MP News: क्या भोपाल पुलिस केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान से पूछताछ के लिए जारी करेगी समन, जानिए पूरा मामला
MP Bhopal News: भोपाल में एक गंभीर घटना के बाद अब इस सवाल पर बहस शुरू हो गई है कि क्या भोपाल पुलिस केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान से पूछताछ के लिए समन जारी करेगी। यह मामला उस वक्त सामने आया जब पायल मोदी (31 वर्ष), जो जयश्री गायत्री फूड्स प्राइवेट लिमिटेड की निदेशक हैं, उन्होंने 30 जनवरी को आत्महत्या करने की कोशिश की।
पायल मोदी ने घर में रखी चूहे मारने की दवा खाकर अपनी जान देने की कोशिश की। उन्हें तुरंत बंसल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी स्थिति स्थिर लेकिन गंभीर बनी हुई है। इस मामले में नया मोड़ तब आया जब पुलिस को पायल का एक कथित सुसाइड नोट मिला, जिसमें उन्होंने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और उनके कुछ अन्य सहयोगियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

सुसाइड नोट में गंभीर आरोप
पायल मोदी के सुसाइड नोट में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का नाम प्रमुखता से लिया गया है। इसके अलावा, नोट में चिराग पासवान के पांच अन्य साथियों के नाम भी शामिल हैं। इन नामों में चंद्र प्रकाश पांडे, वेद प्रकाश पांडे, सुनील त्रिपाठी, भगवान सिंह मेवड़ा और हितेश पंजाबी का उल्लेख किया गया है। सुसाइड नोट के अनुसार, चिराग पासवान और चंद्र प्रकाश पांडे आपस में जीजा-साले हैं, और वेद प्रकाश पांडे और चंद्र प्रकाश पांडे सगे भाई हैं। पायल मोदी ने आरोप लगाया है कि ये लोग चिराग पासवान की राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल कर उनके परिवार की कंपनियों पर विभिन्न सरकारी एजेंसियों से छापे डलवा रहे थे, जिनमें CGST, FFSI, EOW, और ED जैसी एजेंसियां शामिल थीं।
पुलिस की जांच और समन का सवाल
पायल मोदी के सुसाइड नोट में लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं और ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या भोपाल पुलिस केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और उनके सहयोगियों से पूछताछ करने के लिए समन जारी करेगी। फिलहाल पुलिस ने इस मामले में कोई समन जारी नहीं किया है, लेकिन जांच जारी है। पुलिस अधिकारी TI भूपेंद्र कोल संधू ने यह बताया कि पायल के परिवार ने इस बात की पुष्टि की है कि सुसाइड नोट पायल ने ही लिखा था। हालांकि, पुलिस ने सुसाइड नोट को अभी तक जब्त नहीं किया है, लेकिन इसे जांच में शामिल किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के खिलाफ लगाए गए आरोपों के संदर्भ में, पुलिस को यह तय करना होगा कि इन आरोपों के पीछे कितनी सच्चाई है। यदि जांच में यह पाया जाता है कि आरोपों में तथ्यात्मक आधार है, तो पुलिस समन जारी कर चिराग पासवान और उनके सहयोगियों से पूछताछ कर सकती है। लेकिन इस प्रक्रिया में कानूनी और राजनीतिक पहलू भी महत्वपूर्ण होंगे, जिनका प्रभाव जांच की दिशा पर पड़ सकता है।
प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई और राजनीतिक दबाव
इस घटना के बाद, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 28 और 29 जनवरी को भोपाल, सीहोर और मुरैना जिले में जयश्री गायत्री फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के ठिकानों पर छापेमारी की थी। यह कार्रवाई आर्थिक अपराधों के तहत की गई थी, और इससे कंपनी के मालिक किशन मोदी और उनके परिवार पर दबाव बढ़ गया है। इन छापों के दौरान प्राप्त दस्तावेजों और साक्ष्यों की जांच भी जारी है।

भोपाल में ED की छापेमारी और आत्महत्या की कोशिश: भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी राजनीति
भोपाल में पायल मोदी, जो जयश्री गायत्री फूड्स प्राइवेट लिमिटेड की निदेशक हैं, ने हाल ही में जहर खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की। इस मामले में अब एक बड़ा विवाद उभर कर सामने आ रहा है। पायल के पति किशन मोदी, जो कंपनी के MD हैं, ने दावा किया है कि उन्हें पहले ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बारे में चेतावनी दी गई थी।
पहले ही चेतावनी मिल चुकी थी: किशन मोदी
किशन मोदी ने बताया कि 27 जनवरी को उनके पूर्व पार्टनर वेद प्रकाश पांडे और चंद प्रकाश पांडे ने उन्हें फोन कर आगाह किया था कि उनके यहां ED की रेड हो सकती है। वेद प्रकाश पांडे ने यह भी कहा था कि कुछ बड़ा होने वाला है। इस पर मोदी को यह लगा कि ये सिर्फ एक सामान्य बातचीत है। लेकिन, अगले ही दिन 28 जनवरी को ED ने उसी फ्लैट पर छापा मारा, जिसके बारे में वेद प्रकाश ने बात की थी। हालांकि, छापे के दौरान कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला।

किशन मोदी ने यह भी बताया कि यह फ्लैट उनके ससुर का था, जो लंबे समय से बंद पड़ा हुआ था। इस छापेमारी के बाद मोदी का आरोप है कि वेद प्रकाश पांडे और उनके साथियों ने जानबूझकर यह आरोप ED पर डालकर उन्हें परेशान किया।
राजनीतिक दबाव और आरोप
किशन मोदी ने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और उनके करीबी लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि चिराग पासवान, वेद प्रकाश पांडे, चंद्र प्रकाश पांडे, सुनील त्रिपाठी, भगवान सिंह मेवाड़ा और हितेष पंजाबी ने मिलकर उनकी कंपनियों पर छापे डलवाए हैं। मोदी के अनुसार, ये सभी लोग अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करके उन्हें परेशान कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि हरीपुर स्थित फैक्ट्री में उनके पार्टनर रहे वेद प्रकाश पांडे और चंद्र प्रकाश पांडे ने पूर्व CEO सुनील त्रिपाठी के साथ मिलकर करीब 80 करोड़ रुपए का गबन किया था। इस मामले में उन्होंने जून 2024 में हबीबगंज थाने में FIR दर्ज कराई थी, लेकिन अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
कांग्रेस का पलटवार: सियासी अत्याचार का आरोप
यह मामला अब राजनीति का हिस्सा बनता जा रहा है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि क्या ED का नियंत्रण अब भाजपा के हाथ से निकल चुका है। पटवारी का आरोप था कि छोटे-छोटे गठबंधन मंत्री और उनके रिश्तेदार ED का इस्तेमाल करके विरोधियों को परेशान कर रहे हैं। उन्होंने इसे भाजपा सरकार का "सियासी अत्याचार" बताया और कहा कि इस तरह की ब्लैकमेलिंग के कारण लोग आत्महत्या करने पर मजबूर हो रहे हैं।












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