यूपी: मानसून सत्र का पहला दिन हंगामाखेज, सपाइयों ने योगी सरकार के खिलाफ किया विरोध प्रदर्शन
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच विधानमंडल के मानसून सत्र की शुरुआत हो गई। सत्र के पहले दिन सदन के दिवंगत सदस्यों, कोरोना संक्रमण से जूझते हुए जान गंवाने वाले कोरोना योद्धाओं और गलवान घाटी में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई। इस सत्र की कार्यवाही में कोरोना वायरस प्रोटोकॉल का पालन करते हुए 65 साल के ऊपर के सदस्य ऑनलाइन शामिल हुए। सत्र शुरू होने से पहले सपाइयों ने कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर विधानसभा गेट पर प्रदर्शन किया। सपा विधायकों ने योगी सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
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सदन में दी गई दिवंगतों को श्रद्धांजलि
विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने बताया कि पहले दिन गुरुवार को सुबह 11 बजे सदन के चार दिवंगत सदस्यों -वीरेंद्र सिंह सिरोही, पारसनाथ यादव, कमल रानी वरुण व चेतन चौहान के निधन पर शोक संवेदना के बाद कार्यवाही स्थगित कर दी गई। पहली बार सदन में कुछ लोग वर्चुअल ढंग से उपस्थित हुए। 65 वर्ष से अधिक उम्र के विधायकों को सत्र में वीडियो कांफ्रेंसिंग से जोड़ा गया। सिर्फ 65 साल से कम उम्र के विधायकों को ही सदन में मास्क और ग्लव्स के साथ प्रवेश दिया गया। कोरोना महामारी के दौरान संवैधानिक बाध्यता के कारण इस सत्र के लिए अनेक ऐसी व्यवस्थाएं करनी पड़ रही हैं, जो विधानसभा के इतिहास में पहली बार हुई। मसलन दर्शक दीर्घा में भी विधायकों को बैठना पड़ा। लॉबी में बैठकर भी विधायक सदन की कार्यवाही का हिस्सा हुये।

विधानसभा गेट पर सपाइयों का प्रदर्शन
मानूसन सत्र शुरू होने से पहले विधानसभा गेट पर सपा विधायक और पार्षद विरोध प्रदर्शन करते हुए पहुंचे। सपा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम की अगुवाई में प्रदर्शन करते हुए विधायक और पार्षद योगी आदित्यनाथ सरकार के खिलाफ खराब कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और कोरोना संकट को लेकर नारेबाजी करने लगे।

कुछ सपा विधायक और पार्षद पीपीई किट पहनकर आए थे। उनके हाथों में नारे लिखी हुई तख्तियां थीं। प्रदर्शन के दौरान कुछ विधायक गेट नंबर 2 पर चढ़ते दिखे। सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ीं। सत्र के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस चौकस थी। उनके साथ सपाइयों की थोड़ी नोकझोंक भी हुईं।

योगी सरकार को इन मुद्दों पर घेरने की तैयारी
सपा, बसपा और कांग्रेस मानसून सत्र के दौरान योगी सरकार को कानून व्यवस्था, कोरोना संकट और ब्राह्मण समुदाय के लोगों की हत्या के मुद्दे पर घेरने की तैयारी में है। कांग्रेस की नेता विरोधी दल अराधना मिश्रा मोना ने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था नाम की कोई बात नहीं बची है। सरकारी की गलत नीतियों से लोग परेशान हैं। एक जाति समुदाय को टारगेट कर उस पर जुल्म किया जा रहा है। कांग्रेस के पूर्व सांसद जितिन प्रसाद ने बुधवार को विधायकों से अपील की थी कि दलगत भावना से ऊपर उठकर ब्राह्मण उत्पीड़न का मुद्दा सरकार के सामने प्रमुखता से उठाएं।












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