कैराना से निकलेगा भाजपा के लिए 2017 की जीत का मंत्र

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी मंथन कर रही है कि किन मुद्दों और चेहरों के साथ यूपी की सियासत को जीता जाए। ऐसे में कैराना का मुद्दा पार्टी के हाथ उस वक्त लगा है जब पार्टी के दिग्गज नेता किसी बड़े मुद्दे को लेकर यूपी में चुनावी शंखनाद कर सके।

तो कुछ इस तरह से यूपी में 2014 को 2017 में दोहरायेगी भाजपा

This is why Kairana will be the core agenda in UP election for BJP

बडे़-बड़े दिग्गज उतरे मैदान में

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कैराना के मुद्दे को काफी प्राथमिकता से उठाया है और पार्टी के बड़े-बड़े दिग्गज नेता और मंत्री इस मुद्दे पर प्रदेश सरकार पर जमकर हमला बोल रहे है। कैराना मुद्दे पर अखिलेश सरकार को घेरने वालों में योगी आदित्यनाथ, मेनका गांधी, सदानंद गौड़ा, अमित शाह, राजनाथ सिंह, किरन रिजिजू जैसे दिग्गज शामिल हैं। ऐसे में इस मुद्दे की अहमियत को समझा जा सकता है।

पश्चिमी यूपी में मुस्लिमों की आबादी

कैराना का मुद्दा भाजपा के लिए दादरी और अयोध्या से भी बढ़कर इसलिए हैं क्योंकि यह पश्मिमी यूपी का अहम हिस्सा है। दिल्ली से महज कुछ दूरी पर कैराना में इसलिए भाजपा के लिए इतना अहम है क्योंकि यहां मुस्लिम आबादी काफी ज्यादा है। मुस्लिम औऱ जाट आबादी के मद्देनजर से यह इलाका काफी अहम हो जाता है।

अहिर-जाट-गुज्जर-राजपूत का युग

1980 में इसी इलाके से चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खड़ा किया था। महेंद्र सिंह ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए किसी भी तरह के कर्च और टैक्स को देने के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया था। पश्चिमी यूपी में अजगर गुट पर पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की अच्छी पैठ थी। अजगह को अहिर, जाट, गुज्जर, राजपूत के तौर पर जाना जाता है। अजगर गुट ने राजनैतिक गोलबंदी करके एक ऐसी पॉलिटिकल फोर्स बनायी जिसने राजनैतिक दलों को उनकी ओर झुकने को मजबूर कर दिया।

मुलायम की मजगर चाल

यहां यह बात भूलने की जरूरत नहीं है कि मुलायम सिंह भी पश्चिमी यूपी में अच्छी पकड़ रखते हैं और यह उनकी जन्मस्थली है। मुलायम सिंह यादव खुद जाति से अहिर हैं ऐसे में अहिर जाति पर उनकी पैठ है। लिहाजा उन्होंने अजगह को मजगर में तब्दील करते हुए मुस्लिमों को भी इस गुट में इकट्ठा करके इस गुट को काफी मजबूत किया था।

अशांत पश्चिमी यूपी

बहरहाल यह बीते वक्त की बात है लेकिन मौजूदा समय में कैराना काफी अलग है। पहली अहम वजह यह है कि यह क्षेत्र अब शांतिपूर्ण नहीं है और आरोप हैं कि हिंदुओं को यहां से पलायन करना पड़ रहा है। यहां मुजफ्फरनगर के दंगों ने इलाके की शांति को लंबे समय तक के लिए खत्म करके रख दिया था। दूसरी जो सबसे बड़ी वजह है वह यह है कि समय के साथ अजगर और मजगर का गठजोड़ खत्म हो चुका है। कैराना को भाजपा ने दूसरा कश्मीर नहीं बनने देने की बात कही है। खुद अमित शाह ने भी अखिलेश सरकार पर सीधा हमला बोला। पार्टी इस मुद्दे को पूरी तरह से लोगों के बीच ले जाने में जुटी है।

कैराना की आंछ अखिलेश यादव तक पहुंची

इन सब के बीच लोगों के बीच यह संदेश भी गया है कि बिना आग के धुंवा नहीं उठता है। भाजपा के ताबड़तोड़ हमलों की वजह से अखिलेश सरकार ने इसकी जांच के लिए कमेटी भी बना दी है। अहिर और मुसलमान दोनों के वोट बैंक सपा सरकार के पाले में है और दोनों ही वोट बैंक भाजपा से काफी दूर हैं। वहीं जाटों ने जिस तरह से हरियाणा में मोर्चा खोला उसने भी पार्टी की मुश्किलें बढ़ायी है।

वोटो का ध्रुवीकरण बदल सकता है समीकरण

ऐसे में भाजपा पश्चिमी यूपी को नजरअंदाज नहीं कर सकती है और वह पूरी कोशिश में जुटी है कि उसे एक बड़े वर्ग का वोट हासिल हो सके। ऐसे में अगर वोटों का ध्रुवीकरण होता है तो पार्टी को जबरदस्त सफलता हासिल हो सकती है।

2014 के लोकसभा चुनाव में सभी 19 संसदीय क्षेत्र जोकि पश्चिमी यूपी की जाट बेल्ट में थे जिसमें सहारनपुर, फतेहपुर सीकरी शामिल हैं भाजपा के खाते में गयी थी। मुजफ्फरनगर के दंगों के बाद भाजपा को बड़ी संख्या में हिंदुओं की विभिन्न जातियों का वोट मिला था।

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