओं की भी दिलचस्पी लोकसभा चुनाव लड़ने में दिखाई नहीं दे रही है। पार्टी की स्क्रीनिंग कमेटी की दो बार बैठक हो चुकी है इनमें जिन सिंगल नाम को तय किया गया था उसमें जबलपुर से महापौर जगत सिंह बहादुर और रीवा महापौर अजय मिश्रा का नाम था इनमें जबलपुर महापौर ने तो कांग्रेस प्रत्याशी बनने की वजह BJP का ही दामन थाम लिया।

राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में मिली पराजय और अयोध्या में श्री राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से बने माहौल के कारण कांग्रेस के दिग्गज नेता चुनाव लड़ने से बच रहे हैं। मैं नहीं चाहते कि प्रतिकूल माहौल में चुनाव लड़कर फालतू खर्च किया जाए। यही वजह है कि वे हारने से बेहतर चुनाव लड़ने से ही इनकार कर रहे हैं।
छिंदवाड़ा सीट को लेकर भी कांग्रेस परेशान
मध्य प्रदेश में पिछले लोकसभा चुनाव में एकमात्र सीट छिंदवाड़ा जीतने वाली कांग्रेस इस बार इस सीट को लेकर भी परेशान है। दरअसल, पिछले दिनों कमलनाथ और उनके बेटे की भाजपा में जाने की अटकलें थी। लेकिन भाजपा में कुछ नेताओं के विरोध के चलते ऐसा हो नहीं सका। अब ऐसे में कांग्रेस पार्टी इस सीट को लेकर भी मंथन करने में लगी हुई है।
भोपाल से दिग्विजय ने हाथ खींचा
भोपाल लोक सभा से कांग्रेस के पास कोई चर्चित चेहरा नहीं है। पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान प्रदेश में कमलनाथ सरकार थी इसे देखते हुए पूर्व सीएम दिग्विजय ने अपना भाग्य आजमाया था। लेकिन उन्हें साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर से हार का सामना करना पड़ा था। इस बार में चुनाव नहीं लड़ने की बात कह रहे हैं यही वजह है कि कांग्रेस श्याम बाबू श्रीवास्तव और संजीव सक्सेना पर दांव लगाने पर विचार कर रही है।
रायपुर मंत्री की बात करें तो कमलेश्वर पटेल और सज्जन सिंह वर्मा दोनों ही लोकसभा चुनाव में भाग्य अजमाने की तैयारी नहीं कर रहे हैं। खजुराहो में भी कांग्रेस प्रत्याशी न होने के चलते कांग्रेस ने यह सीट समाजवादी पार्टी को दे दी है। दरअसल, पिछले दो लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का लोकसभा में प्रदर्शन बेहद खराब रहा था। भाई भाजपा ने इस बार 29 में से 29 सीटें जीतने का लक्ष्य बनाया है।
रीवा, इंदौर सहित कई लोकसभा सीटों पर प्रत्याशी का संकट
रीवा महापौर अजय मिश्रा भी चुनाव लड़ने के मुद्दे पर सहमत नहीं है। पार्टी ने उनका इकलौता नाम रीवा से तय किया है। बिंदी की इस सीट पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी का प्रभाव था। इसी को देखते हुए पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस में उनके पोते सिद्धार्थ तिवारी को यहां से चुनावी मैदान में उतारा था। लेकिन आप सिद्धार्थ भाजपा में शामिल हो चुके हैं और त्यौथर से भाजपा के विधायक है। यही हाल इंदौर का है जहां पर विधायक यही हाल इंदौर का है जहां पर पूर्व विधायक संजय शुक्ला और विशाल पटेल और सत्यनारायण पटेल तीनों ही लोकसभा चुनाव लड़ने से दूरी बनाना शुरू कर दी है। इसे देखते हुए कांग्रेस अश्विन जोशी और पूर्व विधायक या स्वप्निल कोठरी में से किसी एक को इंदौर से चुनाव लड़ा सकती है।












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