MP News: भोपाल की इशिका ने बिना कोचिंग के रचा इतिहास, 10वीं बोर्ड में 98.02% अंकों के साथ टॉप 10 में बनाई जगह
भोपाल की इशिका ने बिना कोचिंग के रचा इतिहास, 10वीं बोर्ड के रिजल्ट में टॉप 10 में बनाई जगह, राजधानी 28वें पायदान पर
MP News: मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) ने 6 मई 2025 को 10वीं बोर्ड के नतीजे घोषित किए, और इस बार सिंगरौली की प्रज्ञा जायसवाल के 100% अंकों के साथ टॉप करने की खबर ने तो सुर्खियां बटोरीं, लेकिन भोपाल की एक बेटी ने भी कमाल कर दिखाया।
सुभाष उत्कृष्ट स्कूल की छात्रा इशिका कपूर ने 500 में से 491 अंक (98.02%) हासिल कर प्रदेश की टॉप 10 मेरिट लिस्ट में 10वां स्थान पाया। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि इशिका ने बिना किसी कोचिंग के, सिर्फ सेल्फ स्टडी के दम पर यह मुकाम हासिल किया। लेकिन अफसोस, राजधानी भोपाल का प्रदर्शन इस बार भी फीका रहा और वह जिलों की रैंकिंग में 28वें पायदान पर खिसक गई।

भोपाल का रिजल्ट, सुधार, लेकिन फिर भी 28वां स्थान
मध्य प्रदेश में इस साल 10वीं बोर्ड का रिजल्ट पिछले सालों की तुलना में शानदार रहा। कुल 76.22% विद्यार्थी पास हुए, जो पिछले साल के 58.10% की तुलना में 18% का उछाल है। 9,53,777 छात्रों ने परीक्षा दी थी, और इस बार लड़कियों ने लड़कों को पछाड़ते हुए 79.27% पास प्रतिशत हासिल किया, जबकि लड़कों का पास प्रतिशत 73.21% रहा। स्वाध्यायी (प्राइवेट) छात्रों का रिजल्ट केवल 28.70% रहा, जो उनकी चुनौतियों को दर्शाता है।
लेकिन राजधानी भोपाल, जो शिक्षा का गढ़ मानी जाती है, इस बार फिर पिछड़ गई। 52 जिलों की रैंकिंग में भोपाल 28वें स्थान पर रहा, जो पिछले साल के 25वें स्थान से भी नीचे है। नरसिंहपुर, नीमच और मंडला जैसे जिले टॉप पर चमके, जबकि इंदौर 16वें, उज्जैन 22वें, जबलपुर 36वें और ग्वालियर 40वें स्थान पर रहे। भोपाल के इस प्रदर्शन ने शिक्षा विभाग और शहरवासियों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। स्थानीय शिक्षाविद् डॉ. अनिल शर्मा ने कहा, "भोपाल में संसाधन और स्कूलों की कोई कमी नहीं, फिर भी रिजल्ट निराशाजनक है। हमें शिक्षण पद्धति और छात्रों की तैयारी पर ध्यान देना होगा।"
MP News 10th board: इशिका कपूर, सेल्फ स्टडी की चमक, टॉप 10 में जगह
इन सबके बीच भोपाल की इशिका कपूर ने अपनी मेहनत की चमक से शहर का नाम रोशन कर दिया। सुभाष उत्कृष्ट स्कूल की इस छात्रा ने 491 अंकों के साथ प्रदेश की मेरिट लिस्ट में 10वां स्थान हासिल किया। इशिका की कहानी दिल को छू लेने वाली है। उनके पिता का देहांत हो चुका है, और परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है। मां, जो गृहिणी हैं, और तीन बहनों के साथ इशिका ने तमाम मुश्किलों का सामना किया। फिर भी, उन्होंने हार नहीं मानी।
इशिका ने बताया, "मैंने कभी कोचिंग नहीं ली। मेरी पढ़ाई का सहारा सिर्फ स्कूल की किताबें, शिक्षकों की गाइडेंस और मेरी सेल्फ स्टडी थी। मैं घंटों की गिनती नहीं करती थी, बल्कि हर टॉपिक को समझने पर फोकस करती थी। मैं खुद से सवाल पूछती थी और कांसेप्ट्स को क्लियर करती थी। पढ़ाई मेरे लिए बोझ नहीं, बल्कि मजेदार सफर थी।"
इशिका की यह रणनीति हर छात्र के लिए प्रेरणा है। उन्होंने कहा, "मार्क्स से ज्यादा जरूरी है कि आप कितना समझते हैं। मैंने हर विषय को गहराई से पढ़ा, चाहे वह गणित हो या सामाजिक विज्ञान।" इशिका का अगला लक्ष्य 11वीं में PCM (फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स) लेकर पढ़ाई करना और IIT में दाखिला लेना है। उनकी मां ने गर्व से कहा, "इशिका ने साबित कर दिया कि मेहनत के आगे कोई रुकावट टिक नहीं सकती।"
MP News 10th board: बेटियों का दबदबा: भोपाल के टॉपर्स की चमक
इशिका अकेली नहीं हैं जिन्होंने भोपाल का नाम रोशन किया। शहर के कई अन्य छात्र-छात्राओं ने भी शानदार प्रदर्शन किया। भोपाल के टॉपर्स की लिस्ट में शामिल हैं:
- अश्विनी केवट (पिता: मनोज कुमार केवट, एलाइट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय) - 494 अंक
- सोनम यादव (पिता: वकील यादव, सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय) - 493 अंक
- लवकेश बारपेटे (पिता: श्रीराम बारपेटे, सुभाष उत्कृष्ट माध्यमिक विद्यालय) - 492 अंक
- नया नूर अंसारी (पिता: नसीरुद्दीन चौधरी, शासकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय जहांगीराबाद) - 492 अंक
इस लिस्ट में सुभाष उत्कृष्ट स्कूल का दबदबा साफ दिखता है, जिसने इशिका, सोनम और लवकेश जैसे टॉपर्स दिए। खास बात यह है कि टॉपर्स में लड़कियों की संख्या ज्यादा है, जो प्रदेश के 79.27% पास प्रतिशत को और मजबूती देता है। सुभाष उत्कृष्ट स्कूल के प्रिंसिपल रमेश चौहान ने कहा, "हमारे स्कूल के बच्चे सीमित संसाधनों में भी कमाल करते हैं। इशिका और अन्य टॉपर्स ने साबित किया कि मेहनत और शिक्षकों का मार्गदर्शन मिले, तो कोई भी मुकाम असंभव नहीं।"
इशिका की रणनीति, पढ़ाई को बनाया मजेदार
इशिका की पढ़ाई की रणनीति हर छात्र के लिए एक सबक है। उन्होंने बताया कि वह रोजाना 5-6 घंटे पढ़ाई करती थीं, लेकिन समय की गिनती से ज्यादा फोकस क्वालिटी पर था। "मैं हर टॉपिक को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर पढ़ती थी। अगर कुछ समझ नहीं आता था, तो मैं अपने शिक्षकों से तुरंत पूछती थी। मैंने पिछले 5 साल के बोर्ड पेपर्स हल किए और मॉक टेस्ट दिए। इससे मुझे एग्जाम का पैटर्न समझने में मदद मिली।"
इशिका ने मोबाइल और सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी। उन्होंने कहा, "मैंने फोन सिर्फ जरूरी नोट्स या ऑनलाइन लेक्चर के लिए इस्तेमाल किया। बाकी समय किताबों और नोट्स के साथ बिताया।" उनकी यह अनुशासित दिनचर्या और पढ़ाई के प्रति जुनून ही उनकी सफलता का राज है।
भोपाल क्यों पिछड़ा? सवाल और जवाब
भोपाल के 28वें स्थान पर खिसकने ने कई सवाल खड़े किए हैं। शहर में सरकारी और प्राइवेट स्कूलों की भरमार है, फिर भी रिजल्ट में यह पिछड़ापन क्यों? शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भोपाल में कोचिंग सेंटरों पर अत्यधिक निर्भरता, शिक्षकों की कमी और सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे की खामियां इसके लिए जिम्मेदार हैं। एक शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "भोपाल के कई स्कूलों में शिक्षक समय पर सिलेबस पूरा नहीं कर पाते। वहीं, कोचिंग में पढ़ने वाले छात्र स्कूल की पढ़ाई को गंभीरता से नहीं लेते।"
वहीं, कुछ अभिभावकों का कहना है कि भोपाल में प्रतिस्पर्धा इतनी ज्यादा है कि छात्र दबाव में आ जाते हैं। एक अभिभावक राकेश वर्मा ने कहा, "इंदौर और नरसिंहपुर जैसे शहरों में बच्चे कम दबाव में पढ़ते हैं और शिक्षकों का फोकस हर बच्चे पर होता है। भोपाल में यह कमी दिखती है।"
टॉप जिलों का जलवा, नरसिंहपुर, नीमच, मंडला अव्वल
प्रदेश में नरसिंहपुर, नीमच और मंडला ने रिजल्ट में बाजी मारी। इन जिलों का पास प्रतिशत 85% से ऊपर रहा, जो छोटे शहरों में शिक्षा की गुणवत्ता को दर्शाता है। नरसिंहपुर के एक शिक्षक ने बताया, "हमारे यहां शिक्षक और छात्रों का तालमेल बहुत अच्छा है। बच्चे बिना कोचिंग के भी मेहनत करते हैं।" मंडला जैसे आदिवासी क्षेत्र का टॉप करना भी प्रेरणादायक है, जहां संसाधनों की कमी के बावजूद बच्चों ने कमाल दिखाया।
सरकार और बोर्ड की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने रिजल्ट की घोषणा करते हुए टॉपर्स को बधाई दी। उन्होंने X पर पोस्ट किया, "सिंगरौली की प्रज्ञा जायसवाल और भोपाल की इशिका कपूर जैसी बेटियों ने मध्य प्रदेश का नाम रोशन किया। सभी टॉपर्स को बधाई, और जो पास नहीं हुए, वे हिम्मत न हारें।"
एमपी बोर्ड ने टॉपर्स को 1 लाख रुपये नकद, लैपटॉप और प्रशस्ति पत्र देने की घोषणा की है। इशिका को भी यह सम्मान मिलेगा। साथ ही, "मेधावी विद्यार्थी योजना" के तहत उनकी आगे की पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप दी जाएगी।
भोपाल के लिए सबक, इशिका की प्रेरणा
इशिका की यह सफलता भोपाल के लिए एक प्रेरणा है। शहर को अगर टॉप जिलों में जगह बनानी है, तो सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति, बुनियादी ढांचे में सुधार और छात्रों पर अनावश्यक दबाव कम करना होगा। इशिका की तरह अगर बच्चे सेल्फ स्टडी और कांसेप्ट-बेस्ड लर्निंग पर फोकस करें, तो भोपाल फिर से शिक्षा का गढ़ बन सकता है।
इशिका ने अपने साथी छात्रों के लिए संदेश दिया, "पढ़ाई को बोझ न समझें। हर सवाल का जवाब ढूंढने की कोशिश करें। अपने शिक्षकों पर भरोसा रखें और खुद पर यकीन करें। अगर मैं कर सकती हूं, तो आप भी कर सकते हैं।"
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