बिहार के बाद उत्तर प्रदेश में परीक्षा के नाम पर धोखा
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) बिहार की 10 वीं की परीक्षा में नकल को देश ने देखा। अब उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्न पत्र हूबहू बाजार में बिकने के लिए आ गए। इससे ज्यादा शर्मनाक उत्तर प्रदेश के लिए और क्या हो सकता है।
कैसा हुआ यह सब
जो तीन लोग गिरफ्तार हुए उनकी बातों को जिस ढंग से पुलिस ने रखा उससे लगता है मानो यह बाजार से चुटकी भर नमक गायब करने जैसा मामला है। पुलिस का कहना है कि प्रश्न पत्र नियमानुसार केन्द्रों पर 8.30 से 9 बजे के बीच खोलना था। एक प्रश्न पत्र वहीं व्हाट्सऐप पर डालकर भेज दिया। तो इतना ही आसान है प्रश्न पत्र को लीक कर देना। बाहर भेजा और कुछ मिनट में इसकी प्रतिलिपियां 5 लाख तक में बिकने के लिए उपलब्ध हो गईं तो सारी तैयारी पहले से की गईं थी। इसके पीछे प्रदेश भर में एक बड़ा तंत्र होगा।
चोर चालाक होते
संयोग से जल्दबाजी में ज्यादा कमाने के चक्कर में से खुले बाजार में लाया गया। चोर यदि थोड़ी सतर्कता बरतते तो पकड़ में आते भी नहीं। करीब 4 लाख 50 हजार छात्रों को तो परीक्षा देते समय इसका पता भी नहीं था। जैसे ही केन्द्र से छात्र परीक्षा देकर बाहर निकले उनको पता चला कि पेपर लीक हो गया। वे अपनी प्रतिक्रिया जिस तरह से व्यक्त कर रहे थे उससे उनकी मनोस्थिति का अनुमान लगाया जा सकता है।
लीक का केस
वरिष्ठ लेखक अवधेश कुमार ठीक कहते है कि व्हाट्सऐप पर प्रश्न पत्र बाहर आए और फिर मिनटों में इसकी हार्ड कॉपी उपलब्ध। यह 100 प्रतिशत लीक का मामला है। लीक एवं मूल प्रश्न पत्र बिल्कुल एक है। साफ है कि मूल प्रश्न पत्र की प्रतिलिपि बनाकर उसे व्हाट्सऐप्प से बाहर भेज दिया गया। बेहतर होगा कि अखिलेश यादव सरकार सारे मामले की जांच के आदेश दे।













Click it and Unblock the Notifications