34 साल बाद कोर्ट रूम में तब्दील होगी UP विधानसभा, जानिए क्या है पूरा मामला

प्रमुख सचिव (गृह) और डीजीपी को आरोपी को सदन को सौंपने के लिए कहा गया है। अधिकारियों ने कहा कि 34 साल बाद यह सदन विशेषाधिकार हनन मामले में सुनवाई के लिए अदालत में बदल जाएगा।

यूपी विधानसभा

Uttar Pradesh Legislative Assembly: उत्तर प्रदेश विधानसभा में 34 साल बाद एक बार फिर विधानसभा को कोर्ट रूम में तब्दील किया जाएगा। विधानसभा में शुक्रवार को एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी और पांच सेवारत पुलिसकर्मियों को एक सदस्य के विशेषाधिकार हनन के लिए दी जाने वाली कारावास की अवधि तय करने के लिए सदन में लगी कोर्ट में सुनवाई होगी। दरअसल 15 सितंबर, 2004 को कानपुर नगर में तत्कालीन बीजेपी विधायक सलिल विश्नोई ने विशेषाधिकार हनन का मामला उठाया था।

आज सदन में होगी इस मामले पर सुनवाई

प्रमुख सचिव (गृह) और डीजीपी को आरोपी को सदन को सौंपने के लिए कहा गया है। अधिकारियों ने कहा कि 34 साल बाद यह सदन विशेषाधिकार हनन मामले में सुनवाई के लिए अदालत में बदल जाएगा। इससे पहले 2 मार्च, 1989 को, विधानसभा ने तत्कालीन यूपी तराई विकास जनजाति निगम के एक अधिकारी शंकर दत्त ओझा को तलब किया था, जिन पर सदन के सदस्य हरदेव के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया गया था।

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    सलिल विनोई ने 2004 में उठाया था मामला

    15 सितंबर, 2004 को सलिल विश्नोई कानपुर में बिजली कटौती के खिलाफ जिलाधिकारी (कानपुर नगर) को एक ज्ञापन सौंपने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे थे, जब पुलिस कर्मियों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया था। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने इस संबंध में एक प्रस्ताव पारित होने के बाद प्रमुख सचिव (गृह) और डीजीपी को विधानसभा के समक्ष पुलिस कर्मियों को पेश करने का निर्देश दिया। संसदीय मामलों के मंत्री सुरेश खन्ना ने सदन में प्रस्ताव पेश किया था कि इन कर्मियों को सदन के समक्ष पेश किया जाए और शुक्रवार को उनके कारावास पर विचार किया जाए।

    सदन में पेश होंगे ये आरोपी अधिकारी

    शुक्रवार को सदन के समक्ष पेश होने वालों में तत्कालीन सीओ बाबूपुरवा, कानपुर नगर, अब्दुल समद (जो दूसरी सेवा में चले गए और एक आईएएस अधिकारी के रूप में सेवानिवृत्त हुए), तत्कालीन एसएचओ, किदवई नगर पुलिस स्टेशन, ऋषिकांत शुक्ला, तत्कालीन एस-आई शामिल हैं। कोतवाली थाने के तत्कालीन सिपाही त्रिलोकी सिंह, किदवई नगर थाने के तत्कालीन आरक्षक छोटे सिंह यादव, काकादेव थाने के तत्कालीन आरक्षक विनोद मिश्रा और काकादेव थाने के तत्कालीन आरक्षक मेहरबान सिंह यादव भी उपस्थित रहेंगे।

    बीजेपी विधायक ने की थी सदन से हस्तक्षेप की मांग

    दरअसल, विश्नोई ने 25 अक्टूबर, 2004 को सदन को विशेषाधिकार हनन की जानकारी दी थी। उन्होंने अपने नोटिस के साथ अखबार की कतरनें, फोटोग्राफ और मेडिकल रिपोर्ट संलग्न कर सदन को विशेषाधिकार हनन की जानकारी दी थी। 28 जुलाई 2005 को राज्य विधान सभा के तत्कालीन उपाध्यक्ष और तत्कालीन विशेषाधिकार समिति के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने तत्कालीन सीओ (बाबूपुरवा) अब्दुल समद को कारावास देने और अन्य पुलिसकर्मियों को सदन में बुलाकर फटकार लगाने की अनुशंसा की थी।

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