शिवराज के बड़बोलेपन से एमपी के चित्रकूट के घाट पर हारी भाजपा?
नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के चित्रकूट उपचुनाव में बीजेपी प्रत्याशी शंकर दयाल त्रिपाठी को मिली करारी हार से सीएम शिवराज सिंह को करारा झटका लगा है। पार्टी को चित्रकूट की हार इसलिए भी ज्यादा चुभ रही है, क्योंकि यहां प्रचार की कमान खुद सीएम शिवराज ने संभाली थी। यहां तक कि उन्होंने चित्रकूट के तुर्रा गांव में एक रात भी गुजारी थी और जनता को संबोधित करते हुए कहा था, 'न तो मुझे गेस्ट हाउस चाहिए न ही सरकारी आवास। मुझे तो बस किसी गरीब के घर की छत चाहिए, ताकि मैं वहां की स्थिति को देख सकूं।' लेकिन हुआ इसके बिल्कुल उल्टा। सीएम के लिए तुर्रा गांव जिस प्रकार से खास इंतजाम किए गए वो चर्चा का केंद्र बन गए और बाजी उलटी पड़ गई। ऐसे में बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या सीएम शिवराज के बड़बोलेपन से चित्रकूट में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा?

बड़बोलेपन की पूरी कहानी
चित्रकूट में चुनाव प्रचार के लिए सीएम शिवराज सिंह चौहान खुद तुर्रा गांव गए थे और वह यहां रुके भी थे। तुर्रा गांव में आदिवासी के घर सीएम साहब जब रुकने के लिए पहुंचे थे तो उस घर को मोबाइल सीएम हाउस बना दिया था। सीएम शिवराज के पहुंचने से पहले प्रशासन ने रातों-रात वहां हर इंतजाम कर दिया था। गद्दा, सोफा, पलंग सोफा आदि सबकुछ वहां मौजूद था, लेकिन पोल तब खुल गई, जब सीएम के गांव जाते ही पूरा साजो-सामान वहां से लेकर अधिकारी जाने लगे। बस यही चूक हो गई और पूरे क्षेत्र में यह बात चर्चा का विषय बन गई।
सीएम शिवराज सिंह चौहान का एक बयान चित्रकूट उपचुनाव ठीक पहले घूब चर्चा में आया, जिसमें उन्होंने मध्य प्रदेश की सड़कों को अमेरिका के रोड से भी बेहतर बताया था। उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस बयान ने पार्टी के लिए स्थिति काफी असहज कर दी थी।












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