भगोड़े IPS अरविंद सेन ने एंटी करप्शन कोर्ट में किया आत्मसमर्पण, 50 हजार रुपए का इनाम था घोषित

Animal Husbandry Department scam, लखनऊ। 50 हजार रुपए के इनामी आईपीएस अधिकारी अरविंद सेन यादव (IPS Arvind Sen Yadav) ने आज एंटी करप्शन कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया है। आत्मसमर्पण करने के बाद अरविंद सेन यादव को कोर्ट ने 9 फरवरी तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। आपकों बता दें कि अरविंद सेन का नाम पशुपालन विभाग (Animal Husbandry Department) के 240 करोड़ रुपए के टेंडर घोटाले में सामने आया था। इस मामले में 25 दिसंबर को आरोपी आईपीएस अरविन्द सेन यादव को कोर्ट ने भगोड़ा घोषित कर दिया था। तो वहीं, 5 जनवरी को अरविंद सेन पर इनाम की राशि 25 हजार से बढ़कार 50 हजार रुपए कर दी गई थी।

IPS Arvind Sen Yadav surrenders in Anti Corruption Court

बता दें कि आईपीएस अरविंद सेन यादव के घर पर पुलिस ने कोर्ट के आदेश के बाद कुर्की भी कर चुकी थी। साथ ही पुलिस पिछले काफी समय से अरविंद सेन को गिरफ्तार करने के प्रयास भी कर रही है, लेकिन गिरफ्तार नहीं कर सकी। बताया जा रहा है कि आईपीएस अरविंद सेन यादव ने दो दिनों पहले कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी वकील के माध्यम से डाली थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। हालांकि, सोमवार को अरविंद सेन के वकील ने कोर्ट को सरेंडर करने का मौखिक आश्वासन दिया था, जिसके बाद अरविंद सेन ने आज कोर्ट में सरेंडर कर दिया। सरेंडर के बाद अरविंद सेन यादव को कोर्ट ने 9 फरवरी तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

क्या था पूरा मामला?
इंदौर के पीड़ित व्यापारी मंजीत भाटिया की शिकायत के बाद इस मामले में 14 जून को राज्यमंत्री जय प्रताप निषाद के निजी प्रधान सचिव रजनीश दीक्षित, निजी सचिव धीरज कुमार देव, पत्रकार आशीष राय, अनिल राय के अलावा तीन अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। मंजीत भाटिया ने गिरफ्तार हुए लोगों पर आरोप लगाया था कि भांडा फूटने पर जब उन्होंने अपना पैसा वापस मांगा सीबीसीआईडी के तत्कालीन एसपी अरविंद सेन के साथ सांठगांठ कर उनको धमकी दी गई थी।

मंजीत भाटिया के आरोपों की जांच एसटीएफ ने की तो सीबीसीआईडी के तत्कालीन एसपी अरविंद सेन के खिलाफ लगे आरोप सही पाए गए। आरोप सही पाए जाने के बाद योगी सरकार ने कार्रवाई करते हुए इनको निलंबित कर दिया था। इस फर्जीवाड़े की एसटीएफ ने जांच की तो घोटाले के आरोपियों से आईपीएस दिनेश दुबे की मिलीभीगत का भी पता चला। वे रुल्स एंड मैनुअल्स में डीआईजी थे। सरकार ने उनको भी सस्पेंड कर दिया था।

विधानसभा सचिवालय में बनाया था दफ्तर
जून में इंदौर के व्यापारी मंजीत पांडेय को पशुपालन विभाग में 240 करोड़ रुपए का ठेका दिलाने के लिए विधानसभा सचिवालय में फर्जी दफ्तर बनाकर बड़े ही फिल्मी तरीके से करीब दस करोड़ का चूना लगाया गया। पैसे मांगने पर जब आरोपियों ने उसे धमकाया तब जाकर व्यापारी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक अपनी बात पहुंचाई। शासन ने हजरतगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराकर एसटीएफ को मामले की जांच में लगाया तो मामले का परत-दर-परत खुलासा हो गया।

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