हार का स्‍वाद चखने के बाद भी इन शहरों पर 'मुलायम' हैं नेताजी

Akhilesh Yadav
कानपुर। प्रदेश की कानून-व्यवस्था के लिए बिजली संकट अब एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। पारा चढ़ने के साथ ही बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने में पावर कारपोरेशन नाकाम हो रहा है। इस अधाधुंध कटौती से परेशान प्रदेशवासी जगह-जगह धरना-प्रदर्शन व घेराव शुरू है। विडंबना यह कि जहां प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में अधाधुंध कटौती है वहीं इटावा, कन्नौज, मैनपुरी जैसे सपाई गढ़ कटौती मुक्त हैं। सरकार लखनऊ में 24 घंटे बिजली देने का दावा करती है लेकिन सत्य जनता जानती है।

मई के पहले हफ्ते से ही गर्मी में इजाफा होने के साथ ही बिजली की मांग में तेजी से बढ़ोत्तरी होने लगी थी लेकिन लोकसभा चुनाव के चलते कार्पोरेशन प्रबंधन जैसे-तैसे अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था कर कुछ हद तक शेड्यूल के मुताबिक प्रदेशवासियों को बिजली देता रहा लेकिन अब तो अधाधुंध कटौती शुरू है। कारपोरेशन का कहना है गर्मी बढ़ने से मांग में रिकार्ड बढ़ोतरी हो रही है लेकिन केंद्रीय व राज्य के बिजली घरों का उत्पादन घटा हुआ है।

ऐसे में तय शेड्यूल के मुताबिक आपूर्ति करना फिलहाल संभव नहीं है। प्रबंधन ने बिजली संकट के चलते गांवों व तहसील मुख्यालयों को बिजली देने का शेड्यूल 16 घंटे से घटाकर 12 घंटे किया है। जिला मुख्यालयों व बुंदेलखंड का शेड्यूल भी 17 घंटे से घटाकर अब 15 घंटे किया गया है लेकिन असली आपूर्ति इससे बहुत कम है।

पावर कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक एपी मिश्र का कहना है कि हमें केंद्र व राज्य के बिजली घरों से तय कोटे से तकरीबन 50 मिलियन यूनिट कम बिजली मिल पा रही है जबकि मांग 275 एमयू से ऊपर है। पांच रुपये यूनिट से ज्यादा महंगी बिजली होने के बावजूद इनर्जी एक्सचेंज से आठ करोड़ रुपये से 14 एमयू तक बिजली जुटाई गई है। ऐसे में बिजली की उपलब्धता 250-260 एमयू तक ही हो पा रही है। मांग व उपलब्धता में 15-25 एमयू की कमी के चलते बिजली की अतिरिक्त कटौती करनी पड़ रही है।

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