मोदी सरकार ने पूरा किया 1 साल, गोद लिए गांवों का बुरा हाल

लखनऊ। केंद्र सरकार की सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत उत्तर प्रदेश के कई दिग्गज सांसदों के गोद लिए गांवों में एक वर्ष बीत जाने के बाद भी बुनियादी स्तर पर बदलाव की शुरुआत नहीं हुई। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) जैसे प्रमुख दलों के राष्ट्रीय अध्यक्षों ने भी उत्तर प्रदेश के गावों को गोद लिया है, लेकिन इन गांवों के निवासी अपने को ठगा-सा महसूस कर रहे हैं।

Farmer

जनप्रतिनिधियों की लापरवाही का आलम यह है कि सूबे के करीब 65 फीसदी सांसदों ने अभी तक अपने सांसद निधि का एक भी पैसा विकास कार्यो में नहीं लगाया है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी गोद लिए अपने गांव को एक बार देखने तक नहीं गईं।

गौरतलब है कि 11 अक्टूबर 2014 को लोकनायक जयप्रकाश के जन्मदिन पर प्रधानमंत्री ने सांसद आदर्श ग्राम योजना की शुरुआत की थी। इस योजना में गांवों को विकसित करने का कार्य अतिरिक्त धन के बजाय सांसद निधि से ही करने का प्रावधान किया गया है। यह योजना अब महज मजाक लगने लगी है। [पढ़ें- मोदी के एक साल: 'वादे' तमाम लेकिन 'वादों' का काम तमाम]

योजना शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आदर्श ग्राम योजना के तहत अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के जयापुर गांव को गोद लिया। इसके बाद समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने अपने संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ के तमोली गांव को गोद लिया। बसपा प्रमुख मायावती ने भी लखनऊ के माल गांव को गोद लिया है।

कांग्रेस अध्यक्ष और रायबरेली की सांसद सोनिया गांधी ने 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के अमर सेनानी राणा बेनी माधव बख्श सिंह के पैतृक गांव उड़वा को चुना है, जबकि उनके बेटे और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अमेठी के जगदीशपुर ब्लॉक के डीह गांव को गोद लिया है।

प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सांसद पत्नी डिंपल यादव ने अपने संसदीय क्षेत्र इत्र नगरी कन्नौज के सैयदपुर सकरी गांव को गोद लिया है। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ के बेंती को और बॉलीवुड स्टार हेमा मालिनी ने अपने संसदीय क्षेत्र मथुरा के रावल गांव को गोद लिया है।

उत्तर प्रदेश में आदर्श गांवों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गोद लिए गए जयापुर गांव में बदलाव की शुरुआत हुई है। छह माह पहले तक जयापुर गांव वाराणसी-इलाहाबाद हाइवे के पास होते हुए भी अनजान था। योजना की शुरुआत के बाद से ही यहां डाकघर, बैंक व कई मकानों का निर्माण हो चुका है।

सोनिया का गोदगांव :

कांग्रेस अध्यक्ष और रायबरेली की सांसद सोनिया गांधी ने जब उड़वा गांव को गोद लिया तो लोगों की इससे काफी उम्मीदें जुड़ गई थीं, लेकिन ग्रामीणों को इस बात का मलाल है कि सांसद ने उड़वा गांव को गोद तो ले लिया, लेकिन न तो उसे देखने आई और न ही उनका कोई नुमाइंदा लोगों का दुखदर्द जानने आया। सांसद निधि से विकास के लिए अभी तक फूटी कौड़ी भी नहीं मिली। गांव वालों ने बताया कि उन्हें लोग बताते हैं कि सड़क और हैंडपंपों के लिए प्रस्ताव बनाए गए हैं। लेकिन इन प्रस्तावों पर धन कब मिलेगा, कब विकास होगा, इस बारे में किसी को कुछ नहीं पता।

मुलायम सिंह यादव का गोदगांव :

आजमगढ़ के पल्हनी विकास खंड का तमोली गांव को मुलायम सिंह यादव ने गोद ले रखा है। जिला मुख्यालय से सटा होने के बाद भी यह गांव गुमनाम था। इसमें भू-भाग और खेती-बाड़ी तो थी पर विकास की रफ्तार नहीं थी। ग्रामीण बताते हैं कि कुछ योजनाओं का खाका भी तैयार है और उनके मूर्त रूप लेने का इंतजार है, जबकि तेजी के साथ निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज ने गांव की सूरत बदल दी है। गांव में डेयरी और स्टेडियम के खुलने का रास्ता साफ हो गया है। गांव के समग्र विकास के लिए 31 परियोजनाओं पर काम चल रहा है।

जिला विकास अधिकारी जगतनारायण राय ने बताया कि तमोली योजनाओं को अमलीजामा पहनाए जाने को लेकर 14 व 15 मई को गांव में समन्वय के लिए बैठक हो चुकी है। सभी को सांसद योजना के दिशानिर्देश उपलब्ध कराए जा चुके हैं। गांव की सबसे बड़ी समस्या है पानी की निकासी। गांव में नाला बनाने का काम जगह-जगह विवाद के चलते रुका हुआ है।

राजनाथ सिंह का गोदगांव :

राजनाथ सिंह ने लखनऊ के पास बेंती गांव गोद लिया है, लेकिन पांच महीने बीतने के बाद भी यह गांव अपने विकास की बाट जोह रहा है। सड़कें, पानी, कॉलेज और अस्पताल जैसी कई मूलभूत सुविधाएं अभी भी इस गांव की पहुंच से कोसों दूर नजर आती हैं। बीते 10 अप्रैल को लखनऊ आए राजनाथ सिंह ने ऐलान किया था कि बेंती गांव के विकास का खाका खींच लिया गया है। जल्द ही वहां विकास कार्य शुरू कर दिए जाएंगे, लेकिन यहां जब लोगों से बात की गई, तो पता चला कि उनकी उम्मीदें खत्म हो चुकी हैं।

छह दिसंबर को राजनाथ सिंह बेंती गांव में ओरिएंटल बैंक की शाखा का उद्घाटन करने आए थे। इसके बाद बैंक की ओर से ही 10 हैंडपंप लगवाए गए, जबकि इस गांव में अभी भी 30 हैंडपंपों की जरूरत है। बेंती गांव के प्रधान गिरीश तिवारी का कहना है कि राजनाथ सिंह को गांव गोद लेने के बाद आम सहमति से 20 मांगों का प्रस्ताव भेजा गया था। लंबा वक्त बीत जाने के बाद उन्हें अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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