वेंटिलेटर्स, ऑक्सीजन और बेड की कमी से जूझ रहे यूपी के अस्पताल, बेमौत मारे जा रहे लोग

लखनऊ के अपोलोमेडिक्स अस्पताल के सीईओ-एमडी डॉ. मयंक सोमानी ने इस पूरे मंजर को सुनामी बताया। उन्होंने रेडिफ.कॉम को इस बाबत दिये साक्षात्कार में लखनऊ और उत्तर प्रदेश में कोविड की वर्तमान परिस्थिति पर खुलकर चर्चा की।

लखनऊ, 25 अप्रैल। उत्तर प्रदेश से दिल दहलाने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं। गाजियाबाद, लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद समेत कई शहरों के श्मशान घाटों में दाह संस्कार के लिए लंबी लाइनें लगी हैं। एक बेटी लखनऊ के एक अस्पताल के बाहर कोरोना से मर चुके अपने पिता की लाश के पीछे आंसू बहा रही है। उसके पिता को ऑक्सीजन और बेड की सुविधा मिल गई होती तो शायद उसके पिता आज जिंदा होते।

corona cases

लखनऊ अस्पताल के बाहर फर्श पर कई लाशें लिपटी हुई पड़ी हैं। वहीं, नोएडा में एक कोरोना टेस्टिंग केंद्र के बाहर टेस्ट कराने वालों की तादाद बढ़ती ही जा रही है। इसके अलावा लखनऊ में एक बुजुर्ग ने ऑक्सीजन सिलेंडर और बेड मिलने की उम्मीद में अस्पताल के बाहर अपनी कार में ही दम तोड़ दिया। वाराणसी में गंगा के घाट लाशों से पटे पड़े हैं। ऐसा मंजर पहले कभी नहीं देखा।

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लखनऊ के अपोलोमेडिक्स अस्पताल के सीईओ-एमडी डॉ. मयंक सोमानी ने इस पूरे मंजर को सुनामी बताया। उन्होंने रेडिफ.कॉम को इस बाबत दिये साक्षात्कार में लखनऊ और उत्तर प्रदेश में कोविड की वर्तमान परिस्थिति पर खुलकर चर्चा की।

क्या आपको लगता है कि लखनऊ में कोविड मरीजों का आंकड़ा सही है या इसमें त्रुटि की गुंजाइश है?

इसमें त्रुटि हो सकती है क्योंकि कुछ लोगों के आरटी-पीसीआर टेस्ट नेगेटिव आ रहे हैं, लेकिन वह फिर भी कोरोना पॉजिटिव है। किसी भी परिक्षण के दौरान थोड़ी बहुत खामी की गुजाइश रहती है। ऐसे मरीजों को बताया जा रहा है कि वे किसी अन्य बीमारी से पीड़ित है, जबकि वास्तव में उन्हें कोरोना है।

क्या कोरोना के कारण हो रही मौतों का आंकड़ा सही है?

इसमें थोड़ी बहुत गलती की गुंजाइश हो सकती है। लेकिन ज्यादातर मौतें कोरोना से ही हो रही हैं। कुछ मौतें ऐसी हो सकती हैं जिन्हें कोरोना का नाम दे दिया गया हो, लेकिन ऐसी संख्या बेहद कम है।

पिछले साल के अंत में भारत में सब ठीक होता दिख रहा था, मृत्यु दर भी काफी कम थी, लेकिन अब सब बदल गया है। कोई नहीं कह सकता कि यह कब कम होगा। क्या कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं?

लोग मर रहे हैं यह बात सही है, लेकिन कोरोना से मरने वालों की दर अभी भी कोई ज्यादा नहीं है। कोरोना से संक्रमित होने वाले मरीजों के मुकाबले इससे मरने वाले लोगों की संख्या काफी कम है। अभी यह ज्यादा घातक नहीं हुआ है। भारत में कोरोना से मरने वालों की दर अभी भी 1.5 से 2.5 है।

तो क्या हमारी कुल जनसंख्या के मुकाबले मृत्यु दर काफी कम है?
हम ये देख रहे हैं कि लोग काफी मात्रा में संक्रमित हो रहे हैं और हम सभी को यह समझना होगा कि आखिर हम कैसे संक्रमित हो रहे हैं। किसी को दोष देने के बजाय हमें खुद अपना ध्यान रखना होगा। अभी भी देश में कोरोना से मरने की दर काफी कम है।

आप कह रहे हैं कि मृत्यु दर बहुत कम है। लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं जिन्हें मरना नहीं था, लेकिन ऑक्सीजन, वेंटिलेटर्स और बेड की कमी से वो मर गए?

इस तथ्य से इंकार नहीं किया जा सकता। सरकार भी इसे मान रही है। जिस हिसाब से मरीज बढ़ रहे हैं उसके मुकाबले बेड और वेंटिलेटर्स की कमी है।

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