Ujjain: महाकाल मंदिर में प्रोटोकॉल दर्शन व्यवस्था में बदलाव, जानिए कैसे होंगे VIP दर्शन और कितना लगेगा शुल्क
Ujjain Mahakal News: श्री महाकालेश्वर मंदिर में अब प्रोटोकॉल दर्शन की व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। नवागत प्रशासक प्रथम कौशिक के नेतृत्व में यह बदलाव शनिवार से लागू किया गया है।
इस नई व्यवस्था के तहत प्रोटोकॉल से आने वाले श्रद्धालुओं के टिकट पर अंकित प्रोटोकॉल पॉइंट नंबर की सख्ती से जांच की जाएगी और इसे एक विशेष रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा।

क्या है नया बदलाव?
अब, प्रोटोकॉल दर्शन के तहत श्रद्धालुओं से ₹250 का शुल्क लिया जाएगा, जिसके बाद उन्हें एक टिकट जारी किया जाएगा। इस टिकट की संपूर्ण जानकारी एक विशेष रजिस्टर में दर्ज की जाएगी, जिसमें निम्नलिखित जानकारी शामिल होगी
- टिकट नंबर
- दर्शन के लिए आने वाले व्यक्ति का नाम
- दर्शनार्थियों की संख्या
- किसके रेफरेंस से दर्शन के लिए आ रहे हैं, उनका नाम
- इस पूरी प्रक्रिया को मंदिर प्रशासन के कर्मचारी और पुलिसकर्मी हर चेकिंग पॉइंट पर जांचेंगे, जिससे किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोका जा सके।
क्या था पहले का सिस्टम?
पहले श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए दो लोगों के टिकट पर चार श्रद्धालु भी प्रवेश कर जाते थे और इसकी कोई एंट्री नहीं होती थी। इससे प्रोटोकॉल दर्शन की पारदर्शिता प्रभावित हो रही थी और सुरक्षा व्यवस्था पर भी असर पड़ रहा था।
नई व्यवस्था से क्या लाभ?
पारदर्शिता: हर टिकट को स्कैन किया जाएगा, एंट्री दर्ज की जाएगी और संख्या की पुष्टि की जाएगी। इससे फर्जी तरीके से दर्शन करने वालों पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सकेगी।
सुरक्षा: ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों और पुलिसकर्मियों ने इस नई व्यवस्था की सराहना की है, क्योंकि इससे पहले बिना रजिस्टर एंट्री के श्रद्धालु दर्शन करने चले जाते थे, जिससे कभी-कभी अव्यवस्था उत्पन्न होती थी। अब चेकिंग प्रक्रिया से दर्शनार्थियों की संख्या को नियंत्रित किया जा सकेगा और सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत होगी।
प्रशासक का बयान:
श्री महाकालेश्वर मंदिर के नवागत प्रशासक प्रथम कौशिक ने कहा, "महाकाल मंदिर में दर्शन व्यवस्था को सुचारू और पारदर्शी बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। अब प्रत्येक दर्शनार्थी की जानकारी दर्ज की जाएगी, जिससे किसी भी प्रकार की अनियमितता नहीं हो सकेगी। मंदिर प्रशासन का प्रयास है कि श्रद्धालुओं को सुविधा के साथ दर्शन का लाभ मिले और कोई भी अवैध रूप से दर्शन का लाभ न उठा सके।"
इस बदलाव के बाद श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुव्यवस्थित तरीके से दर्शन की सुविधा मिलेगी, और मंदिर प्रशासन की ओर से पारदर्शिता बढ़ाई जाएगी।












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