डॉक्टरों की हड़ताल से वेंटीलेटर पर पहुंचे यूपी के अस्पताल
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में शनिवार को शुरू हुई जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल मंगलवार को भी जारी है। हड़ताल के कारण प्रदेश के मेडिकल कालेजों और अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं ठप हैं और मरीज खासे परेशानी में हैं। इधर, चिकित्सक भी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। यूं कहिये कि उत्तर प्रदेश के तमाम सरकारी अस्पताल वेंटीलेटर पर पहुंच गये हैं।
कानपुर मेडिकल कालेज के हैलट अस्पताल के कनिष्ठ चिकित्सकों के साथ बीते शुक्रवार सपा के स्थानीय विधायक इरफान सोलंकी का विवाद हुआ था। आरोप है कि विधायक और उनके समर्थकों ने पहले चिकित्सकों के साथ मारपीट की और बाद में पुलिस पर दबाव डालकर छात्रावास में कनिष्ठ चिकित्सकों की पिटाई करवाई। पुलिस ने 24 चिकित्सकों को गिरफ्तार कर जेल में भी डाल दिया। घटना के विरोध में कानपुर सहित राज्य भर के सभी मेडिकल कालेजों और अस्पतालों के चिकित्सक शनिवार से हड़ताल पर हैं। हड़ताल समाप्त करवाने को लेकर राज्य सरकार की तरफ से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलकर पूरे मामले पर हस्तक्षेप और सुरक्षा की मांग करेगा। सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने मंगलवार को चिकित्सकों से हड़ताल समाप्त कर काम पर लौटने की अपील की।
केंद्रीय मंत्री आऱ पी़ एऩ सिंह ने भी चिकित्सकों से काम पर लौटने की अपील करते हुए मंगलवार को कहा कि इस हड़ताल में गरीब जनता बुरी तरह से पिस रही है। चिकित्सकों को इस पर ध्यान देना चाहिए। लेकिन राज्य सरकार भी इस मामले पर तत्काल ठोस कार्रवाई करे।

हड़ताल पर जूनियर डॉक्टर
उत्तर प्रेदश के डॉक्टर हड़ताल पर हैं। जगह-जगह डॉक्टरों का प्रदर्शन जारी है।

अखिलेश यादव की अपील
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोमवार को कहा, "जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, लेकिन चिकित्सकों से अपील है कि वे काम पर लौटें। इस तरह हड़ताल करना अच्छी बात नहीं है। बातचीत के रास्ते खुले हैं।"

फिर भी हड़ताल जारी
मुख्यमंत्री के आश्वासन और अपील का चिकित्सकों पर कोई असर नहीं हुआ है। उनकी मांग है कि सपा विधायक और कानपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पर कार्रवाई हो। इस बीच पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए 24 चिकित्सकों को जमानत पर छोड़ दिया गया लेकिन चिकित्सक जेल से बाहर आने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि उनके खिलाफ दर्ज किए मामले वापस लिए जाएं।

डॉक्टरों ने दिया इस्तीफा
इस बीच कानपुर सहित विभिन्न मेडिकल कालेजों के करीब 800 कनिष्ठ चिकित्सकों ने घटना को लेकर सरकार को इस्तीफा भेज दिया है।

मरीज बेहाल
प्रदेश भर के अस्पतालों में मरीज परेशान हैं। इलाज नहीं मिल पाने के कारण अब तक 37 लोगों की जाने जा चुकी हैं।












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